Anand Pandey
नहीं, राहुल जेपी नहीं हो सकते!
दो दिन पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने राहुल गाँधी द्वारा छात्रों और युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता देने और उनसे संवाद करने की वजह से उनकी तुलना जवाहरलाल नेहरु, एपीजे अब्दुल कलाम और जेपी से की तो इसकी आलोचना भाजपा और रामविलास पासवान ने की. मोहन प्रकाश के बयान को देखें तो पता चलेगा कि उन्होंने जेपी के व्यक्तित्व और राजनीति से नहीं, युवाओं से उनकी संवाद-शैली कि तुलना की है. उनका पूरा बयान इस प्रकार है, " (जवाहरलाल) नेहरु के बाद कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम) थे जिन्होंने बच्चों को संबोधित किया. इसीप्रकार, जयप्रकाश नारायण के बाद, राहुल गाँधी हैं जिन्होंने युवाओं की जरूरतों, आकाँक्षाओं और देश में उनके भविष्य को संबोधित किया है."
सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
अपनी मध्य प्रदेश यात्रा के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव राहुल गाँधी द्वारा आरएसएस की तुलना सिमी से करने पर समूचा संघ परिवार बौखला गया है. इस बौखलाहट की वजह यह है कि जिस सिमी का विरोध कर संघ परिवारी अपनी राष्ट्रभक्ति का रंग चोखा करते थे उसी सिमी से संघ की तुलना उसे अप्रत्याशित क्षति पहुंचा सकती है. भारत और दुनिया के अकादमिक जगत के लोग, नेता और पत्रकार सभी संघ की स्थापना से लेकर अब तक यह कहते रहे की संघ एक सांप्रदायिक,फासीवादी और भारतीय संविधान की भावना के विरुद्ध खड़ा संगठन है. आज भी संघ के इस घातक चरित्र पर किसी को संदेह नहीं है....जहरीली राजनीति का योगी
पिछले कुछ सालों से पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और उसके आस-पास के जिलों में हिन्दू सांप्रदायिक राजनीति एक नए प्रकार के प्रयोग के दौर से गुजर रही है. जाति, धर्म, अपराध और साम्प्रदायिकता के मिश्रण की इस राजनीति के नेता हैं गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मठ के उत्तराधिकारी तथाकथित 'बाबा' योगी आदित्यनाथ. यों तो आदित्यनाथ भाजपा के टिकट पर गोरखपुर से निर्वाचित सांसद हैं लेकिन इस क्षेत्र में वे भाजपा के एजेंडे पर नहीं बल्कि अपने एजेंडे पर चलते हैं....Author info
