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Dec

20

2014

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घर वापसी की बेबसी

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घर वापसी की बेबसी

सवाल यह है कि हिन्दुत्व की छवि तोड़कर विकास की जो छवि प्रधानमंत्री मोदी लगातार बना रहे हैं, उसमें धर्मांतरण सरीके सवाल पर जबाब देने का मतलब अपनी ही छवि पर मठ्ठा डालने जैसा हो जायेगा। लेकिन यह भी पहली बार है कि धर्मांतरण के सवाल पर मोदी सरकार को मुश्किल हो रही है तो इससे बैचेनी आरएसएस में भी है। माना यही जा रहा है कि जो काम खामोशी से हो सकता है उसे हंगामे के साथ करने का विचार धर्म जागरण मंच में आया ही क्यों। क्योंकि मोदी सरकार को लेकर संघ की संवेदनशीलता कहीं ज्यादा है। यानी वाजपेयी सरकार के दौर में एक वक्त संघ रुठा भी और वाजपेयी सरकार के खिलाफ खुलकर खड़ा भी हुआ। लेकिन मोदी सरकार को लेकर आरएसएस की उड़ान किस हद तक है इसका अंदाजा इससे भी लग सकता है कि सपनो के भारत को बनाने वाले नायक के तर्ज पर प्रधानमंत्री मोदी को सरसंघचालक मोहन भागवत लगातार देख रहे हैं और कह भी रहे हैं। हालांकि इन सबके बीच संघ परिवार के तमाम संगठनों को यह भी कहा गया है कि वह अपने मुद्दो पर नरम ना हों। यानी मजदूरों के हक के सवाल पर भारतीय मजदूर संघ लड़ता हुआ दिखेगा

Dec

20

2014

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अच्छे और बुरे तालिबान के बीच फंसा पाकिस्तान

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अच्छे और बुरे तालिबान के बीच फंसा पाकिस्तान

वैसे तो अब पाकिस्तान में इतने ज़्यादा इस्लामी आतंकवादी गिरोह बने हुये हैं कि इस बात से कोई अन्तर नहीं पड़ता कि इन बच्चों को किस गिरोह ने मारा है। लेकिन रिकार्ड के लिये तहरीक-ए-तालिबान ने इस स्कूल पर हमला करके यह अमानवीय पैशाचिक नृत्य किया है। पाकिस्तानी सेना के एक प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि आतंकवादियों की रणनीति से लगता है कि वे स्कूल में छात्रों को बन्धक बना कर, सरकार से अपनी कुछ माँगे मनवाने की नीयत से नहीं आये थे। उनकी रणनीति में स्कूल के छात्रों को सीधे सीधे मार कर आतंक व्याप्त करना ही था। इस आतंकवादी हमले से आहत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने हस्बेमामूल कहा ही है कि पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई जारी रखेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस पैशाचिक हमले पर पाकिस्तान के साथ सम्वेदना प्रकट की है और हर सम्भव सहायता देने की पेशकश भी की है। भारत के अनेक स्कूलों में छात्रों ने पेशावर में मारे गये छात्रों की याद में मौन रखा। दुनिया भर के देशों ने इस हमले की निन्दा की है। उसमें अमेरिका भी शामिल है। इस कृत्य की निन्दा की भी जानी चाहिये।

पाकिस्तान में इतने आतंकी समूह हैं कि वहाँ

Dec

16

2014

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बर्बाद होती बभनौटी

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बर्बाद होती बभनौटी

जाति व्यवस्था कालबाह्य है, इसका आज कोई मतलब नहीं है। यह बात सही है लेकिन जब कभी यह व्यवस्था थी तो इसमें एक बात की पक्की गारंटी थी कि यह अपने दायरे में रोजगार के साधनों की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी थी। हमें कभी भी यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि भारत में लंबे वक्त तक, हज़ारों साल तक अराजकता का दौर रहा। घरेलू और विदेशी स्तर पर देश लगातार अशांत रहा। रियासतों और राज्यों पर आक्रमण दर आक्रमण होते रहे। उस मुश्किल दौर में जीवन की सलामती, इज्जत की सलामती, घर-परिवार की सलामती और रोजी-रोटी की सलामती की पुख्ता गारंटी दे पाने में भारतीय राज्य, शासन, राजे-रजवाड़ों का हुक्काम, चाहे वो जैसा भी जिस रुप में था, वो नाकाम हो चुका था। तब उस भयानक दौर में जाति से जुड़ी व्यवस्था ने किसी हद तक रोजगार गारंटी और सामाजिक सुरक्षा का दायरा विकसित कर लिया था। छोटे-छोटे समूहों में समाज बंटता चला गया क्योंकि सुरक्षा और सबका पेट भरने का इंतजाम बड़े दायरे की तुलना में हमेशा ही छोटे दायरे में आसान और बेहतर होता है, जबकि हमेशा हमले का खतरा बना रहता था, तो छोटे समूह गांव छोड़कर भागने की पूरी तैयारी भी रखते थे। जान है

