संजीव पाण्डेय
शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस
अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा को काफी कुछ देगा। भारत अमेरिकी बेरोजगारी को दूर करेगा। बेशक आतंकी हमलों से संबंधित भाषण में ओबामा ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, पर भारत ने अपनी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत सरकार और भारत के प्राइवेट कारपोरेट ने ओबामा को खुश कर दिया है। चीन से परेशान बराक ओबामा को भारत दौरे से राहत मिली है।
भारत के रुख से चीन बेचैन
इस समय चीन बैचेन है। बैचेनी का कारण भारत की विस्तारवादी विदेश नीति है। इस विदेश नीति के तहत भारत ने उन देशों से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी है, जो देश चीन से किसी न किसी मसले पर भीड़े है। चीन काफी बैचेने से भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल ही में हुई विदेश यात्रा और बराक ओबामा का नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली दक्षिण एशिया की यात्रा पर नजर रखे है। भारतीय प्रधानमंत्री की जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम यात्रा की आलोचना चीनी अखबार पीपुल्स डेली कर रहा है। जबकि ओबामा की यात्रा को भी चीनी अखबार विस्तारवादी यात्रा बता रहा है।...बादल के घर गरजा बादल
सताधारी अकाली दल की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अब बगावत घर में है। पहले बगावत घर से बाहर होती थी। प्रकाश सिंह बादल अपने राजनीतिक जीवन के सबसे गंभीर संकट को झेल रहे है। इस संकट से होने वाला नुकसान उन्हें पता है। उनके चेहरे पर इसके नुकसान की छाया दिख रही है। चेहरा उतरा हुआ है और आवाज में अब वो दमखम नहीं है।...सब्सिडी की राजनीति पर संकट के बादल
पंजाब के प्रभावशाली बादल परिवार में शुरू हुए राजनीतिक गृहयुद्ध ने कई चर्चाएं शुरू कर दी है। क्या क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की राजनीति जब परिवार के गृह युद्व में उलझ जाती है तो कुल की राजनीति करने वाला राजनीतिक दल जल्द ही समाप्त हो जाता है? क्या क्षेत्रीय राजनीतिक दल परिवार से ऊपर उठ कर राज्य के हित में नहीं सोच सकते? फिर सता में बने रहने के लिए क्या छोटे राजनीतिक दल लोकलुभावनी योजनाओं को बढ़ावा ही देते रहेंगे? पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत सिंह बादल को अकाली दल से निलंबित किए जाने के बाद अब देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की राजनीति को लेकर नयी बहस छिड़ चुकी है। चूंकि नई बहस इसलिए कि इस विवाद में एक गंभीर आर्थिक मसला है, जो अभी तक क्षेत्रीय दलों में हुए पारिवारिक युद्व से अलग है। वह गंभीर मसला है, राज्य की खराब होती आर्थिक स्थिति और सब्सिडी की राजनीति।...शिव सेना की राह पर अकाली दल
पंजाब में सारा कुछ ठीक चल रहा था। कुछ दिन पहले ही निचली अदालत से बादल परिवार को आय से अधिक संपति के मामले में राहत मिली थी। पर यह राहत ज्यादा देर नहीं चली। घर में विस्फोट हो गया है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत सिंह बादल ने यह विस्फोट किया है। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने ही राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना कर केंद्र सरकार की नीतियों की तारीफ कर दी है। यह तब किया है जब राज्य में खुद मनप्रीत सिंह बादल वित्त मंत्री है।...बात कर रहे हैं भारत-तालिबान
क्या तालिबान भारत का स्थायी दुश्मन है? क्या 2011 में अमेरिका के जाने के बाद तालिबान भारत से दुश्मनी बरकरार रखेगा या दोस्ती बहाल कर लेगा? क्योंकि जिन इस्लामिक जनजातियों के इकट्ठे समूह से तालिबान बना है वो इस्लाम की बात तो जरूर करते है, पर इस हद तक नहीं कि भारत जैसे मजबूत आर्थिक शक्ति को नजरअंदाज कर दे, जबकि दोनों मुल्कों के बीच सामाजिक, आर्थिक संबंध अलग-अलग धर्मों के होने के बावजूद सदियों से मजबूत रहे। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत और तालिबान की बातचीत शुरू हो चुकी है। ...सात रेसकोर्स पर दस जनपथ का दावा
दस जनपथ से अगर आप सात रेसकोर्स पहुंचना चाहें तो बमुश्किल सात मिनट का समय लगता है. लेकिन इन दिनों कांग्रेस के शीर्ष पर शुरू हुए सत्ता संघर्ष ने लुटियंस जोन के इन दो सड़कों की दूरिया बढ़ा दी हैं. पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के अंदर कुछ वही राजनीति शुरू हो गई है जिसे किनारे लगाने की राजनीति कह सकते हैं। अक्सर जो किनारे लगाने की कांग्रेस स्टाइल है, उसी स्टाइल में काम की शुरूआत हुई है।...कांग्रेस पर सत्ता संघर्ष भारी, अब राहुल गांधी की बारी
एक अजीब से घटना है। जिस दिन राहुल गांधी अपने आपको उड़ीसा में आदिवासियों के सिपाही घोषित करते है, उसके अगले दिन ही एक खबर छपती है। खबर अखबार के पहले पन्ने की लीड है, जिसमें कहा गया है कि भारत युवाओं का देश है, पर प्रधानमंत्री बुजुर्ग है। साथ ही दुनिया के कई देशों का उदाहरण दिया गया है, जिसमें युवा लोग प्रधानमंत्री के तौर पर विराजमान है। ये एक सामान्य घटना कहेंगे या एक संयोग या एक राजनीतिक खेल? जो युवराज अभी तक कारपोरेट है, वही एकाएक आदिवासियों के सिपाही हो जाते है।...25 साल पुराने समझौते पर सुलग रहा है पंजाब
इस समय पंजाब फिर गर्म हो गया है। गर्मी दो फ्रंट पर है। एक तरफ पूरे पंजाब में जहां भिंडरावाले के पोस्टर कई जगह सरेआम नजर आ रहे है, वहीं राजनीतिक फ्रंट पर राजीव-लोंगोवाल समझौते को लेकर विवाद शुरू हो गया है। विवाद ठीक 25 साल बाद शुरू हुआ है। विवाद शुरू करने का समय भी बड़ा वाजिब है। विवाद तब शुरू हुआ है जब शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव नजदीक है और ठीक डेढ़ साल बाद पंजाब विधानसभा का चुनाव होने है। एक बार फिर जख्म हरे करने की कोशिश हो रही है।...बाढ़ के बाद पाकिस्तान पर मंहगाई की मार
बाढ़ के कहर के बाद बढ़ी महंगाई ने पाकिस्तानी जनता की कमर तोड़ दी है। रमजान के महीनें में महंगाई ने पाकिस्तानी जनता को भारी परेशानी में डाल दिया है। बाढ़ के कारण सब्जियों की फसल तबाह हो गई है। आलू, टमाटर और मटर की कीमतें आसमान छू रही है। शहरों में टमाटर जहां १३० रुपये किलो बिक रहा है, वहीं आलू की कीमत भी चालीस से पचास रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। मजबूरी में पाकिस्तानी व्यापारियों ने अमृतसर से आलू, प्याज और टमाटर का आयात शुरू कर दिया है। उधर आम लोगों के पास अब इस बढ़ती महंगाई के कारण टमाटर और आलू खरीदने के लिए भी पैसे नहीं है।...Author info
