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चलो रामदेव योगा कर आएं

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शिवराज सिंह चौहान के साथ बाबा रामदेव शिवराज सिंह चौहान के साथ बाबा रामदेव
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बाबा रामदेव, देश के जाने माने योग गुरू और आयुर्वेदिक दवाओं के सबसे बड़े उभरते व्यापारी पर सवाल तो तब भी उठते थे जब वे पतंजलि योगपीठ की स्थापना करके अपने फैलाव कर रहे थे. लेकिन उस दिन से उनकी विश्वसनीयता ही संदेह के घेरे में आ गयी जिस दिन से उनके सफेद बाल दिखने शुरू हो गये. पूरे मानवीय समाज को नाखून रगड़कर योग की शिक्षा देनेवाले योगा गुरू के काले बाल सफेद क्यों होने लगे? बात बहुत छोटी है लेकिन खुलासा बहुत बड़ा है. क्या बाबा रामदेव जो योगा सिखा रहे हैं वह लोगों की बजाय उनके अपने ही "मोक्ष" का रास्ता खोल रहा है? सरिता अरगरे के सवाल-

योग गुरु नहीं पीटी मास्टर

रामदेव नाम का ढ़ोंगी बाबा देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं से खेल रहा है । अपना हित साधने वाले नेताओं ने उसे आधुनिक युग का विवेकानंद बताकर भारतीय मनीषियों और महापुरुषों का भी अपमान किया है । विवेक शून्य समाज को नये सिरे से यह समझाने की ज़रुरत है कि ढ़ोलक की थाप पर मंच पर उछल कूद योग नहीं होता । रामदेव के योग के दावों की पोल खुद बाबा की दाढ़ी के सफ़ेद बाल खोल रहे हैं । योगी के तौर पर इमेज बिल्डिंग के दौरान यह बाबा हर शिविर में नाखून रगड़ने की पैरवी करता था और इसका दावा था कि इस क्रिया से गंजे के सिर पर बाल आ जाते हैं । इतना ही नहीं साठ साल के बुढ्ढे की सूखे भूसे सी दाढ़ी भी साल-छह महीने में स्याह काली हो जाती है । अगर यह सच है तो बाबा की दाढ़ी बढ़ती उम्र की चुगली क्यों कर रही है ।

दुनिया भर के दिल के मरीज़ों का इलाज अपने योग से करने का दावा ठोकने वाले बाबाजी के सबसे करीबी की मौत दिल का दौरा पड़ने से हो गई और एक दिन पहले तक साथ घूमने वाला योगाचार्य अपने साथी के दिल के हाल को भाँप भी नहीं सका ? दर असल यह बाबा देश की भोली भाली जनता को बरगला कर अपना उल्लू सीधा कर रहा है । आखिर एक योगी को ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा की क्या ज़रुरत ? योग तो लोगों का भय दूर करता है । जो व्यक्ति इतना डरा हुआ हो वो दुनिया का डर कैसे दूर कर सकता है ? सही मायनों में यह एक ढ़ोंगी बाबा है । आसाराम बापू का ही परिष्कृत रुप है रामदेव बाबा ।

काले धन पर काली छाया

काले धन और भ्रष्टाचार से भारत को आज़ादी दिलाने की बात करता है लेकिन क्या वह इस बात को कहने का नैतिक बल रखता है ? इसने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री की बाँह मरोड़कर बेशकीमती ज़मीन मुफ़्त में आवंटित कराई है । अपना कारोबार जमाने के लिये सरकारी ज़मीन हड़पना क्या भ्रष्टाचार नहीं है । मप्र सरकार भी जवाब दे कि किस हैसियत से जनता की संपत्ति एक दवा कारोबारी को सौंपी गई है ? लोगों को याद रखना चाहिये कि साधुता एक प्रवृत्ति है और हर गेरुए कपड़े पहनने वाला साधु नहीं होता । रावण ने भी सीता हरण के लिये गेरुआ चोला ही धारण किया था । इस लुटेरे साधु की असलियत उजागर होना बेहद ज़रुरी है । वैसे अभी तक तो यह भी तय नहीं हो सका है की रामदेव साधु है या बाबा है या संत है या फ़िर स्वामी । अभी वो यह भी ठीक से तय नहीं कर पाये हैं कि उन्हें योगी बनना है या भोगी ? कभी कभी तो लगता है कि अचानक हाथ आयी माया ने उन्हें रोगी भी बना दिया है । आने वाला वक्त बतायेगा कि कारुँ के खज़ाने को हासिल करने वाले बाबाजी दिल के रोगी होंगे या मनोरोगी।