Dec

16

2014

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धर्मांतरण विरोधी कठोर कानून की जरूरत

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धर्मांतरण विरोधी कठोर कानून की जरूरत

इन तथाकथित शकुनियों राजनीतिज्ञों नें जिन विधर्मियों को अपना भांजा बना कर पाला पोसा है वो तो दुर्योधन-दू:शासन से भी अधिक कलंकित और कलुषित सोच वाले लोग हैं, वे समय आनें पर आइसिस और ओवैसीयों के चक्कर में इन शकुनी मामाओं को भी पानी में घोल के पी जायेंगे.

रही बात आगरा की घटना की या हिन्दू प्रेरित धर्मांतरण की तो ये बात स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि हिन्दू समाज या सनातनी धर्म में धर्मांतरण जैसा कभी कोई शब्द या परम्परा अस्तित्व में नहीं रही. वहीं ईसाई और मुसलमान समाज में धर्मांतरण कराना एक धार्मिक कृत्य के रूप में गिना जाता है. केवल हिंदुत्व धर्मांतरण का समर्थन नहीं करता और केवल इस धर्म में धर्मांतरण के लिये कोई रस्म मौजूद नहीं है यह अकाट्य और

यात्मक बात है. यह स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है कि कोई व्यक्ति हिंदू कब बनता है क्योंकि हिंदुत्व ने कभी भी दूसरे धर्मों को अपने प्रतिद्वंद्वियों के रूप में नहीं देखा. वस्तुतः ‘हिंदू होने के लिये व्यक्ति को हिंदू के रूप में जन्म लेना पड़ता है’ और ‘यदि कोई व्यक्ति हिंदू के रूप में जन्मा है, तो वह सदा के लिये हिंदू ही रहता है.’

उपजी हुई नई परिस्थितियों के खतरे में कुछ दशको

Dec

15

2014

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टाइम्स ऑफ इंडिया का क्रिसमस

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टाइम्स आफ इंडिया में प्रकाशित खबर टाइम्स आफ इंडिया में प्रकाशित खबर

इस खबर में यह लिखा गया कि सरकार ने आदेश जारी किया है और सीबीएसई ने अपने स्कूलों को इसकी जानकारी नहीं भेजी है. लेकिन नवोदय विद्य़ालय में इस आदेश को जारी कर दिया गया है. जिसमें 24 और 25 दिसंबर के दिन स्कूलों में निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन होगा. टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा कि नवोदय विद्यालयों के लिए क्रिसमस की छुट्टी खत्म कर दी गई है और बाकी दूसरे सीबीएसई द्वारा संचालित स्कूलों को लेकर कन्फ्यूजन है. इसके बाद इस अखबार ने बिना नाम के “सूत्रो”, “एक वरिष्ठ अधिकारी”, “प्रध्यापक” “कुछ प्रिंसिपल” जैसे अज्ञात लोगों के हवाले से पूरी कहानी लिख डाली. लेकिन खबर के आते ही शिक्षा मंत्री ने इस खबर को झूठा और शरारतपूर्ण करार देते हुए इसका खंडन कर दिया.

अब जरा इस खबर की खबर लेते हैं. पहली बात यह कि नवोदय विद्यालय रेसिडेंसिल स्कूल है. यानि छात्र स्कूल-परिसर के छात्रावास में ही रहते हैं. इसमें छुट्टी होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है. यहां छुट्टी का मतलब बस इतना ही होता है कि उस दिन सवेरे की पीटी और क्लास नहीं होती है. बाकि कार्यक्रम सुचारू रूप से चलते हैं. अगर इस दिन स्कूल में निबंध लेखन प्रतियोगिता

Dec

14

2014

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संयुक्त राष्ट्र का 121वां दिवस

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संयुक्त राष्ट्र का 121वां दिवस

