आतंकवाद की राजनीति और मीडिया
क्या आतंकवाद बौद्धिक स्तर पर इतना विकसित हो चुका है कि उसका राजनीतिक धरातल तैयार हो सके? इस जटिल प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है. जो लोग अल-कायदा को आतंकी संगठन बताकर उसके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं वे भी शायद इसे इस्लामिक चरमपंथ कहना ज्यादा मुनासिब समझेंगे बनिस्बत कि आतंकवाद के दर्शन में निहित राजनीति को मान्यता प्रदान करें. लेकिन मुस्लिम देशों में आतंकी गतिविधियों के द्वारा दुनियाभर में थरथराहट पैदा करनेवाले इस्लामिक विद्वान इसे उस राजनीति की प्रतिक्रिया मानते हैं जिसके वैचारिक आक्रमण के कारण इस्लाम को खतरा पैदा हो गया है. शायद इसीलिए "जिहाद" जरूरी हो गया था.
टाटा-बिड़ला-अंबानी, पीयेंगे मध्य प्रदेश का पानी
वेतन-भत्तों और सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार हाय तौबा करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की बुनियादी ज़रुरतों से पल्ला झाड़कर औद्योगिक घरानों की ताल पर थिरकते दिखाई दे रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पानी,बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ जुटाने का ज़िम्मा सरकारों को सौंपा गया है। मगर सरकारें अब जनहित के कामों को छोड़कर एक के बाद एक योजनाओं को निजी हाथों में सौंपती चली जा रही है, फ़िर चाहे वो प्राकृतिक संसाधन हों, ज़मीन हो या आम जनता की सेवा से जुड़े मुद्दे हों। इसी कड़ी में अब नेताओं और उद्योगपतियों को पानी मुनाफ़े का सौदा नज़र आने लगा है।असफल गृहमंत्री का सफल 'आतंकवाद'
हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं.चीन के सामने दीन हीन
पिछले कुछ वर्षों से चीन हिन्दुस्तान को पूर्वोत्तर तथा जम्मू एवं कश्मीर के मसले में अनावश्यक आँख तरेरने लगा है. चीन के इस दुस्साहस के लिए हिन्दुस्तान सरकार की अनावश्यक मिमियाहट जिम्मेदार है. जुलाई के महीने में चीन ने हिंदुस्तानी सेना के उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बी.एस.जसवाल को बीजिंग का वीजा यह कह कर नकार दिया कि वे विवादास्पद क्षेत्र के सैन्य प्रमुख हैं. लेफ्टिनेंट जनरल जसवाल का वीजा मध्य जुलाई माह में नकारा गया। इसके बाद ११ अगस्त को निर्वासित तिब्बतियों की सरकार के प्रमुख दलाई लामा हिंदुस्तानी प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह से मिले तो इस पर चीनी राजनायिक इतने गरम हो गए कि हिन्दुस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान चीन के समक्ष याचना वाली मुद्रा में खड़ा हो गया.विकीलीक्स-विकीलीक्स खेल रहे हैं मीडिया दिग्गज
दुनिया भर को सच्चाई, ईमानदार और दायित्वबोध का पाठ पढ़ाने वाले मीडिया हाउसों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि अपनी बारी आने पर वे नैतिकता को बैकफुट पर रख देते हैं. नेता या अफसर ने उनके हितों को नुकसान पहुंचा दिया तो पीछे पड़ जाते हैं. वह दौर अब काफी पीछे छूट गया है जब प्रतिद्वंद्विता बैकफुट पर और नैतिकता फ्रंट फुट पर हुआ करती थी. अब तो मीडिया दिग्गज प्रतिद्वंद्वी हाउसों में चोरी करवा रहे हैं और डाके डलवा रहे हैं. जी हां, रांची में चल रहे मीडिया वार में एक दूसरे कर्मचारियों पर डाका डालना और प्रतिद्वंद्वी का अखबार न बिकने देने के लिये हॉकरों को अपने कब्जे में लेना तो आम बात है.निरुपमा के पिता ने दी थी बुरे अंजाम की धमकी- प्रियभांशु