यह भी खूब है कि भ्रष्ट तंत्र की मदद से भ्रष्ट आचरण के नये-नये कीर्तिमान बनाने वाला ही भ्रष्टाचार के समूल नाश का दावा कर रहा है । "बाबाजी" शायद भूल गये कि महज़ पंद्रह सालों में कमाई अकूत दौलत इसी भ्रष्ट तंत्र की बदौलत ही है । वरना जिस देश में लोगों को खाने के भी लाले हों, वहाँ क्या कोई ईमानदारी की कमाई से तीन और पाँच हज़ार रुपये का टिकट लेकर योग के नाम पर उछल कूद करते बाबा को देखने का साहस जुटा सकता है । "बाबाजी" जान लीजिये कि इस देश में भ्रष्टाचार से ही काला धन है और काला धन है तभी आपका रात दिन फ़लता फ़ूलता योग का कारोबार है । बेहतर तो यही होगा कि आप कारोबारी ही बने रहें । और यदि वास्तव में भ्रष्टाचार मिटाने की चाहत है तो इस महाठगिनी माया से पीछा छुड़ाकर आगे बढ़िये । वरना जब योग का मुलम्मा उतरेगा तो फ़िर जनता आपको इस लूट खसोट से जोड़ी गई दौलत को भोगने का समय भी नहीं देगी ।

बाबा रामदेव सफल हैं, योग अज्ञानी भारतीय समाज को उल्टा सीधा कुछ भी सिखाकर मशहूर जरूर हो गये हैं लेकिन असल में उनके अपने मन में इतनी कालिख जमी है जिसे साफ करने के लिए उन्हें योग का अभ्यास करना जरूरी है. निश्चित रूप से योग और दवाइयों का साम्राज्य को फैलाते हुए पीटी टीचर यह भूल गया कि असल में वह जो सिखा रहा है न तो वह योग है और धर्म उसकी समझ से बाहर का विषय है. रामदेव एक व्यापारिक समुदाय के मुखौटे हैं जो कि अपना हित सुरक्षित रखने के लिए अब राजनीति के मैदान में कूद पड़े हैं. भारत की भोली भाली और साफ मन की जनता को मूर्ख बनाकर धंधा करते बाबा रामदेव को प्रायश्चित स्वरूप लंबी साधना की जरूरत है ताकि उनके मन का मैल साफ हो और वे सन्यासी के अनुकूल आचरण कर सकें.

भोपाल में भ्रष्टाचार

काले धन और भ्रष्टाचार का राग अलापने वाले बाबा रामदेव के पतंजलि योग संस्थान पर भी उंगलियाँ उठती रही हैं । हाल ही में मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में पतंजलि योग संस्थान द्वारा दवा बिक्री में कर चोरी का मामला गूँजा। कांग्रेस के वरिष्ठ  विधायक डॉ. गोविंदसिंह ने आरोप लगाया कि बाबा रामदेव और उनके रिश्तेदारों द्वारा चलाए जा रहे पतंजलि पीठ द्वारा दवाई बिक्री में सेल टैक्स की चोरी की जा रही है। डॉ. सिंह ने आय-व्ययक पर सामान्य चर्चा के दौरान टैक्स चोरी करने वाले ऎसे संस्थानों को सस्ती जमीन दिए जाने को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने राजनीतिक और गैर राजनीतिक संस्थाओं के साथ ही पतंजलि पीठ को रियायती जमीन देने पर भी सवाल उठाया। हालांकि नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने आरोपों पर आपत्ति की और बाबा रामदेव को साधु-संत बताकर मामले को आया-गया करने की कोशिश की। इस पर गोविंद सिंह ने कहा कि वे संत नहीं है, राजनीति में आ रहे हैं और जल्द चुनाव भी लड़ेंगे। उन्होंने "बाबाजी" की सम्पत्ति की जाँच करने की माँग तक कर डाली ।