योग को पहचान की ज़रूरत नहीं है न ही इसका प्रसार विज्ञापन से हुआ है फिर भी इस सुखद उपबल्धि पर भारत सहित दुनिया भर में करोड़ों लोग खुश हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी खुशी सार्वजनिक रूप से ज़ाहिर की। उनका कहना है कि योग में पूरे मानव समाज को एक साथ लाने की क्षमता है। यह ज्ञान, कर्म और भक्ति का बेहद सुंदर संगम है।

योग भारत का पुराना ब्रांड अंबेसडर है। आज से नहीं, दशकों से। इसके पीछे उन तमाम छोटे-बड़े योग गुरुओं का योगदान रहा है जिन्होंने अपनी लगन और साधना के दम पर इसे प्रचारित किया और इसके ज़रिये लाखों लोगों को स्वास्थ्य लाभ कराया। योग के भीतर की दुनिया भी काफी बदली है। ऐसा नहीं है कि साधना का पक्ष कमज़ोर हो गया है लेकिन योग अंग्रेजी का योगा बनकर एक पैकेजिंग में भी बदल चुका है। योग गुरु के नाम पर कई लोग राजनीतिक लाभ भी लेने लगे हैं। फिर भी योग ज्ञान भी हैं और आज की ज़िंदगी के हिसाब से त्वरित समाधान भी
कोई देश नहीं होगा जहां किसी योग गुरु द्वारा स्थापित योग केंद्र न हो। सोशल मीडिया पर कई लोग इस मौके पर उन लोगों को उलाहना

Dec

13

2014

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अटल को मिले भारत रत्न का सम्मान

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अटल को मिले भारत रत्न का सम्मान

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर आम कार्यकर्ता तक की भावना अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न प्राप्त करते देखने की है वहीं बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी सरकार की इस मंशा पर अपनी स्वीकृति की मुहर लगा दी है| हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न की मांग पर कुछ दलों में मंथन चल रहा है कि इस विषय पर भाजपा का साथ दिया जाए या नहीं| दरअसल महान विभूतियों को भारत रत्न से सम्मानित करने के पीछे राजनीतिक दलों ने अपने हितों को जमकर भुनाया है।

आपको याद होगा, पिछले वर्ष नवंबर २०१३ में क्रिकेट की महान हस्ती सचिन तेंदुलकर को कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने भारत रत्न देने का एलान किया था। तेंदुलकर पहले ऐसे खिलाड़ी बने जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया| इससे पूर्व खिलाड़ियों को भारत रत्न देने की प्रथा नहीं थी। इस परिपाटी ने उस वक़्त विवाद का रूप ले लिया था। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग करने वाले संगठनों ने कांग्रेस सरकार के इस पैंतरे को युवाओं को लुभाने का जरिया माना था। इससे इतर समाज के कई तबकों से उनके अनमोल रत्नों को भारत रत्न की मांग ने ज़ोर पकड़ लिया था।

यह कहने

Dec

13

2014

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ताजमहल या तेजोमहालय?

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ताजमहल या तेजोमहालय?

याद रखने वाली बात यह है कि इस मुद्दे को सेकुलर नेता आजम खां ने सबसे पहले उठाया और ताजमहल को वक्फ बोर्ड को देने की पैरवी की. इसके बाद कई मुस्लिम संगठनों ने उनका समर्थन किया था. लेकिन धीरे धीरे ये मामला हिंदू बनाम मुस्लिम हो गया. सवाल यह बना दिया गया कि क्या ताजमहल शिव मंदिर था... अब ये क्या था वो टीवी स्टूडियो में बैठे फर्जी विश्लेषक तो नहीं करेंगे. अगर विवाद इतिहास को लेकर है तो फैसला शोध से ही हो सकता है.

ताजमहल और तेजोमहालय का विवाद सबसे पहले पी एन ओक के द्वारा लिखी किताब से शुरू हुआ. पी एन ओक ने आजाद हिंद फौज में अपनी सेवाएं दी थी. वो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निजी सहायक थे. साथ ही वो आजाद हिंद रेडियो के कमेंटेटर भी रहे. आजादी के बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स और स्टेटमैन अखबारों में भी काम किया. उन्होंने 1964 में इंस्टीट्यूट ऑफ रिराइटिंग इंडियन हिस्ट्री नाम की संस्था की शुरुआत की. लेकिन गलती यह कर दी कि उन्होंने वामपंथी इतिहासकारों के इतिहास पर ही सवाल उठाना शुरु कर दिया. उनका मानना था कि वामपंथी इतिहासकारों ने भारत के किसी भी पुरातन चिन्ह के साथ न्याय नहीं किया और

Dec

12

2014

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कमोव के साथ यह कैसा समझौता?