निरुपमा की मौत के बाद प्रियभांशु गहरे अवसाद में है और मीडिया से बात करना बंद कर चुका है. लेकिन जिस प्रकार से निरुपमा के घरवाले इस पूरे मामले को टर्न देने की कोशिश कर रहे थे उसमें प्रियभांशु का बोलना जरूरी हो गया था. प्रियभांशु का कहना है कि निरुपमा के पिताजी ने तीन बार फोन करके उसके पिता को धमकी दी थी कि अपने बेटे को समेट लीजिए नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा. प्रियभांशु से की गयी बातचीत का महत्वपूर्ण अंश.कांग्रेस पर सत्ता संघर्ष भारी, अब राहुल गांधी की बारी
एक अजीब से घटना है। जिस दिन राहुल गांधी अपने आपको उड़ीसा में आदिवासियों के सिपाही घोषित करते है, उसके अगले दिन ही एक खबर छपती है। खबर अखबार के पहले पन्ने की लीड है, जिसमें कहा गया है कि भारत युवाओं का देश है, पर प्रधानमंत्री बुजुर्ग है। साथ ही दुनिया के कई देशों का उदाहरण दिया गया है, जिसमें युवा लोग प्रधानमंत्री के तौर पर विराजमान है। ये एक सामान्य घटना कहेंगे या एक संयोग या एक राजनीतिक खेल? जो युवराज अभी तक कारपोरेट है, वही एकाएक आदिवासियों के सिपाही हो जाते है।छलावा है नक्सलियों से बातचीत का दावा
कुछ अजीब सी बात है। नक्सलियों और सरकार के बीच वार्ता के लिए वातावरण बनाने में लगे हुए स्वामी अग्निवेश ने 12 अगस्त को मीडिया के सामने स्पष्ट कर दिया कि माओवादी वार्ता के लिए राजी हैं। लेकिन उनकी एक महत्वपूर्ण शर्त है नक्सली नेता चेरूकुरी राजकुमार उर्फ आजाद की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की न्यायिक जांच कराई जाए। अभी कुछ दिन पूर्व 16 अगस्त को नई दिल्ली में एक नितांत व्यक्तिगत बातचीत में उन्होंने खुलासा किया कि वार्ता से संबंधित माओवादियों का एजेंडा केन्द्र सरकार को सौंप दिया गया है। अब निर्णय सरकार को लेना है किंतु वह ढिलाई बरत रही है।शेयर बाजार में ठगी का कारोबार
क्या आप अपनी पूंजी दोगुनी करना चाहते है? वो भी एक माह से कम समय में! आपको लग रहा होगा कि लेखक के पास कौन सी जादू की छड़ी आ गयी है कि यह एक माह से कम समय में पूंजी को दुगनी कर रहा है वो भी ऐसे मंदी के माहौल में जब दुनिया की बड़ी-बड़ी आर्थिक संस्थाएं दिवालिया हो रही हैं. लेकिन यकीन मानिये यह सच है बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड एक कंपनी जिसका नाम “ओड़िसा मिनरल डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड” है.माखनलाल कैंपस में महाभारत
पंडित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय एक मर्तबा फ़िर विवादों में है। अपने स्थापना से लेकर अब तक पत्रकारिता का यह तीर्थस्थल किसी ना किसी वजह से खबरों में रहा है। अपनी साख के संकट से जूझ रही यूनिवर्सिटी के कुलपति बी. के. कुठियाला की कार्यशैली ताज़ा असंतोष की वजह बन गई है। कुरुक्षेत्र से आए प्रोफ़ेसर कुठियाला के फ़ैसलों से पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कैंपस में "महाभारत" छिड़ गई है। असंतुष्ट खेमा कुलपति के खिलाफ़ मोर्चा खोल चुका है। सूचना के अधिकार के तहत हासिल जानकारियों ने आग में घी का काम किया है।पत्थरों की खदानों से लौटा बचपन
कभी बाल मजदूरी करने वाला महेन्द्र अब बच्चों के अधिकारों से जुड़ी कई लड़ाईयों का नायक है। महेन्द्र के कामों से जाहिर होता है कि छोटी सी उम्र में मिला एक छोटा सा मौका भी किसी बच्चे की जिंदगी को किस हद तक बदल सकता है।पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना
घना पक्षी विहार को इस बर्ष पानी मिल गया है। करौली जिले के पाँचना बाँध से छोडा गया पानी अब भरतपुर की सीमा में पहुँच गया है। इस पानी के बाद संभावना है घने का ताज बच जाये। पानी से रिक्शा चालकों से लेकर होटल मालिक सब प्रसन्न है, लेकिन इस पानी पहुँचने के कारणों में भरतपुर सांसद का करौली कलक्टर को फोन करना चर्चा का विषय बना हुआ है।स्टेनगनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा! (हवन)
भारत में यज्ञ का महत्व क्या है और हम यज्ञ क्यों करते हैं इसकी विधिवत जानकारी हमें भले ही न हो लेकि यज्ञ को लेकर भारत में भ्रांतियां बहुत हैं. स्वामी श्री अड़गड़ानंद वर्तमान यज्ञ व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. उनके सवाल तार्किक और सटीक हैं जिसके बारे में हिन्दू समाज को निश्चित रूप से गंभीरता से विचार करना होगा. यज्ञ पर स्वामी जी के लेखन को दो किश्तों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं.बाढ़ के बाद पाकिस्तान पर मंहगाई की मार
बाढ़ के कहर के बाद बढ़ी महंगाई ने पाकिस्तानी जनता की कमर तोड़ दी है। रमजान के महीनें में महंगाई ने पाकिस्तानी जनता को भारी परेशानी में डाल दिया है। बाढ़ के कारण सब्जियों की फसल तबाह हो गई है। आलू, टमाटर और मटर की कीमतें आसमान छू रही है। शहरों में टमाटर जहां १३० रुपये किलो बिक रहा है, वहीं आलू की कीमत भी चालीस से पचास रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। मजबूरी में पाकिस्तानी व्यापारियों ने अमृतसर से आलू, प्याज और टमाटर का आयात शुरू कर दिया है। उधर आम लोगों के पास अब इस बढ़ती महंगाई के कारण टमाटर और आलू खरीदने के लिए भी पैसे नहीं है।तिगड्डे में फंसा किसान
वोट बैंक की राजनीति जो ना कराए वो कम है। कल तक अलीगढ़ में अपनी जमीन के मुआवजे के लिए एक महीने से लड़ रहे किसानों के साथ कोई नहीं था। लेकिन जैसे ही पुलिस की गोलीबारी में तीन किसानों की मौत हुई तो वहां नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। क्या कांग्रेस, क्या बीजेपी, क्या सपा और क्या बसपा। किसी ने यह मौका नहीं छोड़ा कि वे ही किसानों के सबसे बड़े हिमायती हैं यह इतना दुखदायी और पीड़ादायी है कि बताया नहीं जा सकता।कारपोरेट पत्रकारों की समाजवादी चिंता
11 जुलाई को सुप्रसिद्ध पत्रकार स्वर्गीय उदयन शर्मा का जन्म दिन था। हर साल की तरह इस साल भी 'संवाद 2010' के तहत एक परिचर्चा 'लॉबींयग, पैसे के बदल खबर और समकालीन पत्रकारिता' का आयोजन किया गया था। इस परिचर्चा में देश के कई दिग्गज पत्रकार दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हॉल में जुटें और अपने विचार रखे।सहज उकेरी पीर घनेरी
क्षमा कुलश्रेष्ठ जब अठारह साल की थी तो उन्होंने एक कविता लिखी थी. ‘बन के तारा झिलमिलाऊं, चंाद मेरे पास हो, ऐसा कुछ मैं कर दिखाऊं, सबको मुझपर नाज हो, मानती हूं मेरा जीवन, गहरी काली रात है, दिन में तारों का नजारा, एक असंभव बात है।’ आज क्षमा की उम्र होगी यही कोई तीस साल के आसपास, लेकिन जब आप उनसे मिलेंगे, आपको कोई जब तक उनकी उम्र का हिसाब ना बताए, आप उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकते।बारूद
ममता के दरबार में कांग्रेस की सरकार
पश्चिम बंगाल में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान और चूहे बिल्ली का खेल बढ़ता जा रहा है. इसका एक उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब कांग्रेस के युवा नेता और केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट पश्चिम बंगाल के दौरे पर गये. ...