हाल ही में भोपाल में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के करीब भौंरी में पतंजलि योगपीठ को राज्य सरकार ने रियायती दर पर ज़मीन दी गई है । गौरतलब है कि आवंटित ज़मीन के आसपास कई राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान जैसे स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, पुलिस अकादमी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन डिज़ाइनिंग के अलावा फ़ोरेंसिक लैब सहित कई पॉश रिहाइशी कॉलोनियाँ भी विकसित हो रही हैं । डेवलपर यहाँ छह सौ से हज़ार रुपये स्क्वेयर फ़ुट से प्लॉट बेच रहे हैं,जबकि"योग व्यवसायी" बाबा रामदेव को कौड़ियों के दाम कई एकड़ ज़मीन सरकार ने मुहैया कराई है।

भाजपा के बिछड़े हुए भाई
प्रदेश की बीजेपी सरकार का बाबा रामदेव प्रेम कोई नया नहीं है । वर्ष 2007 में योग शिविर के सिलसिले में जबलपुर गये रामदेव को नर्मदा तीरे की आबोहवा कुछ ऎसी रस आई कि उन्होंने वहाँ हर्बल पार्क बनाने का इरदा कर लिया । बाबाजी सेवा में करबध्द मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तुरत-फ़ुरत ही जबलपुर में पतंजलि योगपीठ को तीन सौ हेक्टेयर ज़मीन देने की कवायद शुरु कर दी । बाद में विपक्ष ने मामले को विधानसभा में उठाया और इस मुद्दे पर जमकर हँगामा किया। तत्कालीन राजस्व मंत्री कमल पटेल ने सदन को बताया था कि पतंजलि ट्रस्ट ने सारदा, हरगढ़, दारौलीखुर्द और घुघरा में 655 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन की माँग की थी । साथ ही लम्हेटाघाट में नर्मदा के किनारे  48.88 हैक्टेयर ज़मीन चाही थी । सरकारी रिकॉर्ड में जाँच पड़ताल के बाद ग्रामीण इलाकों में करीब 262.48  हैक्टेयर और लम्हेटाघाट में 45.43 हैक्टेयर ज़मीन आवंटित कर दी गई । बहरहाल आदिवासियों और ग्रामीणों की खेती योग्य ज़मीन छीनकर रामदेव को देने और जंगल तथा पर्यावरण को नुकसान की आशंका के चलते जबलपुर हाईकोर्ट में सरकारी फ़ैसले के खिलाफ़ जनहित याचिका लगने से मामला फ़िलहाल खटाई में पड़ा हुआ है । मगर भोपाल की बेशकीमती ज़मीन पर गुपचुप तरीके से पतंजलि योगपीठ का काम शुरु हो चुका है।

बहरहाल भारतीय जनमानस की गेरुए वस्त्रों के प्रति आस्था को भुनाने में महारत रखने वाले इस योगाचार्य को अपनी दिनोंदिन बढ़ती "ब्राँड वेल्यू" और मार्केट कैपिटल का बखूबी अँदाज़ा है । तभी तो छद्म हिदुत्व की राजनीति करने वाली भाजपा को काशाय वस्त्रों में लिपटे इस छद्म योगऋषि का साथ खूब भाता है । हिन्दुत्व का फ़ार्मूला लगाकर लोकतंत्र के "गणितीय प्रमेय" को सिद्ध करने के लिये बाबा  को साधने की चाह में भाजपा सरकारी खज़ाने को लुटने में भी पीछे नहीं है । घाट-घाट का पानी पी चुके बाबा रामदेव भी अब राजनीतिक पार्टियों की दुखती रग को पकड़ चुके हैं । दो बिल्लियों की लड़ाई में मौज उड़ाते बंदर की तरह बाबाजी कभी तो केन्द्र सरकार की सब्सिडी लेकर फ़ूड पार्क बनाते हैं । कभी उसी भ्रष्ट सरकार का दामन थाम गंगा के सफ़ाई अभियान में जुट जाते हैं । और फ़िर हिन्दू वोट बैंक का डर दिखाकर बीजेपी से भी सौदेबाज़ी करते हैं । मध्यप्रदेश में पतंजलि योगपीठ की गतिविधियों का फ़ैलता दायरा इस बात की तस्दीक करता है ।

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वीरेन्द्र जैन 26/03/2011 22:00:27
बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल उठाये हैं आपने
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niranjansingh 28/03/2011 12:01:35
हे पत्रकारिता की देवी लिखने के लिए आपने ये विवादित मुद्दा ही क्यूँ चुना क्या आप शुंगलू रिपोर्ट, काला धन, २ जी, ३ जी, कॉमनवेल्थ, जैसे असंख्य मुद्दों पर नहीं लिख सकती थी?

