Home | COMMENTARY

Sep

29

2014

0
Comments

यूएन में नमो

By

यूएन में नमो

मोदी ने विश्व समुदाय को गौरवपूर्वक यह भी बताया कि उन्होंने पाक कब्जे वाले कश्मीर में भी बाढ़ राहत अभियान चलानें का विनम्र प्रस्ताव मानवीयता के दृष्टिकोण से रखा था. यह विडंबना ही है और विश्व समुदाय की सहनशीलता की अति “कि पाक को संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर विषय उठानें की छूट अभी भी मिल रही है.” भारतीय जम्मू कश्मीर और पाक कब्जें वाले कश्मीर के विकास और नागरिक अधिकारों की तुलना करें तो पाक कब्जें वाले कश्मीर में स्थिति नारकीय दिखलाई पड़ती है. कश्मीर की बाढ़ से मूंह छुपाते और वहां के नागरिकों को पानी और उसके बाद महामारी में मरनें को मजबूर छोड़ने वाले नवाज शरीफ को संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का उल्लेख करनें से पहले शर्म आनी चाहिए थी. भारतीय गणराज्य वाले कश्मीर और पाक के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में बाढ़ राहत के अभियानों में अंतर देखें तो पता चलेगा कि इस भयानकतम प्राकृतिक आपदा में फंसे पाकी कश्मीर में पाक प्रशासन कितना अक्षम और असंवेदनशील सिद्ध हुआ है. यह भी देखना चाहिए कि जब कश्मीर की जनता बाढ़ और उसके बाद के बाढ़ जनित दुष्परिणामों को झेल रही है तब उसके कष्टों पर चिंतन के बजाय पाकिस्तानी नवाज शरीफ किसी भी अवसर पर शरारती और

Sep

28

2014

0
Comments

विश्व में योग का विनियोग

By

वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर श्रद्धांजलि देते प्रधानमंंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर श्रद्धांजलि देते प्रधानमंंत्री नरेन्द्र मोदी

साठ पैंसठ साल की कोशिशों के बाद भी अभी भारत दुनिया में न तो अपनी आर्थिक शक्ति के कारण पहचाना जाता है और न ही सामरिक शक्ति के कारण। पूरी दुनिया में भारत की सनातन आध्यात्मिक पहचान है और बीते सौ सवा सौ सालों में योग ने उसे नये सिरे से स्थापित किया है। जिस अमेरिका में खड़े होकर प्रधानमंत्री मोदी ने योग का अंतरारष्ट्रीय दिवस मनाने की अपील की है उस 'वैज्ञानिक' अमेरिका में सबसे पहले वेदान्त सिद्धांत स्वामी विवेकानंद ने प्रतिपादित किया था। उस वक्त भी दुनिया शांति की तलाश कर रही थी और स्वामी विवेकानंद ने शांति के लिए भारत की ओर देखने का सुझाव दिया था। जिस वसुधैव कुटुंबकम के वैदिक सिद्धांत को भारत अपना आधार मानता है उसे विश्व मंच पर पहली बार नरेन्द्र ने शिकागो में प्रतिपादित किया था। इसके बाद के सवा सौ साल केवल अमेरिका में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में योग क्रांति का काल रहा है। भारत की सन्यास परंपरा ने न सिर्फ अमेरिका को विश्वशांति के स्थाई उपाय योग का मार्ग दिखाया बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी योग मार्ग प्रशस्त किया गया।

भारतीय सन्यासियों ने अशांति के अतिक्रमण के बीच योग जो प्रतिक्रमण किया था उसका परिणाम

Sep

27

2014

0
Comments

जे(ल) जयललिता

By

जे(ल) जयललिता

जयललिता की आय से अधिक संपत्ति मामले की सुनवाई जिस विशेष अदालत में हो रही थी वह बंगलौर की सेन्ट्रल जेल में ही बनाई गयी थी, फिर भी अभी तक पता नहीं है कि जयललिता को बंगलौर सेन्ट्रल जेल में ही रखा जाएगा या फिर बाद में 70 लाख रूपये की लागत से महिलाओं के लिए विशेष तौर पर बनाई गई तुमकुर जेल भेज दिया जाया जाएगा। वे कहीं भी रहें लेकिन अपने प्रिय पोएस गार्डन से दूर हो गयी हैं। यह दूरी बहुत सामान्य नहीं होगी। सजायाफ्ता होने के बाद अब वे न तो तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रह जाएंगी और न ही दोषमुक्त होने तक कोई चुनाव लड़ पायेंगी। तब सवाल यह है कि तमिलनाडु में वे जिस राजनीतिक विरासत की उत्तराधिकारी थी उस राजनीति को कौन संभालेगा?