'हिंदुस्तान' ने पूर्णिया को शर्मसार कर दिया
उम्र-78 साल और ये उम्र मैंने अपने घर के बंद कमरों में नहीं काटी. पूर्णिया की तमाम साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से हर दिन का साबका रहा है. कचहरी चौक पर धरना-प्रदर्शन से लेकर छोटे-बड़े तमाम मंच पर सक्रिय रहा हूं. जानता हूं कि खबरें कैसे बनती हैं और कैसे छपती हैं. 'हिंदुस्तान', 'दैनिक जागरण', 'प्रभात खबर', 'राष्ट्रीय सहारा' और ऐसे ही तमाम अखबारों में छपता रहा हूं. पत्रकारिता को लेकर खट्टे-मीठे अनुभव रहे हैं. उम्र और अनुभव का तकाजा कुछ ऐसा रहा कि कभी शाबाशी में पत्रकारों की पीठ ठोंकी तो कभी उनकी तीखी आलोचना भी की, लेकिन पिछले दिनों शहर में घटी एक घटना के बाद से बेचैन हूं, दुखी हूं, शर्मिंदा हूं- समझ नहीं आ रहा कि कैसे मन की पीड़ा व्यक्त करूं?...
प्रेस क्लब ने खाना नहीं खिलाया, नोटिस थमा दिया
चंडीगढ़ प्रेस क्लब की तानाशाही का एक और नमूना सामने आया है। दैनिक भास्कर चंडीगढ़ के ब्यूरो चीफ ब्रजमोहन सिंह को क्लब ने कार्रवाई संबंधी नोटिस भेज दिया गया है। दिलचस्प बात है कि क्लब के अंदर ब्रजमोहन सिंह को दो घंटे तक खाना के आर्डर के बावजूद खाना नहीं देकर पहले बेइज्जति की गई और उसके बाद जब ब्रजमोहन सिंह ने शिकायत की तो उन्हें नोटिस दिया थमा दिया गया।...
17 अक्टूबर से हो सकते हैं बिहार में चुनाव
बिहार विधानसभा चुनावों की घोषणा होनेवाली है. चुनाव आयोग और राज्य सरकार की मशीनरी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बिहार में दुर्गापूजा के बाद 17 अक्टूबर से चुनावों की घोषणा की जा सकती है. ऐसी संभावना है कि बिहार में चार चरणों में मतदान पूरा किया जाएगा और जल्द ही तिथियों की घोषणा कर दी जाएगी. ...
साथी की शोकसभा के लिए भी संपादक के पास समय नहीं
29 अगस्त 2010. भागलपुर में एक पत्रकार के लिए शोकसभा का आयोजन. 29 जून को ट्रेन से गिरकर पत्रकार की मौत हो गयी थी. शोकसभा का आयोजन थोड़ी देर से किया गया था लेकिन किया गया. लेकिन खुद अखबार के संपादक ही शोकसभा में नहीं आये और बहाना बनाया कि वे मीटिंग में हैं. मीटिंग में तो संपादक महोदय नहीं आये, लेकिन आश्चर्य का ठिकाना तब नहीं रहा जब अगले अखबार ने अपने ही दिवंगत साथी की शोकसभा को एक कालम की खबर का भी दर्जा नहीं दिया. ...
