awesh tiwari
रोम रोम में इरोम
कश्मीरी अलगाववादियों की तरह उसने आज तक अपने हाथ में कभी पत्थर नहीं उठाया. हालांकि उसका भी विरोध उसी बात को लेकर है जिसे लेकर कश्मीर में पत्थरबाजों की पूरी फौज सड़कों पर उतार दी गयी. पूर्वोत्तर में सशस्त्र सेना अधिनियम समाप्त किया जाए. इरोम शर्मिला विरोध कर रही है लेकिन उसका हथियार आंदोलन नहीं, आत्मोत्सर्ग है. पिछले दस साल से उसने अन्न त्याग कर रखा है. पुलिस और प्रशासन नाक की नलियों से पौष्टिक पदार्थ पहुंचाकर भले ही उसके शरीर को जिंदा रखे हुए हैं लेकिन उसे जब भी मौका मिलता है वह राजघाट जाती है और फफककर रोती है. शायद शर्मिला के सत्याग्रह को समझने के लिए देश में दूसरी कोई जगह बची भी नहीं है.
आइये अरुंधती को लानत भेंजे
उसका बस चले तो वो हिंदुस्तान के सिर्फ इसलिए टुकड़े टुकड़े कर दे क्यूंकि ऐसा करने से वो भीड़ से अलग नजर आएगी। उसके पास हत्याओं को वाजिब ठहराने के तमाम तर्क हमेशा मौजूद रहते हैं ,क्यूंकि इसे वो खुद को महान साबित करने का औजार समझती है। संभव है इसके बहाने वो नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर रही हो। वो वामपंथ का ऐसा क्रूर चेहरा है जिसका इस्तेमाल मीडिया कभी अपनी टीआरपी बढाने में तो कभी व्यवस्था के विरुद्ध अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करता है। संभव है बहुतों को उससे मोहब्बत हो लेकिन हम अरुंधती को लानत भेजते हैं क्योंकि उसे राष्ट्र के अस्तित्व से नफरत है।...विकीलीक्स ने फिर साबित किया अमेरिका को हत्यारा
इराक में अमेरिकी सेना ने अपने आपरेशन के दौरान ना सिर्फ निर्दोष नागरिकों की हत्या की बल्कि युद्ध की कवरेज कर रहे पत्रकारों को भी मौत के घात उतार दिया। विकिलिक्स ने अमेरिका में इराकी आपरेशन को लेकर पेंटागन के जो डाटाबेस और रिकार्ड जारी किये हैं उनमे अमरीकी सेना के अपाची हेलीकाप्टर्स (क्रेजी हार्स 18) जो कि टेक्सास स्थित यु एस आर्मी के २२७ रेजिमेंट के फर्स्ट बटालियन का हिस्सा है के बारे में चौका देने वाले खुलासे किये हैं। विकिलीक्स द्वारा जारी किये गए एक वीडियो में अमेरिकी जवानों को सिर्फ खबरिया एजेंसी रायटर के दो जांबाज पत्रकारों की गलत सूचना देकर हत्या किये जाने बल्कि उनकी मौत पर ठहाके भी लगाये देखा जा सकता है।...अभिव्यक्ति की आजादी पर बुखारियों के वंशजों का कब्ज़ा
शाही इमाम सैयद अहमद शाह बुखारी नाराज हैं. उन्होंने वहीद को काफिर कहा और पीट दिया. बस चलता तो उसके सर कलम करने का फतवा जारी कर देते. हो सकता है कि एक दो दिनों में कहीं से कोई उठे और उसके सर पर लाखों के इनाम की घोषणा कर दे. वो मुसलमान था उसे ये पूछने की जुर्रत नहीं होनी चाहिए थी कि क्यूँ नहीं अयोध्या में विवादित स्थल को हिन्दुओं को सौंप देते? वैसे मै हिन्दू हूँ और मुझमे भी ये हिम्मत नहीं है कि किसी से पूछूं क्यूँ भाई कोर्ट के आदेश को सर आँखों पर बिठाकर इस मामले को यहीं ख़त्म क्यूँ नहीं कर देते? मैं ऐसा इसलिए नहीं पूछ सकता क्योंकि मै जानता हूँ ऐसे सवालों के अपने खतरे हैं....खबरी अपराधियों का सरगना साबित हुआ दैनिक जागरण