शायद आपको लगा होगा की ये चर्चा में आने के लिए सर्वोतम रास्ता है! आपने जो सवाल किये हैं उनसे आपकी निकृष्ट सोच उजागर होती है
आज अगर रामदेवजी योग से लोगों को मुफ्त में रोगमुक्त कर रहे हैं तो आपके पेट में इतना दर्द क्यूँ हो रहा है? अगर सहन नहीं होता तो डूब मरिये अपनी घटिया सोच के साथ क्यूँ अपना और पाठकों का समय बर्बाद कर रही हैं?

मैं फिर दोहराना चाहूँगा की ये सब छाप कर विस्फोट ठीक नहीं कर रहा! आलोचना जरुर छापिये पर बिना तर्क और तथ्यों के नहीं!
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mahendra pratap 26/03/2011 22:07:37
opposition is the strength of baba.
please repeat your alligations with some proofs otherwise u are barking.
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26/03/2011 22:11:22
बाबा रामदेव भले ही आशाराम का परिष्कृत रूप न हों लेकिन आप तो बरखादत्त और वीर संघवी छाप लेखक बनने की नाकाम कोशिश कर रही हो...

कल तक जब बाबा रामदेव इस बेईमान भ्रष्ट और सरकार के बारे में कुछ नहीं कह रहे थे तब कोई भी तलईया या पोखर शान्त पडी थीं, आज जब रामदेव ने बेईमानों पर उंगली उठा दी है तो ना जाने कहां से कांग्रेसियों के पैसे पर पलने वालों की फौज निकल पड़ी है....

बाबा रामदेव समुद्र हैं.. अपने अन्दर सरिताओं को समाने की कुव्वत रखते हैं...
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सविता जी कभी समय निकल कर इन पुस्तकों को भी पढ़ियेगा
१. http://www.scribd.com/doc/24393812/Rangila-Gandhi
२. http://www.scribd.com/doc/20783123/Reminiscences-of-the-Nehru-Age-by-M-O-Mathai-Part-1of2
३. http://www.scribd.com/doc/20783364/Reminiscences-of-the-Nehru-Age-by-M-O-Mathai-Part-2of2
तो शायद आप समझ जायेंगी ऐसे कुतर्क से भरे घटिया आरोपों को पढ़कर हमारे मन में आपके प्रति कैसे विचार आते है, आपके आरोप इसलिए प्रासंगिक नहीं है क्योंकि अगर स्वामी रामदेव कुछ भी गलत कर रहे तो आपकी सरकार है कार्यवाही कीजिये, स्वयं एक भ्रष्ट कांग्रेसी होकर एक सन्यासी पर आरोप लगाने का आपको अधिकार नहीं है, एक झूठ को बार बार चिल्लाने से वो सच नहीं हो जायेगा हिम्मत है तो ठोस सबूतों के आधार पर कार्यवाही कर के दिखाइए
इन पुस्तकों को पढ़ लीजियेगा तो मेरे पास आपके कुछ और महान कांग्रेसी नेताओं की और पुस्तके और लिंक भी है निवेदन करेंगी तो मैं अवश्य उपलब्ध करा दूंगा
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Chandan 27/03/2011 01:21:54
कल तक जब बाबा रामदेव इस बेईमान भ्रष्ट और सरकार के बारे में कुछ नहीं कह रहे थे तब कोई भी तलईया या पोखर शान्त पडी थीं, आज जब रामदेव ने बेईमानों पर उंगली उठा दी है तो ना जाने कहां से कांग्रेसियों के पैसे पर पलने वालों की फौज निकल पड़ी
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Vikram Gehlot 27/03/2011 08:21:11
India have biggest problem of self criticism. If any multinational company sell something junk and make big money then we people don't have any problem... but if somebody from our own country do something good and sell something good then everybody start to do criticism...