अगर बात किसी राष्ट्रीय पार्टी से जुड़ी होती तो संकट इतना बड़ा न होता। लेकिन जयललिता एक ऐसी क्षेत्रीय पार्टी का प्रतिनिधित्व करती हैं जिसका वर्तमान नेतृत्व तो होता है लेकिन ऐसे दलों में भविष्य का कोई नेतृत्व नजर नहीं आता। यह समस्या अकेले जयललिता की पार्टी के साथ हो ऐसा भी नहीं है, देशभर में जितने भी एक व्यक्ति एक पार्टी के सिद्धांत पर क्षेत्रीय पार्टियां काम कर रही हैं

Sep

25

2014

0
Comments

आमने सामने हुए भाजपा शिवसेना

By

आमने सामने हुए भाजपा शिवसेना

यही शिवसेना के लिए सबसे तगड़ा झटका है। अगर यह महायुति इस जोड़ तोड़ के बिना हफ्ते भर पहले खत्म हो गयी होती तो शायद शिवसेना को न तो यह झटका लगता और न ही इतना कड़वा अनुभव मिलता लेकिन सारी बातचीत और जोड़तोड़ की प्रक्रिया में शिवसेना की तरफ से नरमी के ही संकेत दिये गये। सीटों के बंटवारे के फार्मूले तैयार करने से लेकर बातचीत के दरवाजे खोलने तक। आखिरी सफल बातचीत के बाद शायद शिवसेना के रणनीतिकार इतने आश्वस्त हो गये थे कि गुरूवार की सुबह सामना के संपादकीय में पत्रकारों को सारा दोष देते हुए हालात को बेहतर भी बता दिया गया था। लेकिन सुबह की संपादकीय शाम तक भी कायम न रह पायी। बीजेपी के राज्य नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेस करके मुंबई में गठबंधन टूटने का ऐलान भी कर दिया और सारा दोष शिवसेना के माथे भी मढ़ दिया। निश्चित रूप से यह शिवसेना के लिए दूसरा बड़ा झटका रहा होगा कि जिस गठबंधन को बचाने के झुकते जा रहे थे आखिरकार उस गठबंधन के टूटने का आरोप भी उन्हीं पर लग गया।

शिवसेना की राजनीति में पहली बार झुकने का प्रयोग हुआ और उसका उन्हें बहुत गलत परिणाम मिला। आमतौर पर बाल

Sep

24

2014

0
Comments

मिसाल बना मंगल मिशन

By

मिसाल बना मंगल मिशन

लाल ग्रह यानी मंगल को समझने की कोशिश चंद्रमा पर नील आर्मस्ट्रांग के उतरने के साथ ही शुरू हो गया था। अबतक वहां अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ की ओर से उपग्रह पहुंचाने का काम हो चुका है। मंगल की कक्षा में उपग्रह पहुंचाने के 51 बार प्रयास किए गए। उनमें से महज 21 बार ही सफलता मिली। जबकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन) यानी इसरो के वैज्ञानिकों ने पहले ही प्रयास में इस कारनामे को पूरा कर दिया।  इस वक्त मंगलयान मंगल ग्रह को समझने और वहां संभावनाओं की तलाश में उसकी गुरूत्वीय अंडाकार कक्षा में चक्कर लगा रहा है और भारतीय वैज्ञानिक उससे निरंतर संदेश हासिल कर रहे हैं।

मंगल ग्रह की सतह पर पहले से मौजूद सबसे ज़्यादा चर्चित अमेरिकी रोवर यान ‘क्यूरियॉसिटी’ की लागत दो अरब अमेरिकी डॉलर से भी ज़्यादा रही थी। भारत की तकनीकी क्षमताओं तथा सस्ती कीमतों ने मंगलयान की लागत कम रखने में काफी मदद की। भारतीय मंगलयान दुनिया का सबसे सस्ता अंतर-ग्रही मिशन है। इसकी औसत लागत प्रति भारतीय चार रुपये से भी कम रही है, यानि सिर्फ 450 करोड़ रुपये, सो, अब भारत नया उदाहरण पेश करते हुए तेज़, सस्ते और सफल अंतर-ग्रही मिशनों की नींव

