वीरेन्द् जैन
सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं है जन धन की लूट
पिछले कुछ समय से ऐसा कोई सप्ताह नहीं बीतता जब समाचार माध्यमों में किसी न किसी सरकारी अधिकारी, राजनेता, या ठेकेदार के यहाँ पड़े छापों में करोड़ों रुपयों का अवैध धन और किलो की तौल में सोना निकलने का समाचार नहीं आता। समाचार माध्यमों का आम पाठक, श्रोता या दर्शक इसे कौतूहल या ईर्षा के भाव से देखता है और निरीह सा अपनी व्यवस्था में आस्था घटाते हुये चुप बैठ जाता है। इन समाचारों से केवल अल्पकालीन सनसनी भर पैदा होती है, और फिर आरोपियों को मामला रफा दफा करने के लिए पर्याप्त समय देते हुये ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
ऐसी क्या मजबूरी है कि उमा भारती जरूरी है?
साध्वी के चोले में रहने वाली लोधी जाति की भूतपूर्व भाजपा नेत्री उमाश्री भारती के भाजपा में पुनर्प्रवेश की सम्भावनाओं पर पार्टी में आपस में तलवारें खिंच गयीं हैं। भाजपा में पद का सुख भोग रहा कोई नेता उमा को वपिस नहीं चाहता, वहीं पद से वंचित या अपने पद से असंतुष्ट नेता उमा के वापिसी का समर्थन करके अपने नेतृत्व को ब्लेकमेल करना चाह रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर अब उमा भारती की वापिसी क्यों जरूरी मानी जा रही है और क्या उमा भारती भी भाजपा नेतृत्व को ब्लेकमेल कर रही हैं? यदि ऐसा है तो वह कौन सी कमजोरी है जिस के आधार पर वे संघ परिवार पर दबाव बनाने में सफल हुयी हैं?...आजमगढ़ पर क्यों इतरा रहे हैं अमर सिंह?
खबर है कि राजनीति में राजनीतिज्ञों और धनपतियों के बीच फिल्मस्टारों के माध्यम से मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले अमर सिंह ने आज़मगढ में बड़ी रैली कर डाली है और उस रैली में पच्चीस हज़ार लोगों की भीड़ भी जुटा ली। यह रैली समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद व्यापारियों और फिल्म स्टारों के सहारे एक राजनैतिक भूमिका खरीदने के लिये किया गया उनका संयुक्त प्रयास था जिसकी सफालता भविष्य तय करेगा।...Author info