I just read the first para of this article then realised that this is waste of time so didn't read more and you know the language how bad is used for respected Ramdevji...
this is paid article.

This type of planned attempt would always encourage moral of Ramdevji.
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27/03/2011 08:45:08
Just envious!

Dogs bark when elephant passes through.
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Jitendra Nath 27/03/2011 09:36:40
Aapke dwara istemal ki gayee bhasa ...Abhadra hai.....mai aap se prashna karoon? kya aap digvijay singh ki rakhail hai?
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thakur 27/03/2011 10:51:57
हे पत्रकारिता की देवी लिखने के लिए आपने ये विवादित मुद्दा ही क्यूँ चुना क्या आप शुंगलू रिपोर्ट, काला धन, २ जी, ३ जी, कॉमनवेल्थ, जैसे असंख्य मुद्दों पर नहीं लिख सकती थी?

शायद आपको लगा होगा की ये चर्चा में आने के लिए सर्वोतम रास्ता है! आपने जो सवाल किये हैं उनसे आपकी निकृष्ट सोच उजागर होती है
आज अगर रामदेवजी योग से लोगों को मुफ्त में रोगमुक्त कर रहे हैं तो आपके पेट में इतना दर्द क्यूँ हो रहा है? अगर सहन नहीं होता तो डूब मरिये अपनी घटिया सोच के साथ क्यूँ अपना और पाठकों का समय बर्बाद कर रही हैं?

मैं फिर दोहराना चाहूँगा की ये सब छाप कर विस्फोट ठीक नहीं कर रहा! आलोचना जरुर छापिये पर बिना तर्क और तथ्यों के नहीं!
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Sunil Amar journalist 09235728753 27/03/2011 11:15:33
बहुत बढ़िया सरिता जी,शाबास ! पत्रकारिता में अपनी बात कहने का यह तेवर बनाये रखियेगा.
दुष्यंत जी की दो पंक्तियों के हवाले से आपका उत्साहवर्धन करना चाहूँगा --''..हर तरफ ऐतराज़ होता है, जब भी मैं रौशनी में आता हूँ!''
और यह कि ---''..हिम्मत से सच कहूँ तो बुरा मानते हैं लोग, रो-रो के बात कहने की आदत नही रही!''
बुरा मानने दीजिये लोगों को ! उससे कोई फ़र्क नही पड़ता.
बशर्ते आप किसी को खुश करने के लिए न लिख रही हों ! Sunil Amar ( nayamorcha.blogspot.com)
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anant kumar 27/03/2011 18:46:26
विचारोत्तेजक और तथ्यपरक लेख पढ़वाने के लिये विस्फ़ोट को साधुवाद । जिन भाइयों को आलेख में तथ्य नज़र नहीं आ रहे हैं , उसमें लेखिका का नहीं उनकी दृष्टि का दोष है । इसी लेख के तारतम्य में इस लिंक पर भी नज़र डालें , तो शायद बाबा रामदेव के इन अँधभक्तों की दूर और पास की नज़र के दोष मिट सकेंगे । http://www.chauthiduniya.com/2011/03/baba-ramdev-ab-sirf-ramdev.html
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उसको भी पढ़ा है श्रीमान और टिप्पणी भी दी थी गाली गलौज मैं करता नहीं सो टिप्पणी तार्किक और साफ सुथरी थी लेकिन आज तक मोडरेटर ने मेरी टिप्पणी प्रकाशित नहीं की जबकि उसके बाद और लोगो की टिप्पणी वो प्रकाशित कर चुका है, जो स्वयं की आलोचना बर्दाश्त न कर सके वो दूसरों की आलोचना कैसे कर सकता है
और चौथी दुनिया की छवि क्या है विस्फोट पर प्रकाशित ये लेख पढ़ ले जान जायेंगे
http://www.visfot.com/index.php/corporate_media/3675.html
http://www.media.visfot.com/index.php/discussion/3460.html
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Sarita Argarey

Sarita Argarey संघर्ष को पत्रकारिता से जोड़नेवाली सरिता अरगरे भोपाल में रहती हैं और पारिवारिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी पत्रकारिता के प्रति पूरी तरह से समर्पित. विस्फोट के अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेखन और दूरदर्शन में अंशकालिक पत्रकार के बतौर कार्यरत.
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