नक्सलवाद जमीन पर जितना है उससे अधिक अखबारों में है. टेलीवीजन चैनलों पर है. मीडिया में नक्सलवाद का जोर अनायास नहीं है. एक ओर जहां सरकार को मीडिया के इस रुख से फायदा मिल रहा है वहीं मीडिया घराने विज्ञापनदाता कंपनियों के हित साधने के लिए नक्सलवाद को अखबारों में बढ़ावा दे रही हैं. दैनिक जागरण ने हाल में ही ऐसी ही एक करतूत की जो सिर्फ और सिर्फ अपने विज्ञापनदाताओं को फायदा पहुंचाने के लिए खबर गढ़ी गयी थी....अदालत के फैसले पर अनावश्यक आक्षेप
अयोध्या मसले पर अदालत के फैसले की तारीफ न केवल भारत में हुई है बल्कि अरब देशों और पाकिस्तान तक में प्रशंसा हुई है. लेकिन न जाने क्यों भारत में कुछ लोग इलाहाबाद हाइकोर्ट के इस फैसले पर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं. क्या विरोध करेनवाले उन बरसाती मेंढकों की तरह है जो बारिश होने के साथ ही अपने होने का अहसास करा देना चाहते हैं? ...थके हारे भारत की बेशर्म मीडिया
ये हिन्दुस्तान की मीडिया का अब तक का सबसे शर्मनाक चेहरा है इस चेहरे में बाजारुपने से उपजी बेशर्मी साफ़ नजर आती है, ऐसी बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब मुम्बई पर आतंकी हमला हुआ था। ये बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब सुरक्षाबलों ने देश के गरीब राज्यों में नक्सली उन्मूलन के नाम पर अघोषित युद्ध शुरू कर दिया था, और अब जब राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने में महज चंद दिन शेष हैं, एक बार फिर सिर्फ आर्थिक लाभ और टीआरपी के लिए चैनलों की कुकुरदौड़ शुरू हो गयी है।...मायावती के राज में जेपी का गुण्डाराज
समरथी देवी के झोपड़े की छत पर लगा लाल झंडे का रंग अब फींका पड़ चुका है, वहीँ झोपड़े के भीतर एक चारपाई पर कराह रही समरथी के हथेली में लगा गीला आटा भी सूख कर कड़ा हो गया है। वो इनसे बमुश्किल अपने आंसू पोंछ पाती है। कुछ घंटे पहले ७० वर्ष की समरथी पर जेपी एसोसिएट के गुंडों ने खौलती हुई चाय फेंक दी थी, जिससे उसकी बांह और शरीर के अन्य हिस्से बुरी तरह से झुलस गये थे। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में स्थित डाला की मलिन बस्ती में रहने वाली समरथी का कसूर सिर्फ इतना था कि वो जेपी द्वारा दी जा रही तमाम धमकियों के बावजूद अपनी झोपड़ी को खाली करने से इनकार कर दिया था।...बेशर्म वामपंथ में नंगी होती औरतें
अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के साथ देश भर में हो अमानवीय उत्पीडन के क्रम में पश्चिम बंगाल में महिलाओं को नंगा घुमाए जाने की सिलसिलेवार घटनाएँ सामने आई है ,अभी पश्चिम बंगाल महिला आयोग ने वीरभूम जिले में हजारों पुरुषों के बीच में एक महिला को नंगा करके घुमाने और फिर उसकी वीडियो फिल्म बनाने की घटना की जांच शुरू ही की थी कि इसी जिले में दो और महिलाओं को नंगा करके घुमाये जाने का खौफनाक मामला सामने आया है। ...तस्करी का धंधा फिर से शबाब पर है, मगर कलम खामोश है!
उत्तर प्रदेश के इस पूर्वी इलाके में पत्रकार कमलेश की मौत महज एक हादसा नहीं बल्कि वो हकीकत है जिससे शायद ही कोई सुविधाभोगी पत्रकार रूबरू होना चाहेगा. कमलेश की मौत को सप्ताहभर बीत गया और जैसे जैसे उनके बारे में सच्चाई सामने आ रही है, सिर शर्म से झुकता जा रहा है. क्या समाज में हम संवेदनशील लोगों के साथ यही व्यवहार करते हैं? कमलेश की मौत से हम दुखी हो न हो वे तस्कर जरूर खुश हैं जिनका कारोबार कमलेश की कलम के कारण चौपट हो रहा था. ...Author info