भगवा पर हमारा भी दावा- दिग्विजय सिंह
कांग्रेसी नेता और केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदम्बरम ने भगवा आतंकवाद को बढ़ने की बात क्या कही, भाजपा से अधिक घमासान कांग्रेस में शुरू हो गया. पहले कांग्रेस के प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने भगवा को आतंक से जोड़ने को खारिज किया वहीं अब दिग्विजय सिंह ने कहा है कि भगवा रंग पर हम सबका है इस पर किसी खास राजनीतिक दल का दावा नहीं हो सकता. ...
हिज़ाब छोड़ देने की हिम्मत
सामाजिक कार्यकर्ता, शबनम हाशमी ने मांग की है कि केरल के कासरगोड जिले की महिला रायना खासी की हिफाज़त का ज़िम्मा केरल की सरकार ले. शबनम हाशमी के संगठन, अनहद के एक बयान में कहा गया है कि पुरातन पंथियों के एक संगठन की ओर से रायना को पिछले एक साल से धमकी मिल रही है और उन्हें आगाह किया जा रहा है कि वे हिजाब में रहें....
क्षय रोग का क्षय करने आगे आये पत्रकार
भारत में प्रतिवर्ष २० लाख लोग टीबी के मरीज बनते हैं एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक ३ मिनट में २ लोगो कि मौत हो जाती है ऐसी स्थिति में मीडिया का दायित्व है कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सार्थक रूप से ध्यान दे। इस बीमारी के जीवाणु भारत में ४० प्रतिशत लोगो में किसी न किसी रूप में हैं जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम है उनमे यह सक्रिय होकर जानलेवा बन जाते हैं। अतः सरकार द्वारा पोषित डॉट्स का समुचित रूप से क्रियान्वयन आवश्यक है। उपरोक्त निष्कर्ष इंडियन मीडिया सेंटर फॉर जर्नलिस्ट्स, लखनऊ द्वारा टीबी उन्मूलन और मीडिया कि भूमिका विषयक गोष्ठी में निकला।...
मायावती के राज में जेपी का गुण्डाराज
समरथी देवी के झोपड़े की छत पर लगा लाल झंडे का रंग अब फींका पड़ चुका है, वहीँ झोपड़े के भीतर एक चारपाई पर कराह रही समरथी के हथेली में लगा गीला आटा भी सूख कर कड़ा हो गया है। वो इनसे बमुश्किल अपने आंसू पोंछ पाती है। कुछ घंटे पहले ७० वर्ष की समरथी पर जेपी एसोसिएट के गुंडों ने खौलती हुई चाय फेंक दी थी, जिससे उसकी बांह और शरीर के अन्य हिस्से बुरी तरह से झुलस गये थे। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में स्थित डाला की मलिन बस्ती में रहने वाली समरथी का कसूर सिर्फ इतना था कि वो जेपी द्वारा दी जा रही तमाम धमकियों के बावजूद अपनी झोपड़ी को खाली करने से इनकार कर दिया था।...
सौदा नहीं पटा तो शुरू किया अभियान
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ खोजी खबरों के लिए नहीं जाना जाता। उसकी छवि सरकार के मुखपत्र की रही है। गत 31 जुलाई को टाइम्स ऑफ इंडिया के पाठकों को नया अनुभव हुआ। उन्हें महसूस हुआ कि अपना अखबार नए अवतार में हैं। उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ जैसा बड़ा अखबार जब खेल-कूद के एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन की तमाम गड़बड़ियों को उजागर करने पर उतर आया तो लोगों को चारो तरफ गड़बड़ ही नजर आने लगा। उन्हें क्या पता था कि यह वह खीझ है जो अखबार में इसलिए प्रकट हो रही है, क्योंकि सौदा पटा नहीं।...