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कमोव का केए-226टी मॉडल जिसका उत्पादन भारत में किया जाएगा। कमोव का केए-226टी मॉडल जिसका उत्पादन भारत में किया जाएगा।

भारत ने जिस कमोव कंपनी के साथ चार सौ हेलिकॉप्टर बनाने का समझौता किया है न वह कमोव कंपनी भारत के लिए नयी है और न ही उसके बनाये हेलिकॉप्टर। अस्सी के दशक से भारतीय नेवी कमोव के हेलिकॉप्टर इस्तेमाल कर रही है और एक दशक पहले कमोव-31 के एक नया बेड़ा भी भारतीय नेवी में शामिल हो चुका है। लेकिन अब तक नेवी के लिए होनेवाले समझौतों से अलग पहली बार कमोव के साथ जो समझौता हुआ है वह नेवी के साथ साथ थलसेना के इस्तेमाल के लिए हेलिकॉप्टर बनाने का भी है।

समझौते के तहत भारत अपने देश में 400 कमोव हेलिकॉप्टर निर्मित करेगा। रूस की कमोव कंपनी का यह एक सैन्य यूटिलिटी हेलिकॉप्टर है जिसके केबिन को जरूरत के हिसाब सैन्य परिवहन, एंबुलेन्स, वाहन परिवहन इत्यादि के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी एक खासियत और है कि यह डबल रोटर कॉप्टर है। यानी भारी परिवहन जरूरतों और दुर्गम जगहों पर यह ज्यादा कुशलता से काम कर सकता है।

लेकिन इस दोहरी खूबी के बाद भी रूस की कमोव कंपनी के इस हेलिकॉप्टर का दुनिया में दूसरा कोई खरीदार नहीं है। कमोव के नेवल हेलिकॉप्टर रुस चीन और भारत में भी उड़ रहे हैं तो

Dec

11

2014

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धर्मांतरण के खिलाफ खड़ी क्यों नहीं हुई संसद?

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धर्मांतरण के खिलाफ खड़ी क्यों नहीं हुई संसद?

दोपहर एक बजे संसद भोजनावकाश पर चली गई और लौटी तो नये सिरे से बहस शुरू हुई। इस बार बहुत सीमित समय के लिए मोहम्मद बशीर भी शामिल हुए लेकिन उनकी जुबान में वह धार न बची थी जो नोटिस देते समय रही होगी। कारण? सरकार के संसदीय मंत्री वैंकेया नायडू ने एक कदम आगे जाते हुए कह दिया था कि सरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है और अगर सांसदों में आमराय बनती है तो केन्द्र और राज्य सरकार अलग अलग कानून भी बना सकते हैं।

भोजनावकाश के बाद बहस शुरू हुई तो जैसे जैसे चर्चा आगे बढ़ी विपक्ष बैकफुट पर आता चला गया। चाहे वह कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया हों या फिर समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव। सीपीएम के सलीम हों कि एमआईएम असद्दुद्दीन ओवैसी। समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने तो बहस कराने की मंशा पर ही सवाल उठा दिया। सुबह बहस की नोटिस देनेवाले मुलायम सिंह यादव ने बहस के औचित्य पर ही सवाल उठाते हुए कह दिया कि मेरी तो समझ में नहीं आ रहा है कि संसद किस मुद्दे पर बहस कर रही है? उन्होंंने कहा कि अखबार पढ़कर संसद नहीं चलायी जा सकती। मुलायम सिंह की तरह कांग्रेस

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. इस वक्त पी7न्यूज में कार्यरत। बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjeet Tripathi

Sanjeet Tripathi

रायपुर के रहनेवाले संजीत त्रिपाठी वैसे तो प्रिंट मीडिया के लिए ही काम करते हैं लेकिन प्रिंट से ज्यादा आनलाइन मीडिया में सक्रियता. ब्लाग लिखने से लेकर फेसबुक सक्रियता तक संजीत सब जगह नजर आते हैं. आवारा बंजारा नाम से ब्लाग लेखन करनेवाले संजीत फिलहाल रायपुर में एक अखबार के साथ काम कर रहे हैं.
Anushikha Tripathi

Anushikha Tripathi

भोपाल में ही पढ़ाई लिखाई और अब भोपाल में ही रहकर पत्रकारिता. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से 2011 में पत्रकारिता की डिग्री.
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वहां तक काम करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Sanjay Swadesh