Sep

24

2014

0
Comments

रील में रीयल

By

रील में रीयल

टाइम्स ऑफ इंडिया और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के विवाद की बात करने से पहले जया बच्चन की बात करते हैं। पिछले दिनों हुए एक इवेंट में एक फोटो जर्नलिस्ट ने ऐश्वर्या राय से यह कह दिया कि ऐश्वर्या एक पोज दे दीजिए, इस पर जया बच्चन भड़क ही नहीं गईं, बल्कि यह तक कह दिया कि क्या ऐश्वर्या-ऐश्वर्या बुला रहे हो, तुम्हारी क्लास में पढ़ती थी क्या? इसी तरह एक बार ऐश्वर्या राय को ऐश बुलाने पर उनके पति अभिषेक बच्चन ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कह दिया था कि ऐश नहीं, ऐश्वर्या है नाम, जबकि ऐश्वर्य राय, उनके पति अभिषेक बच्चन और ससुर अमिताभ बच्चन साथ फिल्म कर चुके हैं और कजरारे-कजरारे जैसा सुपर हिट गाना देकर लाखों लोगों की सीटियाँ बटोर चुके हैं। उस गाने पर सीटियाँ बजते समय अच्छा लग रहा था, क्योंकि टीआरपी बढ़ रही थी, जिससे पैसा मिलता है और जब काम निकल गया, तब अचानक यह आशा करने लगे कि लोग अब वो सब ध्यान में भी न लायें।

इसी तरह पिछले साल अभिनेत्री कैट्रीना कैफ और अभिनेता रणबीर कपूर के कुछ निजी फोटो किसी तरह लीक हो गये थे, तब दीपिका पादुकोण ने कहा था कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते

Sep

23

2014

0
Comments

घाटे में रहेगी भाजपा

By

घाटे में रहेगी भाजपा

बात सीटों के बंटवारे से शुरू होते-होते अब संभावित मुख्यमंत्री पद के दावेदार तक पहुंच चुकी है। वैसे भी शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के निधन के बाद पहली बार महाराष्ट्र में होने जा रहे विधानसभा चुनाव कई मायनों में अनूठे साबित होने जा रहे हैं। महाराष्ट्र संभवत: देश का एकमात्र राज्य है, जहां सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों गठबंधन की बैसाखी पर हैं। कांग्रेस-राकांपा की वर्तमान सरकार राज्य में जबर्दस्त एंटी इन्कम्बैंसी का सामना कर रही है और इसी के चलते ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन राज्य की सत्ता में वापसी करने वाला है, पर जो अभी स्थिति दिखाई दे रही है, क्या वही अंतिम सत्य है? ऐसा लगता तो नहीं है।महाराष्ट्र के चारों बड़े दलों में गठबंधन को लेकर मतभेद उभर आए हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर कोई भी दल झुकने को तैयार नहीं है। शिवसेना और भाजपा का मामला तो संबंध विच्छेद तक जा पहुंचा है। ऐसा नहीं है कि दोनों के बीच सीटों को लेकर पूर्व में झगड़े और अलगाव की नौबत तक वे न पहुंचे हों, किंतु स्व. बाल ठाकरे और स्व. प्रमोद महाजन के संयुक्त प्रयासों ने राजनीतिक तलाक की इस प्रक्रिया को काफी हद तक रोके रखा था। अब दोनों ही

Sep

23

2014

0
Comments

'स्वर्ग ' छोड़ने की मजबूरी

By

'स्वर्ग ' छोड़ने की मजबूरी

क्योंकि यह सरकारी सुख-सुविधाएं बिल्कुल स्वर्ग सरीखी ही तो होती है। देश की राजधानी दिल्ली के हार्ट आफ द सिटी में शानदार बंगला। विरले ही इनका मोह छोड़ पाते हैं। मैं जिस शहर में रहता हूं, वहां एक  शहर में दो दुनिया बसती है। एक दुनिया में सब कुछ रेलवे का तो दूसरे में सब कुछ निजस्व। रेल क्षेत्र में बंगला से लेकर बिजली-बत्ती सब कुछ रेलवे की होती है। इनके बदले लिया जाना वाला नाममात्र का शुल्क लाभुक के वेतन से कुछ यूं कटता है कि संबंधित को इसका कुछ पता ही नहीं लग पाता। उनके वारिसों को भी कहीं जाना हुआ तो विशेषाधिकार रेलवे पास जेब में रखा और निकल पड़े। अव्वल तो पास कहते ही टीटीई आगे बढ़ जाते हैं , कभी दिखाने को कहा तो दिखा दिया। एेसी सुविधाओं के बीच पलने - बढ़ने वाली पीढ़ी को आगे चल कर जब  पता लगता है कि रेल यात्रा के टिकट के लिए कितनी  जिल्लत झेलनी पड़ती है या सिर छिपाने को आशियाने के लिए कितनी मुश्किलें पेश आती है तो यह कड़वा यर्थाथ उनके पांव तले से जमीन ही खिसका देता है। जमीनी सच्चाई से रु - ब- रू होने के क्रम में ज्यादातर मानसिक अवसाद की

