अमरनाथ झा
पूर्वोत्तर की आत्मघाती उपेक्षा
देश के पूरबी छोर पर स्थित प्रदेश मणिपुर को देश के अन्य हिस्सों से जोडने वाले राजमार्गो पर करीब दो महीने तक चली नाकेबंदियों की वजह से आवाजाही बंद रही। पूरे प्रदेश में खाने-पीने की चीजों, जीवनरक्षक दवाओं और पेट्रोलियम पदार्थों की घोर किल्लत उत्पन्न हो गई। सेना के विमानों की सहायता से अत्यावश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने की व्यवस्था हुई, पर ऐसी व्यवस्थाओं की अपनी सीमाएं होती है और इनसे जनजीवन को सामान्य तरीके से संचालित नहीं किया जा सकता। हालत आज भी कोई सुधरे नहीं है क्योंकि समस्या की जड़ें उसी तरह मजबूती से गड़ी हुई हैं.
ईमान की पत्रकारिता का ईनाम
पत्रकारिता का ईमान तो बाद में आता है. पहले पत्रकार का ईमान सामने खड़ा होता है. समाज भी पत्रकार से ईमान धरम की पत्रकारिता की दुहाई देता रहता है. लेकिन ईमान की पत्रकारिता का ईनाम क्या मिलता है इसे देखना हो तो अखिलेश अखिल से मिलिए. बिहार के औद्योगिक शहर रहे मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखनेवाले अखिल ने लिखने पढ़ने का रास्ता चुना तो कभी इसे उद्योग नहीं माना. लगभग बीस साल तक कलम घिसने के बाद अब चप्पल घिस रहे हैं. नौकरी मांगने के लिए नहीं, अपना ईमान बचाये रखने के लिए. बातचीत में वे बार-बार उसी ईमान की दुहाई देते हैं जिसका नामलेवा अब इस मीडिया तंत्र का हिस्सा ही नहीं रहा. ...भारत-चीन संबंध: प्यार और तकरार का सिलसिला बरकरार
भारत और चीन ने आपसी समझ बढाने के मकसद से दिल्ली और बीजिंंग के बीच प्रधानमंत्री स्तर पर जीवंत संचार संबंध (हाटलाइन) स्थापित करने का फैसला किया है। उच्चस्तरीय वार्ता के ताजा दौर की यह अकेली, पर बडी उपलब्धि रही। वार्ता आरंभ होने के ऐन पहले गुगल मैप ने अरूणाचल प्रदेश को लेकर जिसतरह से सीमा-विवाद को हवा देने की कोिशश की, उससे वार्ता में गतिरोध आने का अंदेशा उत्पन्न हो गया था। हालांकि बाद में गूगल ने अपनी गलती मान ली और मानचित्र में आवश्यक सुधार करने का वायदा भी किया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। एक अंतराष्ट्रीय मानचित्र में तो वर्षों तक अरुणचल प्रदेश को चीन का हिस्सा बताया जाता है, बाद में उस नक्शें के उपर लाल स्याही से क्रास कर दिया गया।...बात बात में बिगड़ गयी बात
इन चुनावों में अनेक कोने से कर्कश आवाजें कई ओर से आने लगी है। जहरीले बयानबाजी के एक सिरे पर वरुण गांधी हैं तो दूसरे सिरे पर राबडी देवी। बीच में छोटे-बडे नेताओं की लंबी कतार है। सार्वजनिक जीवन में आई विकृतियों के दोनों चरम सिरे दो नौसिखिए हाथों में हैं। एक चेहरा कुछ दिन पहले अंग्रेजी में कविता लिखतें वरुण का है तो दूसरे हाथ एक गृहिणी के हैं जिसे उसके कलाबाज पति ने भदेशपन की राजनीति का सिरमौर बना दिया है। लेकिन मामला केवल राबड़ी और वरुण तक सीमित नहीं है....तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा
