आलोक तोमर
दूरदर्शन को सोखकर रसूखदार हुए रजत
एक टीवी चैनल स्थापित करने में करोडों रुपए लगते हैं और उसे चलाने में और करोड़ों रुपए हर साल। दिल्ली में एक ऐसा टीवी चैनल है जिनके मालिक कश्मीरी गेट के एक अपेक्षाकृत गरीब परिवार में पैदा हुए थे. वे जिस घर में पैदा हुए थे उसमें एक कमरे में दर्जनों लोग सोते थे। लेकिन आज वही आदमी एक न्यूज चैनल का मालिक है. बात इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा की हो रही है।
रतन टाटा की दलाली और दादागीरी
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में रतन टाटा ने नीरा राडिया के जरिए दयानिधि मारन की बजाय ए राजा को संचार मंत्री बनवाने का उपाय किया था. नीरा राडिया और रतन टाटा के बीच 2009 की बातचीत के जो और टेप निकल कर आए हैं उनका एक हिस्सा हम आपके सामने ला रहे हैं. इसमें साफ होता है कि कैसे रतन टाटा किसी भी कीमत पर दयानिधि मारन को संचार मंत्री बनने से रोक रहे थे. ...भूख और गरीबी को फिक्स करने का खेल
हजारों करोड़ की बातें हो रही है। लाखों करोड़ के सौंदे हो रहे हैं। करोड़ों रुपए के एडवांस इनकम टेक्स भरे जा रहे है। चियरगर्ल्स नाच रही है। देर रात तक पार्टियां हो रही है। प्राइवेट जहाज उड़ रहे है। टीवी चैनलों पर पैसे की बारिश हो रही है। मल्टीप्लेक्स सिनेमा की जगह बड़े पर्दे पर डिनर के साथ क्रिकेट के मैच दिखा रहे हैं। मगर यह सब मध्य प्रदेश में ओरछा के पास के गांवों या टीकमगढ़ जिले में नहीं हो रहा।...भीख मांगकर विस्फोट करनेवाले लोग
आलोक तोमर विस्फोट.कॉम के शुरूआत में ही हमसे जुड़ गये थे. उनका नाम बड़ा है और पत्रकारिता में अनुभव भी कम नहीं है. सोमवार को उन्होंने अपनी वेबसाईट आलोकतोमर.कॉम पर विस्फोट और मेरे बारे में वह सब लिखा है जो उनके मन में है. हम अपने पाठकों के लिए वह पूरा का पूरा लेख प्रकाशित कर रहे हैं. उन्होंने जो कुछ लिखा है उसे विस्फोट.कॉम के पाठकों के सामने जरूर प्रस्तुत कर रहा हूं. ठीक वैसे ही जैसे उनके लिखे को अब तक प्रकाशित करता आया हूं. ...अब हिंदी में सुनिए हिंदी की बात
पता नहीं हिंदी को देवनागरी क्यों कहा जाता है? अगर यह संज्ञा हैं तो ठीक है मगर सिर्फ इसलिए कि भारत की इकतालीस प्रतिशत आबादी हिंदी बोलती और समझती है, इसे देवनागरी कहना बहुवचन का दुरूपयोग करना होगा। इसके अलावा शास्त्रीय हिंदी, आधिकारिक हिंदी और असली हिंदी यानी बोलचाल की हिंदी के बीच भेद भी तय कर लेने होंगे।...अभय छजलानी आलोक मेहता पैदा कर सकते हैं प्रभाष जोशी नहीं
अभय छजलानी को देखिए। वे कहते हैं कि नई दुनिया ने पत्रकारिता की कई पीढ़ियों को बनाया। वे कहते हैं कि राजेंद्र माथुर को हमने बनाया। शरद जोशी को हमने बनाया। प्रभाष जोशी को न वे याद करते हैं और न बुलाते हैं। इसलिए कि जब नई दुनिया कारोबार हो गया और अभय छजलानी डंडी मारने लगे तो इसका विरोध करने वालों में प्रभाष जोशी भी थे। नई दुनिया की यह औकात कभी नहीं थी कि वह राजेंद्र माथुर और प्रभाष जोशी को बनाए। उल्टे इन लोगों ने नई दुनिया को आकार और सम्मान दिया है। राजेंद्र माथुर की विशाल दृष्टि और प्रभाष जोशी की भाषा ने नई दुनिया को रचा है और अभय छजलानी किराए पर बुलाई गई भीड़ की मौजूदगी में अगर यह बात मंजूर नहीं कर रहे तो उनमें और एक सामान्य पत्रकार में फर्क क्या रह जाता है?...जॉर्ज साहब, आप रिटायर क्यों नहीं होते ?
दो दिन पहले जॉर्ज फर्नाडींज का फोन आया था। पहली बात जो ध्यान में आई वह यह कि जॉर्ज अब दोस्त या भाई कह कर नहीं, बंधु कह कर बात कर रहे हैं। जाहिर है कि उनका पर्याप्त भगवाकरण हो चुका है। जॉर्ज बहुत थकी हुई आवाज में बोल रहे थे और उन्होंने कुल मिला कर जो कहा उसका सार यह है कि शरद यादव और नीतिश कुमार उनकी उम्र का फायदा उठा कर उन्हें नष्ट करने में तुले हैं और मैं पत्रकार के नाते उनकी मदद कर रहा हूं।...आलोक तोमर की आपबीती
ये मामला है २००६ के फरवरी महीने का जब एक संपादक पर इल्जाम लगाया गया था कि उसने डेनिश कार्टून के बारे में भारत में लिखकर सांप्रदायिक अशांति फैलाने की कोशिश की थी. लेकिन उसी मामले में जब चार्जशीट लगाने की बात आयी तो पुलिस को 2 साल 4 महीनें और पांच दिन लग गये. वो भी ऐसे मामले में जहां अभियुक्त ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए अर्जी लगाए हुए है लेकिन पुलिस का तर्क है कि अगर अभियुक्त आजाद रहा तो यह न केवल जांच और कानूनी प्रक्रिया में बाधा पहुंचा सकता है बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी भारी खतरा हो सकता है....किचेन में यूरेनियम
कल रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एटमी करार की भव बाधाओं से जूझ और एक हद तक निपट कर सोए थे लेकिन जागे तो एक जोरदार धमाका उनका इंतजार कर रहा था।...Author info