Sep

16

2014

0
Comments

मेघ राहत में मलिक का मेघ मल्हार

By

मेघ राहत में मलिक का मेघ मल्हार

आपदाग्रस्त कश्मीर में बाढ़ एक ऐसी आपदा बनकर आयी है जब बीते साठ सालों की आपदाएं सिमटकर झेलम के पानी में बहने लगी। खुद सैयद अली शाह गिलानी और यासीन मलिक भी इस बाढ़ के प्रकोप से बच नहीं पाये थे और उसी सेना और एनडीआरएफ के लोगों ने इनकी जान बचायी जिसे अब वे वहां से जाने के लिए कह रहे हैं। तो क्या सचमुच सैयद अली शाह गिलानी सेना और सहायता का ही विरोध कर रहे हैं या फिर झेलम के पानी में बहती जा रही उस राजनीति को रोकने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें गिलानी या फिर मलिक का अस्तित्व ही बह जाने का खतरा पैदा हो गया है?

कश्मीर की जमीनी हालात पर नजर डालें तो हाल फिलहाल में दो घटनाएं ऐसी हुई हैं जिसने कश्मीर के अलगाववादियों को लंबे समय बाद सांस लेने का मौका दिया है। पहली बड़ी घटना थी अफजल गुरू को फांसी और दूसरी घटना है बीजेपी को दिल्ली की सत्ता और नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री बन जाना। अफजल गुरू की फांसी के बाद हालांकि भारत सरकार ने सख्ती से हालात को बिगड़ने से रोक लिया लेकिन जो हालात छह दशक से बिगड़े हों उसे दस बीस दिन के कर्फ्यू से

Sep

15

2014

0
Comments

मीडिया का मोदी गान

By

मीडिया का मोदी गान

जब जी न्यूज जैसे बड़े चैनल का मालिक हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार बनने की चाहत रखता है, तो कोई बेवकूफ ही होगा, जो यह समझेगा कि जी न्यूज जनता के साथ खड़ा होगा। वह तो मोदी सरकार की बुराई को भी बड़ी अच्छाई के रूप में दिखाने के लिए कटिबद्ध होगा। ऐसा वह कर भी रहा है। क्या यह विद्रूप नहीं है कि इंडिया टीवी के ‘आपकी अदालत’ के लिए बनाए गए सेट पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी है? यह हाल इलेक्टॉनिक मीडिया का ही नहीं है, प्रिंट मीडिया भी नरेंद्र मोदी को ‘महामानव’ मानकर चल रहा है। शिक्षक दिवस पर जब नरेंद्र मोदी ने बच्चों को संबोधित किया तो नवभारत टाइम्स ने हैडिंग लगाई, ‘चाचा मोदी’ ने बच्चों को किया संबोधित। दुनिया जानती है कि ‘चाचा’ का खिताब जवाहर लाल नेहरू को दिया गया है। अब ऐसा लगता है कि मीडिया नेहरू की जगह मोदी को ‘चाचा’ बनाना चाहता है।

इधर, मीडिया एक ओर मोदी के स्तुतिगान में लगा है, तो दूसरी ओर अमित शााह और आदित्यनाथ योगी उत्तर प्रदेश में ‘लव जेहाद’ का हौवा खड़ा करके सांप्रदायिकता की ऐसी फसल तैयार कर रहे हैं, जिसकी आग पूरे प्रदेश को झुलसा सकती है। यह तल्ख सच्चाई

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 next last total: 572 | displaying: 1 - 10

Bloggers

Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
Virender Singh Chauhan

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।
Balendu Sharma

Balendu Sharma

माईक्रोसाफ्ट के मोस्ट वैलुएबल प्रोफेशनल पुरस्कार से सम्मानित बालेन्दु दाधीच वेब पोर्टल प्रभासाक्षी के समूह संपादक है. तकनीकि के घोड़े पर हिन्दी की काठी बांधनेवाले बालेन्दु दाधीच केवल तकनीकि के जानकार ही नहीं बेहतरीन पत्रकार भी हैं.