सन 2052 का एक दिन

यह दिल्ली का एक आम दिन है। आज 23 दिसंबर है और रोज की तरह आज भी बाहर भारी हिमपात हो रहा है। तापमान -10 डिग्री सेल्सियस है। मैं सुबह से अपने घर में हूं। हालांकि ऐसा कम ही होता है जब मैं बाहर निकलूं। 76 साल की उम्र में मेरे पास करने के लिए अब कुछ खास है भी नहीं। यह तो नहीं कह सकता कि मैं अकेला हूं क्योंकि दिनभर मैं अपने वर्चुअल सेट के साथ खिलवाड़ करता रहता हूं। दस साल पहले ही अपने हाथ में मैंने एक माइक्रोचिप लगा ली थी जिससे अब मैं मानसिक रूप से लगातार जिससे चाहूं संपर्क में बना रहता हूं। इनमें से कई चांद पर स्थाईरूप से बस चुके हैं और कुछ समुद्र में बसाई गयी बस्तियों में रहते हैं। खरीदारी की कोई खास जरूरत आजकल है नहीं फिर भी कुछ खरीदना हो तो मैं अपने वर्चुअल सेट का सहारा लेता हूं। अभी कल ही 20 लीटर पानी मैंने नीलामी में खरीदा है जो मुझे बाजारभाव से बहुत सस्ते में मिल गया। बहुत दिनों से मैं लगातार समुद्र का रिफाइन्ड पानी पी रहा हूं। आजकल मीठा पानी मिलना बहुत मुश्किल है। इस 20 लीटर पानी को मैं लंबे समय तक सहेजकर रखने की कोशिश करूंगा। हालांकि बाहर गिर रही बर्फ को भी मैं प्रोसेस करके मीठे पानी के रूप में प्रयोग कर सकता हूं लेकिन मेरा सर्वर ऐसा करने से मुझे मना कर रहा है। बर्फ विषाक्त है और पानी के रूप में प्रयोग होने लायक प्रोसेसिंग की तकनीकि अभी विकसित की जा रही है। जिस दिन यह तकनीकि बाजार में आ जायेगी उसके बाद शायद मीठे पानी की समस्या थोड़ी कम हो सके। आप सब जानते ही हैं नदियां कब की सूख चुकी हैं क्योंकि ग्लेशियर पूरी तरह से जम गये हैं। वर्षा भी न के बराबर होती है।
मैने अभी थोड़ी देर पहले अपने डॉक्टर से बात की। मुझे सांस लेने में थोड़ी दिक्कत हो रही है। उन्होने कहा है कि वे मेरे सर्वर पर दवा का कोड फीड कर देंगे। यह तकनीकि नयी नहीं है। डॉक्टर मेरे सर्वर पर कोड फीड करते हैं और मेरा चिप उसे अपने-आप डाउनलोड करके संबंधित सेल में कोड पहुंचा देता है। अभी तक मेरे चिप ने मुझे कन्फर्म नहीं किया है कि कोड उसे मिला है या नहीं। लेकिन अभी मैं डॉक्टर को रिमांडर भेजने के मूड में नहीं हूं। अभी मैं अपने सिलिकॉन कपड़ों को ड्राई करने जा रहा हूं जिससे उसकी नमी खत्म हो जाए।
मेरी पत्नी यहां से 300 किलोमीटर दूर एक कस्बे में साईबर स्टोर चलाती हैं। वह उम्र में मुझसे 10 साल छोटी है इसलिए अभी उसकी सक्रियता दिन में 14 घंटे रहती है। उस कस्बे में ह्यूमन साईबोर्ग बनाने का प्रोजेक्ट चल रहा है। मेरी पत्नी साईबोर्ग विशेषज्ञ है इसलिए आजकल उसे रोज वहां जाना पड़ता है। मेरे दोनों बेटे चांद पर जा चुके हैं और वे दो-तीन साल में एक बार यहां जरूर आते हैं। हालांकि वर्चुअल सेट की मदद से मैं लगातार उनके संपर्क में रहता हूं फिर भी स्पर्श की कमी रहती ही है। अभी भी भावना का विकल्प तैयार नहीं किया जा सका है। मेरी पत्नी के साईबर स्टोर में 7 रोबोमैन काम करते हैं। उनके ऑपरेशन को ठीक रखने के लिए मेरी पत्नी ने एक आदमी भी रखा है जो एक लंबी और थका देनेवाली प्रकृया के बाद हमें मिला है। आदमी रखने में दो समस्या है। पहली यह कि श्रेष्ठ तकनीशियन अब दूसरे ग्रहों को प्राथमिकता देते हैं क्योकि वहां जीवन पृथ्वी से सरल है। दूसरा कानूनी रूप से यह अनिवार्य है कि उसे अपना सारा डाटा बैंक और मेमोरी मालिक से शेयर करनी पड़ती है। अब हम शरीर ही नहीं मन और बुद्धि भी अपने पास गिरवी रख लेते हैं। इसलिए काम करने के लिए आदमी मिलना बहुत मुश्किल है। मेरे पास जो आदमी है वह सी साईबोर्ग प्लस श्रेणी का है। उसका कोड तो मैं आपको नहीं बता सकता क्योंकि ऐसा करने के बाद कोई भी उसकी मेमोरी को एक्सेस कर सकता है। अभी सी साईबोर्ग प्लस का एक मैसेज मेरी मेमोरी में आया है। वह मैसेज पढ़ने के लिए मुझे शून्य में जाना पड़ेगा।
थोड़ी देर में मैं फिर आता हूं।

7 thoughts on “सन 2052 का एक दिन

  1. गुड है! इस पर तो सीरीज होनी चाहिए भाई।
    आने वाले समय मे ये सब बाते एकदम सच्ची हो जाएंगी।

    जिस तरह से हम पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर रहे है उसके परिणामस्वरुप हम बूंद बूंद पानी को तरस जाएंगी।

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  2. बधाई।
    भाई, ये मेरी विगयान कथ का भी शीर्शक है। कभी मौका मिले तो ज़रूर देखें।

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  3. काल्पनिक, लेकिन भयानक और वास्तविक लगने वाला दृश्य… बेहतरीन प्रस्तुति

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