दिल्ली में आग बह रही है

दिल्ली में पिछले चार दिनों से गर्मी का तांडव चल रहा है. तापमान नापने वाले मौसम विशेषज्ञ कह रहे हैं अभी ये हालात कुछ दिनों तक और बने रहेंगे. डिग्री सेल्सियस के पैमाने पर गर्मी कितनी है यह मैंने नहीं देखा है लेकिन बदन को छूकर बहनेवाली हवा आग के थपेड़े की तरह चीर रही है.
एयरकंडीशनर की बिक्री चरम पर है. कूलरों ने काम करना बंद कर दिया है. जो बंद कमरों में है उनकी बात क्या जाने लेकिन जो खुले में हैं वे बात-बात पर लड़ाईयां कर रहे हैं. मैं 24 घंटे से अपने कमरे में कैद हूं. बाहर निकलते ही लगता है कि सब काम छोड़ दो बीमार हो गये तो काम भारी पड़ जाएगा. आज दोपहर में सड़कें सूनी हो गयी थीं. अभी भी शाम के आठ बजे औसत से आधे लोग ही सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं.
आज मुझे बम्बई की याद आ रही है. बम्बई में ऐसे मौसम में समुद्र बड़ी राहत देता है. जब तक मैं वहां था शाम का समय समुद्र के किनारों के नाम होता था. अथाह सागर के थपेड़ों में गर्मी और तनाव दोनों शांत और शिथिल पड़ जाते थे. इलाहाबाद में गंगा-यमुना का संगम गर्मी को सोख लेता था. लेकिन यहां इस शहर में ऐसी कोई राहत नहीं है.
ऐसा नहीं है कि इस शहर को नदी की नेमत नहीं मिली है. लेकिन इस शहर ने इस नेमत को नर्क में तब्दील कर दिया है. आज पहली बार आम आदमी के रूप में नदी का महत्व समझ में आ रहा है. यमुना का किनारा हम जैसे गरीब लोगों को बड़ी राहत देता लेकिन अमीरों की योजनाओं और विकास के कारण गरीब और आम आदमी को यमुना से मरहूम कर दिया है. सुना है वही लोग ग्लोबल वार्मिंग पर बहस के घोड़े दौड़ा रहे हैं जो इस गर्मी में एयरकण्डीशनर की शरण लिए हुए हैं.
हे ईश्वर, दिल्ली के नासमझों को थोड़ी बुद्धी दे. क्यों यहां के लोग अपनी ही जड़ काटने की योजनाएं बनाते और चलाते हैं. ये तो भुगतेंगे नहीं, भुगतना तो हम जैसे लोगों को पड़ता है.
आपके शहर का मिजाज अच्छा हो इसी प्रार्थना के साथ, झमाझम बारिश की प्रतीक्षा में
एक अनाम शहरी

3 thoughts on “दिल्ली में आग बह रही है

  1. इहै हाल इहां रायपुर मे है भैय्या। 44.8 चल रहा है पारा इहां।
    कल सकून मिला था हल्की बारिश से आज फ़िर वही हाल

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  2. जीहाँ सही फ़रमाया आपने दिल्ली की गर्मी प्रचंड होती जा रही है,घर से बाहर निकलना मुशकिल हो गया है,हम तो फ़िर भी एयरकंडिशनर में होते है मगर वो गरीब लोग जिनके पास सर छुपाने को छत नही क्या हाल होगा उनका?
    काश बारीश आ जाये…

    सुनीता(शानू)

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  3. वो ठेले वाला,
    जो गर्मियों में,
    लोगों को लू से बचाने के लिए,
    सबको पना पिलाता था,
    लू लगने से मर गया है,
    हिन्दी अखबार के तीसरे पन्ने पर,
    नाम कर गया है,
    हम कूलर के आगे मुँह घुसाए,
    गर्मी से लड़ रहे हैं,
    और उसी अखबार के टुकड़े पर,
    चबेना चबाते हुए,
    यह खबर पढ़ रहे हैं।

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