Sanjay Swadesh

किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं।
Naresh Sirohi

Naresh Sirohi

महैन्द्र सिंह टिकैत की टीम में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करनेवाले नरेश सिरोही अभी भी मूल रूप से किसान आंदोलन से ही जुड़े हुए हैं। स्वदेशी आंदोलन में सक्रियता। संप्रति भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
Virender Singh Chauhan

Virender Singh Chauhan

वीरेंद्र सिंह चौहान एक दशक से अधिक समय तक हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े रहे. दैनिक दिव्य हिमाचल में बतौर उप संपादक और बाद में अमर उजाला और दैनिक ट्रिब्यून में स्टाफ रिपोर्टर के नाते कार्य किया. इस दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष. सितम्बर 2007 से पत्रकारिता के शिक्षण में. सम्प्रति चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष.
S N Singh

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शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

सतीश सिंह वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में एक अधिकारी के रूप में पटना में कार्यरत हैं और विगत तीन वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान से सत्र 1994-95 में (हिन्दी पत्रकारिता में) स्नात्कोतर डिप्लोमा करने के बाद 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह ने 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
SANDEEP SINGH

SANDEEP SINGH

सजग युवा पत्रकार व गांधीनगर में रहकर गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत, सिनेमा व रंगमंच को लेकर विशेष हस्तक्षेप, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खास नजर, विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं व वेब पोर्टलों के लिये स्वतंत्र लेखन.
Pranay vikram  Singh

Pranay vikram Singh

श्रमजीवी पत्रकार प्रणव विक्रम सिंह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर पिछले कई सालों से लेखन कर रहे हैं.
Dhananjay Singh

Dhananjay Singh

सिमटते सिमटते कुल परिचय इतना ही शेष रह गया है कि फिलहाल घुमक्कड़ी, सधुक्कड़ी और हाथ में कलम की लकड़ी। गाजीपुर से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय होते हुए देहरादून तक पहुंचे हैं। काम काज बहुत किया अब लिखकर अकाज करते हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Puja Shukla

Puja Shukla

पेश से टीवी पत्रकार पूजा शुक्ला धाकड़ लिक्खाड़ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारी और टीवी पत्रकारिता के साथ साथ कलम को तलवार की तरह इस्तेमाल करती हैं. दिल्ली युनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी पूजा दिल्ली में ही रहती है.
Rajesh Shukla

Rajesh Shukla

राजेश शुक्ला तो बस राजेश शुक्ला है. कला की समीक्षा के अलावा समाज और राजनीति की भी कलात्मक समीक्षा करने में महारत. मीडिया की मजूरी और कलम की गुलामी के अलावा दुनिया में फक्कड़ी ही पसंद आती है.
Abhishek Shrivastav

Abhishek Shrivastav

अभिषेक श्रीवास्तव के परिचय वाला पन्ना आमतौर पर खाली ही रहता है। खुद अपना कुछ पता नहीं। कोई परिचय नहीं। लेकिन हाथ में कलम और एक अदद कैमरा पकड़ लें तो बहुत सारी छुपी अक्सों को परिचय दे देते हैं। संघर्ष जिन्दगी का संघर्ष नहीं, बल्कि जीने का फलसफा है। स्वतंत्र पत्रकार तो हैं ही।
Arvind Shesh

Arvind Shesh

नास्तिकता और नौकरी दोनों साथ साथ। घोषित तौर पर। बिना किसी हिचक के। परिचय के नाम पर सिर्फ इतना कि जनसत्ता में नौकरी। लेकिन काम के नाम पर बहुत कुछ। खासकर लेखन के क्षेत्र में। मुद्दों को कविता और कहानी की शक्ल तो दे ही देते हैं, कभी कभी कविता और कहानी को भी मुद्दा बना देते हैं। दिल्ली में डेरा, बाकी सब तरफ कलम का घेरा।
Balendu Sharma

Balendu Sharma

माईक्रोसाफ्ट के मोस्ट वैलुएबल प्रोफेशनल पुरस्कार से सम्मानित बालेन्दु दाधीच वेब पोर्टल प्रभासाक्षी के समूह संपादक है. तकनीकि के घोड़े पर हिन्दी की काठी बांधनेवाले बालेन्दु दाधीच केवल तकनीकि के जानकार ही नहीं बेहतरीन पत्रकार भी हैं.