घात लगाकर पत्रकारिता

पत्रकारिता का एक टीवी संस्करण है। बेलाग, बेबाक, बदतमीज, बेहया, बेतुका और आखिर में बकवास। आज से दो-तीन साल पहले टीवी के पत्रकारों को जब यह पूछा जाता था कि आप लोग इस तरह से अनाप-शनाप बातों में ही खबर क्यों खोजते हैं तो वह पत्रकार इठलाते हुए अपने को झोलाछाप श्रेणी से बाहर निकला मानकर लंबी-चौड़ी बहस करता था। अब वे लोग चुप हैं। उन्होंने टीवी पर पत्रकारिता छोड़ दी है। अब वे न्यूज चैनल में नौकरी करते हैं। नित नये-नये तरीकों से पत्रकारिता को नये-नये मुकाम पर ले जा रही टीवी पत्रकारिता में स्टिंग ऑपरेशन बड़ी अनूठी विधा है। आप इसे घात लगाकर पत्रकारिता भी कह सकते हैं। और सरलीकरण करना चाहें तो घातक पत्रकारिता कहने में भी कोई हर्जा नहीं है।

भारत महादेश में इस युग की शुरूआत तहलका ने की। उसने यह साबित करने के लिए कि रक्षा सौदों में दलाली होती है, लंबा-चौड़ा अभियान चलाया। कहते हैं अगर वह मिशन सफल हो जाता तो देश का प्रधानमंत्री कार्यालय भी उसके निशाने पर था। पोल खुलती देख मिशन बीच में ही सार्वजनिक कर दिया गया। उसके बाद देश में जो तहलका मचा उसने इस नयी विधा में अच्छी व्यावसायिक संभावना को जन्म दे दिया। कहते हैं तहलका का यह ऑपरेशन अनिरूद्ध बहल ने चलाया लेकिन सारा श्रेय तरूण तेजपाल ले गये। अनिरूद्ध ने यहां से अपना रास्ता अलग कर लिया और अपनी अलग से कंपनी बना ली। तहलका के बाद अगर तरूण तेजपाल परंपरागत पत्रकारिता की ओर लौट गये और उन्होंने अखबार निकालना शुरू कर दिया तो अनिरूद्घ ने स्टिंग को अपना कैरियर बना लिया।
वह कैरियर नित नई ऊचाईयों को छू रहा है। इसका ताजा उदाहरण एक चैनल पर दिखाई गयी वह खबर है जिसमें कुछ बाबाओं को काला धन सफेद करने के गोरखधंधे में शामिल बताया जा रहा है। अगर आपने यह खबर देखी हो तो आपको समझ में आ गया होगा कि पूरी तरह से प्लाट बिछाकर, घात लगाकर यह ऑपरेशन माया पूरा किया गया है। यह खबर की नयी समझ है। अगर खबर नहीं है तो आपका पत्रकारीय धर्म बन जाता है कि आप खबर तैयार करें। खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन में यही फर्क है। एक अपराध को सामने लाता है तो दूसरा यह मानकर कि इस तरह के अपराध होते हैं उसका प्लाट बिछाता है, घात लगाता है, खबर बनाता है और फिर उसे ऊंची कीमत पर बेचता है। चैनल ऐसी खबरों की मार्केटिंग करते हैं और ऊंची टीआरपी के बल पर अधिक विज्ञापन जुटाते हैं। फिर इसको पत्रकारिता क्यों कहें? यह तो बिजनेस है। हम पत्रकारिता का नहीं इस बिजनेस की आलोचना कर रहे हैं।

2 thoughts on “घात लगाकर पत्रकारिता

  1. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। नियमित लेखन हेतु मेरी तरफ से शुभकामनाएं।

    नए चिट्ठाकारों के स्वागत पृष्ठ पर अवश्य जाएं।

    किसी भी प्रकार की समस्या आने पर हम आपसे सिर्फ़ एक इमेल की दूरी पर है।

    ई-पंडित

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  2. dear sir,
    ghat lagakar patrakarita blog main apne apne vichron ko clear kiya bahut khushi hui,
    lekin jise aap sirf selfisness ya bazarikaran karar dete hain uske pichhe ke nihitarth ko samajh nahi paye.
    kya apko lagta hai k mr. anirudh behl ye kam sirf paise k liye karte hain to ye apki bahut bari bhool hai.
    shayad apko unke upar research karne ki zaroorat hai.
    iske alawa brief main sirf itna bata doon ki jin babaon ki aap taraf dari kar rahe hain ek baar sirf ek baar unki harkaton ko desh k saath jodkar soche shayad aap kuchh samajh saken

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