निरंजन परिहार
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।
अमीरों की सूची में मलबार हिल के ‘मंगलजी’
हिंदुस्तान के अमीरों की लिस्ट में मंगल प्रभात लोढ़ा 46वें नंबर पर हैं। फोर्ब्ज ने जो सूची जारी की है, उसमें मुकेश अंबानी नंबर वन हैं और स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल दूसरे नंबर पर। कायदे से 46वें नंबर के आदमी से से पहले बाकी के 45 नाम और आने चाहिए। लेकिन मंगल प्रभात लोढ़ा का नाम खबर में सबसे पहले लिखा गया है तो इसका सबसे बड़ा और एकमात्र कारण यही है कि वे अब भी अपने आप को एक बहुत ही साधारण और सामान्य आदमी ही मानते हैं। उसी तरह जीते हैं और रहते भी आम आदमी की तरह ही हैं। ...सहाय साहब के खिलाफ कमीनेपन की कुलबुलाहट
अंबिकानंद सहाय मौन हैं। सही और समझदार लोग अक्सर ऐसा करते हैं। वे किसी भी बकवास पर ध्यान नहीं देते। कदविहीन लोगों की जड़विहीन बातों को बिल्कुल अनदेखा कर देते हैं। चाणक्य ने कहा था, कि व्यक्ति जैसे – जैसे बड़ा होता है, उसके आस पास के बौने लोगों की घृणा भी उसे झेलनी पड़ती है। ओशो भी कहते थे – बड़ा व्यक्ति वही है, जो अपने आसपास के ओछे लोगों को, वे जो कर रहे हैं, करने दे, वरना उनको समझाने में वह अपने जीवन का अमूल्य समय खो देगा। और अपना भी मानना है कि गली में कुत्ते भले ही भोंक रहे हों, फिर भी गज को तो अपनी गति से ही चलते रहना चाहिए।...दिमागी दिवालिएपन का शिकार ठाकरे परिवार
मुंबई पर मलेरिया का प्रकोप है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी से लेकर स्थानीय नगर निगम तक मलेरिया के रोकथाम की कोशिशों में लगे हुए हैं. लेकिन इसी बीच ठाकरे परिवार के दो उत्तराधिकारियों ने अपने दिमागी दिवालियेपन का उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों ही कह रहे हैं कि मुंबई में मलेरिया के प्रकोप के लिए उत्तर भारत से आनेवाले लोग जिम्मेदार है. निरंजन परिहार की आपत्ति है कि......गुजरात के गौरव में कांग्रेस का कबाड़ा
गुजरात सरकार और नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश में कांग्रेस का कबाड़ा हो रहा है। सोहराबुद्दीन जैसे अपराधी की मौत को फर्जी मुठभेड़ साबित करने की कोशिश में जुटी कांग्रेस को पता नहीं यह आइडिया किसने दिया। लेकिन अब यह जरूर पता चल रहा है कि इस पूरे मामले में भावनात्मक स्तर पर कांग्रेस को नुकसान तय है। ...अब कहां गड़ेगा बूटा का खूंटा?
सरदार बूटासिंह के दिन पूरे हो गए हैं। कांग्रेस में उनकी जगह तलाशें तो, देश की राजनीति में कभी बहुत असरदार रहे इस सरदार के लिए अब कहीं कोई ठौर – ठिकाना नहीं दिखता। बूटासिंह की नियती यही लग रही है कि राजनीति से अब उनको दरकिनार होना ही पड़ेगा। लेकिन राजनीति की धाराओं के जानकार यह भी मानते हैं कि सियासत में हर उम्र में हर हाल में किसी नए ठौर और नए ठिकाने की संभावना तो रहती हा है। फिर बूटासिंह हार मानकर घर बैठने वालों में भी नहीं है। ऊपर से देश में कांग्रेस में उनके जितना बड़ा दलित नेता और कोई है कहां ? ...मंदिरों की कमाई पर कब्जे की फिराक में सरकार
महाराष्ट्र सरकार की नजर अब मंदिरों पर है। दो मंदिरों का संचालन करके मलाई काट रही सरकार अब प्रदेश के दो लाख मंदिरों पर नजरें गड़ाए हुए है। अशोक चव्हाण की सरकार ने प्रदेश के तकरीबन दो लाख से भी ज्यादा मंदिरों को अपने कब्जे में लेने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार का कहना है कि पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत जिन दो लाख मंदिरों का संचालन हो रहा है, उनके संचालन में गड़बड़ी की शिकायतें है।...माझा नांव महाराष्ट्र आहे!
मैं महाराष्ट्र हूं। पचास साल का हो गया हूं। मैंने सुना है कि पचास साल पूरे होने पर गोल्डन जुबली का मौका किसी की भी जिंदगी में बहुत बड़े मायने रखता है। भले ही वह इंसान हो या प्रदेश। हर एक के लिए गोल्डन जुवली खुशिय़ों का मौका होता है। लेकिन अपनी इस गोल्डन जुबली पर मैं खुशी मनाउं या दुखी होउं, यह समझ में नहीं आ रहा। एक तरफ मेरे पास कहने भर को विकास की कई कथाएं हैं, तो अपने दामन पर लगे दागों के दर्द का दरिया भी कोई कम गहरा नहीं है। जितना मेरा विकास हुआ, उससे भी ज्यादा विनाश भी हुआ। बहुत लोग मेरी गोल्डन जुबली मना रहे हैं, पर मैं क्या करूं ?...शाहरुख के साथ खड़ी रही सरकार, अकेली पड़ गयी शिवसेना
शाहरुख की फिल्म ‘माई नेम इज खान’ जोरदार ढंग से रिलीज हुई। गुरुवार की रात 12 बजे तक सिनेमाघरों के मालिक असमंजस में थे। लेकिन सुबह होते होते सबका डर गायब था। और फिल्म ढंग से रिलीज हुई। अड़ंगा डालने वालों के साथ पुलिस ने बहुत सख्त बर्ताव किया। जिसने भी खलल डाली उस पर डंडे पड़े। शिवसेना बेचारी अकेली पड़ गई। करीब 20 साल से भी ज्यादा सालों से उसकी हमसफर बीजेपी भी शिवसेना के साथ कहीं नहीं दिखाई दी।...बुढ़ापे में बाल ठाकरे का बहू से सामना
शिवसेना प्रमुख का बुढापा खराब हो रहा है। या यूं भी कहा जा सकता है कि वे खुद ही अपना बुढ़ापा खराब करवा रहे हैं। अकसर किसी भी वृद्ध के लिए किसी के भी मन में सम्मान ही होता है। और इस उमर की सबसे बड़ी जरूरत भी सम्मान ही हुआ करती है। हर बूढ़ा इंसान चाहता है कि कोई भी उसके विरोध में ना बोले। खासकर घर के लोग इतना तो खयाल करे, ताकि इस उमर में उसके मान सम्मान की रक्षा होती रहे। पर, बाल ठाकरे के साथ उल्टा हो रहा है।...Author info
