अखिलेश अखिल
दलालों के दलदल में फंसी सरकार
हमारी सरकार चाहे जितनी भी तरक्की की डींगे मार ले सच्चाई यही है कि आजादी के 63 बरस बाद भी गरीबों और आम लोगों की हालत में कोई सुधार नहीं आया है। कांगेस की अगुआई वाली केंद्र सरकार गरीब और आम लोंगों के साथ रहने की बात करती है लेकिन अभी तक इस सरकार ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिससे आम लोगों का भला हुआ हो, गरीबों के आंसू पोछे गए हों और आम लोगों को लगा हो कि सरकार का कोई फैसला उनके हित में भी किया गया है ।
दिल्ली के मीडिया मण्डी की मजबूर लड़कियां
आज हम आपका परिचय कराते है देश की राजधानी दिल्ली के मीडिया घरानों और उससे जुड़े कुछ ऐसे पत्रकारों से जिन्होंने उदारीकरण के इस दौर में खुलेपन का भरपूर फायदा उठाया है या फिर आज भी फायदा उठाकर पत्रकारिता को कलंकित कर रहे हैं। सबसे पहले संगठित रूप से मीडिया में यौनाचार की कहानी हमें झंडेवालान इलाके में एक अखबार में देखने को मिली थी।...दक्षिण की मीडिया के दुराचारी
अपने देश के मीडिया में आज भी कुछ अच्छे लोग हैं जिसके कारण पत्रकारिता में आम आदमी की आवाज बनी हुई है. लेकिन ये कुछ अच्छे लोग बस कुछ की ही संख्या में हैं. दूर दक्षिण में आइये. नारायण दत्त तिवारी का पोर्न स्टिंग दिखाकर उन्हें राजभवन से हटानेवाले हैदराबाद की पत्रकारिता में लड़कियों का जमकर शोषण होता है. इस दूसरी किश्त में हम दक्षिण की मीडिया में दुराचार का जायजा लेंगे....बिहार की मीडिया में यौनाचार की परंपरा
मीडिया में भ्रस्टाचार के साथ ही मीडिया में यौनाचार की परम्परा भी इन दिनों कुलाचे मार रही है। हालाकि मीडिया में यौनाचार की परम्परा काफी पुरानी है। पहले और आज में अंतर केवल इतना है की पहले इक्का दुक्का लोग गलत यौन संबंधो के लिए जाने जाते थे , लेकिन आज बहुतेरे मीडिया कर्मी सेक्सुअल संबंधो को अपना अधिकार और कर्त्तव्य मान बैठे है।...लकवाग्रस्त, लाचार और बेबस झारखण्ड
आप कह सकते हैं कि जनता सब जानती है. झारखण्ड की असलियत के बारे में संताल के इस 65 वर्षीय आदिवासी का बयान तो सुनिए- "झरखण्डवा पर कोनो संकट नही आया है। संकट तो नेताओं के कुरसिया पर आइल है। हम लोगो के पेट में दरिदर नही घुसल है। नेता लोग ही कुर्सी ला छिछियाइल फिर रहल है। हमरी गंजी के छेद मत गिनिए,नेता लोग जाके इ गिने की उनके केतना सिटवा पर सेंध लगने वाला है । अपना घर और स्टेट संभलता नही ,चलें है झारखंड बनाने। सार सब चोरे है।"...पैसा दीजिए तबे कभर होइएगा ...
मधु कोड़ा प्रकरण सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में कोई भूचाल आ गया हो, ऐसी बात नही है । लेकिन मीडिया में भूचाल साफ दिख रहा है । एक तरफ पूरा देश कोड़ा के दंश से आहत है लेकिन राज्य का मीडिया कोड़ा के चुनावी प्रचार को महिमामंडित करने में लगा हुआ है। लोकतंत्र में मीडिया की इस भूमिका को देखकर यहां के आम लोग हतप्रभ है। पैसे की भूख ने हमे इतना नीचे गिरा दिया है कि लोगों ने भ्रष्ट नेताओं के साथ हम पत्रकारों को भी एक ही श्रेणी में खड़ा कर दिया है । फिर लोग विश्वास किस पर करे, यह बड़ा सवाल खड़ा है ।...Author info
