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एक अनार, सौ बीमार

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने की संभावनाएं दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर नेताओं में घमासान मचा हुआ है। इस पद की दौड़ में हर महीने कोई न कोई नाम उभरकर सामने आ रहा है। फिलहाल तो भाजपा चुनाव अभियान और प्रबंधन में कांग्रेस से कई कदम आगे हैं। इसके बाद भी कांग्रेस नेताओं में मुख्यमंत्री पद को लेकर खासी दौड़ मची हुई है।

सबसे ज्यादा इस पद को लेकर नाम की चर्चा केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की हो रही है। सिंधिया को चुनाव अभियान समिति का मुखिया बनाने की चर्चाएं पिछले एक पखवाड़े से कांग्रेस शिविर में गर्म हैं। अभी तक इसका एलान नहीं हुआ है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सिंधिया का नाम कांग्रेसी उछाल रहे हैं। सबसे पहले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा था कि कांग्रेस की सरकार बनने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं। लेकिन अब वही दिग्विजय सिंह कह रहे हैं कि यह कांग्रेस की परंपरा नहीं है। अपना प्रतिनिधि जनप्रतिनिधि खुद चुनेंगे।

ज्योतिरादित्य के बाद अन्य नाम भी चर्चाओं में आए, लेकिन हाल ही में गुना प्रवास पर आए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस की राजनीति में यह कहकर भूचाल ला दिया कि अगर मप्र में कांग्रेस की सरकार बनी, तो सिंधिया मुख्यमंत्री होंगे, पर आधे घंटे बाद ही कमलनाथ ने पत्रकारों के बीच गुना में ही सफाई दे दी कि सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाने का एलान उनकी निजी राय है।

ऐसा नहीं है कि सिंधिया अकेले ही मप्र में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं, बल्कि कांग्रेस के अन्य नेता भी सीएम पद की कतार में हैं। 2008 की तरह 2013 में भी केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने फिर से इच्छा जाहिर की है कि अगर कांग्रेस की सरकार बने, तो वे मुख्यमंत्री बनने को तैयार हैं। उन्होंने एक टीबी चैनल को दिए साक्षात्कार में स्वीकार किया है कि वे मुख्यमंत्री पद स्वीकार कर सकते हैं, पर जब ज्यादा हल्ला मचा तो उन्होंने सफाई दी कि पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या वे मप्र के मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक हैं, तो उन्होंने कह दिया कि हां, मुख्यमंत्री बनने को तैयार हूं। इस पर कमलनाथ कहते हैं कि उन्होंने पत्रकार के सवाल के जवाब में उत्तर दिया है।

कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के तीसरे उम्मीदवार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया हैं। कोई छह महीने पहले केंद्रीय राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भूरिया को भविष्य का मुख्यमंत्री बताया था,लेकिन थोड़े दिनों बाद भूरिया और सिंधिया में अनबन हो गई जिसके चलते अब सिंधिया स्वयं मैदान में उतर आये हैं। भूरिया पत्रकारों से चर्चा के दौरान कई बार कह चुके हैं कि वे भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में है, लेकिन इसको सार्वजनिक रूप से कहने में उन्हें थोड़ी परेशानी होती है, क्योंकि वे कांग्रेस की राजनीति से भली भांति बाकिफ हैं।

कांग्रेस में जिसके नाम को लेकर खूब हल्ला मचता है वह सेहरा बांधने में कामयाब नहीं हो पाता। यही वजह है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह अपने आपको मुख्यमंत्री पद की दौड़ से दूर रखे हुए हैं और सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में व्यस्त हैं। पर इच्छा तो उनकी भी मुख्यमंत्री बनने की है। यानी मप्र की कांग्रेस राजनीति में भले ही सत्ता लाने के लिए कांग्रेसी उतना संघर्ष नहीं कर रहे हैं जितना की मुख्यमंत्री पद के लिए मशक्कत की जा रही है।

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