जब टीएन शेषन मुख्य चुनाव-आयुक्त बने और चुनाव आचरण संबंधी नियमों को कडाई के लागू करने लगे तो मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बैठे व्यक्ति के इस तरह सर्वसत्ता संपन्न हो जाने का अंदेशा उत्पन्न हो गया जो आम चुनाव को संचालित करने में निजी अनमनस्यकता, मनमौजीपन और वैमनस्व के प्रभाव में समूचे चुनाव तंत्र को मनमाने ढंग से हांकने में संलग्न हो जाए। ऐसे खतरे से निपटने के लिए चुनाव आयोग को तीन सदस्यीय बनाया गया। लेकिन ताजा मामले में साफ हुआ है कि यह इंतजाम भी आयोग की निष्पक्षता को संदेह के दायरे से बाहर रखने में बुरी तरह असफल हुआ है।...देश के कर्णधार- बूढ़े और बीमार
चौंकने वाली बात है। देश के सूचना और प्रसारण मंत्री महीनों से समाचार से गायब हैं और किसी समाचार माध्यम को इसकी सुध नहीं ली। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की ओपेन हार्ट सर्जरी के दौरान उनके विश्वस्त कैबिनेट सहयोगी प्रियरंजन दासमुंशी का हाल-समाचार लेने की इच्छा किसी को नहीं हुई। लेकिन उन सरकारी-गैर सरकारी समाचार माध्यमों को उनके स्व-आरोपित कर्तव्य की याद दिलाने के लिए नहीं, हम प्रियरंजन को याद कर रहे हैं ताकि आप इसे याद कर सके कि देश की बागडोर कैसे लाचार और बूढों के हाथ में हैं।...बबुआ कब तक रहेंगे लाचार?
दिल्ली सरकार ने जब दिल्ली भोजपुरी-मैथिली अकादमी का गठन किया, तब ऐसा लगा था कि कम से कम राष्ट्रीय राजधानी में भाषाई अल्पसंख्यकों के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकारों को महत्व दिया जाने लगा है। तब मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने उन भाषाओं और उसे बरतने वाले समाज के विकास योजनाओं की घोषणा करके बडी उम्मीद भी जगा दी थी। उन दिनों राज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना के एक बयान और प्रवासी आबादी को महानगर की आधारभूत सुविधाओं पर अनावश्यक बोझ ठहराकर मुख्यमंत्री फजीहत झेल चुकी थी। ...खामोश अदालत जारी है
राज ठाकरे को किस तरह उग्र मराठी उभार का नायक बनाया जा रहा है, वह गौरतलब है। जमशेदपुर की अदालत से राजठाकरे के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को मुंबई पुलिस ने आखिरकार 15 नवंबर को जिस ढंग से तामील किया, उससे कानून की व्यवस्था के बारे में कैसे संकेत गए? वारंट एक महीना पहले जारी हुआ था और तब से मुंबई पुलिस´ इसे दबाए हुए रही। आखिरकार राजठाकरे अदालत में आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हुए। गिरफ्तारी के कागजात रास्ते में तैयार किए गए और झारखंड की अदालत से जारी वारंट के गैरजमानती जुर्मो से संबंधित धाराओं में नहीं होने से महाराष्ट्र की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।...महाराष्ट्र के मराठा तालिबान
शक्तिसंचय और शक्तिप्रदर्शन मूल तत्व हैं जिसे जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र या प्रांत के आधार पर लोगों के भडकने और गोलबंद होने में हासिल किया जाता है। इस सच्ची बात को कहने में राज ठाकरे ने उस मानसिकता को एकदम सच-सच उजागर किया जिसे हर किस्म के आंतकवाद का दाना-पानी कहा जा सकता है। ठाकरेगिरि के इस संस्करण में पुलिस की जिस मानसिकता को जायज ठहराया गया, उसके परिणाम झेलते हुए समूचा नागरिक समाज त्रस्त है। हरियाणा के भिवानी में बगैर कुछ पूछे गोली मार देने की घटना को आप क्या कहेंगे?...Author info