परमाणु प्रतिघात विधेयक पास
लोकसभा में नागरिक परमाणु प्रतिघात विधेयक पास हो गया. पांच घण्टे चली औपचारिक बहस के बाद सरकार ने विपक्षी दलों के सुझावों को कमतर करके मानते हुए लोकसभा में सहमति की मुहर लगवा ली. सरकार ने विधेयक में कुछ कास्टमेटिक बदलाव किये हैं जो िदखावे के दांत के अलावा कभी कुछ और साबित नहीं होगें. ...
सुतनु का संपादकीय संघवी ने चुरा लिया
बिजनेस एंड इकोनॉमी के पिछले अंक(20 अगस्त-02 सितंबर) में प्लानमैन मीडिया के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर सुतनु गुरु ने सांसदों के वेतन बढ़ाए जाने पर चल रही खींचतान पर संपादकीय लिखा.अपने लेख में सुतनु गुरु ने भारत के सांसदों और दुनिया के कई दूसरे देशों के सांसदों को मिलने वाली तनख्वाह और दूसरी सहूलियतों का एक तुलनात्मक लेखा-जोखा दिया था और यह भी लिखा कि हमारे सांसदों के लिए लोगों के मन में ऐसी राय बन गई है कि वे सांसदों की वाजिब दिक्कतों को भी तवज्जो नहीं देते....
दैनिक जागरण का सर्कुलेशन गिरा, दर्जा बरकरार
इंडियन रीडरशिप सर्वें 2010 की दूसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा हो गयी है। इस सर्वे में टॉप10 अखबारों ने अपना स्थान बरकरार रखा है। दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान टॉप थ्री पर काबिज है जबकि मलयालम मनोरमा और अमर उजाला चौथे और पांचवें नंबर पर है। इस दौरान अखबारों की प्रसार संख्या में परिवर्तन होने के बावजूद इनकी रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ।...
135 किलोमीटर तक अविरल रहेगी गंगा की धारा
आखिरकार जीडी का अनशन सफल हुआ. गोमुख से उत्तरकाशी तक गंगा की धारा अब अविरल रहेगी और इस पर किसी प्रकार की बिजली परियोजना स्थापित नहीं की जा सकेगी. सरकार ने लोहारी नागपाला पनबिजली परियोजना पर काम को पूरी तरह से रोक दिया है. इसके साथ ही गोमुख से उत्तरकाशी तक 135 किलोमीटर के क्षेत्र को अति संवेदनशील घोषित किया गया है. ...
कामनवेल्थ गेम्स के दौरान देश छोड़ देगे मणि
कामनवेल्थ खेलों की आलोचना करनेवाले मणिशंकर अय्यर का कहना है कि वे कामनवेल्थ खेलों के दौरान देश में ही नहीं रहेंगे. पलक्कड़ में शशि थरूर की शादी में पहुंचे मणिशंकर अय्यर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि “खेल के दौरान वे देश में ही नहीं रहेंगे. अक्टूबर में जब खेल होंगे मैं यहां नहीं रहूंगा. मैं इस नर्क का साक्षी नहीं बनना चाहता.”...
पलक्कड़ में पकड़ लिया सुनंदा का हाथ
सुनंदा पुष्कर शशि थरूर की हो गयीं. केरल के पलक्कड़ में एक छोटे से पारिवारिक आयोजन में शशि थरूर ने विधिवत मलयाली परंपरा के तहत सुनंदा पुष्कर को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया. आयोजन में केवल शशि थरूर के पारिवारिक सदस्य और मित्र ही शामिल थे. ...
