आखिर क्यों गोबर हुआ गुड़?

आजकल इंडिया टीवी की खूब चर्चा है. इसलिए नहीं कि वहां शांतभाव से खबर को खबर की तरह पढ़नेवाले रजत शर्मा शांतचित्त होकर बैठे हुए हैं. इसलिए भी नहीं कि उन पर यह आरोप दोबारा लग गया है कि वे संघ वालों से पैसा लेकर चैनल चलाते हैं. इस बार उन पर कोई यह आरोप भी नहीं लगा है कि शक्ति कपूर का स्टिंग कराने के पीछे उनकी मंशा साफ नहीं थी. इस बार वह चैनल आरोपों के कारण नहीं बल्कि अपने रतजगे वाले कार्यक्रमों के कारण चर्चा में है. कुछ इस स्टाईल में इंडिया टीवी अपनी लोकप्रियता बढ़ा रहा है –
जब रात के 12 बजते हैं और मीडिया वाले बच्चे अपनी मां की गोद में सो जाते हैं तब टीवी की दुनिया में एक नये शहंशाह का जन्म होता है. यह शहंशाह खुले में सड़कों पर नहीं घूमता. यह चुपके से आपके घरों में प्लास्टिक के डिब्बों के जरिए आपके जेहन पर हावी होता है. इस डिब्बे को टीवी कहते हैं और इस टीवी पर एक चैनल दिखता है- जिसका नाम है – इंडिया टीवी. दिनभर देश-दुनिया की समस्या कहने-सुनने के बाद रात के अंधेरे में आपकी उन समस्याओं से मुखातिब हो जाता है जिन्हें आप रात के अंधेरे में बंद कमरों में बैठकर अपना कोई छद्म नाम रखकर जिरह कर सकते हैं. यह आपकी जवानी की समस्याओं को सुनता है उसके तथाकथित एक्सपर्ट आपको जवाब देते हैं. यह सब कुछ इस अहोभाव से चलता है मानों सेक्स समस्या के अलावा देश में और कोई समस्या है ही नहीं. टीवी चैनल अरण्डी का तेल लगाकर दनदनाता हुआ पूरी रात आपके घर में गदा भांजता रहता है और आप अपने चैनल का रिमोट कहीं छुपा देते हैं. अगर कहीं गलती से दब गया तो अनर्थ हो जाएगा.
यह कोई पुरानी बात नहीं है. इंडिया टीवी का जब टीवी की दुनिया में पदार्पण हुआ था तब आरोपों की झड़ी लग गयी थी कि संघवाले अपना उल्लू सीधा करने के लिए रजत शर्मा के चैनल में पैसा लगा रहे हैं. इसमें कुछ भाजपा नेताओं के भी पैसा लगा होने का आरोप लगा था. आज संघ वालों से बात करिए तो वे मुंह छुपाते हैं. अगर किसी ने ऐसा कुछ पैसा वगैरह लगाया भी होगा तो अब वह कदापि अपना नाम इस चैनल के साथ नहीं जोड़ेगा.
इंडिया टीवी वाले खुश हैं, बाहर से, क्योंकि इससे चैनल की रेटिंग बढ़ी है और विज्ञापन का रेट चारगुना बढ़ गया है. चैनल में पैसा आया तो इस चैनल में काम करने वाले लोगों की तनख्वाह भी बढ़ा दी गयी है. इस चैनल के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि हाल में ही एक अमरीकी कंपनी ने इस चैनल में 26 फीसदी अंशधारिता खरीदने का ऐलान किया है. कुल मिलाकर मामला बम-बम है.
असल किस्सा यही है. हम ब्लागर्स भी तो इसी फिराक में रहते हैं कि कुछ ऐसा लिखें जो कैची हो और लोगों का ध्यान आकर्षित करे. टीवी वाले भी तो यही करते हैं. वे हमारे मन के उन सुप्त भावों पर प्रहार करते हैं जिससे हम थोड़ी देर उनके चैनल पर ठहर सकें. सेक्स, हिंसा, अपराध को नियमित देखनेवाला एक दर्शकवर्ग है. ये चैनलवाले उन्हीं की सेवा में लगे हुए हैं. अब विज्ञापन देनेवाले सोंचे कि वे किस वर्ग के लिए विज्ञापन कर रहे हैं. विज्ञापन जगत के पितामह कहेजाने वाले जॉन वानमेकर की प्रसिद्ध उक्ति है कि विज्ञापन पर खर्च होनेवाला 50 प्रतिशत पैसा बर्बाद जाता है. वह 50 प्रतिशत कौन सा है यह पता लगाना मुश्किल है. मैं बताता हूं. वह पैसा इंडिया टीवी जैसे चैनलों पर विज्ञापन के रूप में खर्च किया जाता है. जॉन साहब सुन रहे हैं न मेरी बात…

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