भारत ने कहा तिब्बत चीन का हिस्सा
भारत की चीन नीति में बड़ा बदलाव लाते हुए भारत सरकार ने कहा है कि तिब्बत चीन का अभिन्न हिस्सा है और दलाई लामा भारत में सम्मानित अतिथि हैं. विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने नई दिल्ली में जापानी विदेश मंत्री के साथ एक प्रेस कांफ्रेस में बयान देते हुए कहा है कि भारत तिब्बत को चीन का अभिन्न हिस्सा मानता है. ...
मोदी को मिल गया नया गृहमंत्री
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिसे भी गृहमंत्री बनाया है वह किसी न किसी आफत में फंसा है. हरेन पांड्या की हत्या हो गयी थी, अमित शाह गिरफ्तार हैं और गोरधन झड़पिया गोधरा काण्ड में फंसे हैं. अब मोदी ने अपने मंत्रिमण्डल का विस्तार करते हुए गृहमंत्रालय तो अपने पास ही रखा है लेकिन गृहराज्यमंत्री का पद अपने मित्र प्रफुल्ल पटेल को सौंप दिया है. ...
फिर मर्द के हाथ में कपूर खानदान की कमान
बालीवुड की सुपर फैमिली कपूर खानदान की बागडोर पुनः एक मर्द के हांथो में आती दिख रही है.पिछले दो दशको से महिलाओं के भरोसे अपने अस्तित्व को बचाए इस खानदान को रणवीर कपूर के रूप में बहुत बड़ा संकट मोचन मिला है.वर्तमान में बालीवुड के सबसे उभरते सितारे के रूप में रणवीर ने जो जगह बनायीं है वह काबिले तारीफ है....
जनता के सामूहिक नरसंहार की योजना में सभी दल साथ हैं
इसे उदाहरण मानिए अपने लोकतंत्र का. साठ साल के गणतंत्र का. संसद में नागरिक परमाणु सुरक्षा विधेयक प्रस्तावित है. सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी कीमत पर इस विधेयक पर संसद की मुहर लगवाए ताकि परमाणु कंपनियां परमाणु बिजलीघर बनाने की शुरूआत कर सकें. आपको याद हो, तो याद करिए पिछली यूपीए सरकार ने परमाणु विधेयक को पारित करवाने के लिए किस तरह से अमर सिह का इस्तेमाल करके समाजवाद को पूंजीवाद का पिछलग्गू बना दिया था. लेकिन बात अटकी हुई है. ...
शहनवाज के इफ्तार में मनमोहन मुलायम
भारतीय जनता पार्टी के नेता शहनवाज हुसैन ने बुधवार को दिल्ली स्थित अपने आवास पर इफ्तार का आयोजन किया था. शहनवाज की इस इफ्तार पार्टी में भाजपा से अधिक कांग्रेस के नेताओं ने शिरकत की. शिरकत करनेवालों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल थे. ...
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कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...Log in
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what ever the reason to induce it but it doesn't reduce the imprudance of anti corruption movement run by the group
ji...pankaj..ji..aap..ki..chinta..bilkul..vajib..hai..aapke...is..chintan..me..bihar..ka..dard..saf..jhalak..rha..hai...
आदरणीय पंकज जी संघ का विरोध करने के बजाय मीडिया में क्षेत्रवाद,जातिवाद, अयोग्यतावाद, चाटुकारिता और ऐसी ना
जाने कितनी बुराईयों के विरोध के लिए कमर कसिए।
बाँसुरी की मधुर धुन छेड़ने वाला कृष्ण चरित्र ही नये भारत का सच्चा आदर्श हो सकता है किंतु धर्म के नाम पर सत्ता पाकर भ्रष्टाचार ...
पहली बात तो यह कि स्पन्दन एक साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था है जिसमें सुप्रसिद्ध कथा लेखिका उर्मिला शिरीष, डा. शिरीष शर्मा, सुप्रसिद्ध चित्रकार गायत्री गौड़, सहित ...





