सदी के खलनायक हैं अमिताभ बच्चन

दिल्ली से प्रकाशित होनेवाली एक मैगजीन ने 15 जून 2007 के अंक के लिए यही कवर स्टोरी बनाई है. इस मैगजीन का नाम है – सीनियर इंडिया. मैगजीन ने 20 पेज में यह साबित करने की कोशिश की है कि अमिताभ बच्चन सदी के महानायक नहीं खलनायक हैं. पूरे 20 पेज खंगालने के बाद ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो इस बात की पुष्टि करता हो कि अमिताभ बच्चन सचमुच महानायक नहीं खलनायक हैं. स्टोरी लिखी है किसी ऋषिवंश ने. एक जगह जो कुछ इन्होंने लिखा है कि उससे यह साबित हो जाता है कि वे अमिताभ बच्चन को क्यों सदी का खलनायक मानते हैं. अपने और अमिताभ के संबंध के बारे में वे लिखते हैं कि अमिताभ ने उनके जीवन के 20 साल बर्बाद कर दिये. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने निजी सचिव विंसेट जार्ज को बुलाकर कहा था कि इन्हें अमिताभ बच्चन से मिलवा दो. ये फिल्मों में काम करना चाहते हैं. उनकी सिफारिश के बाद अमिताभ उनसे मिले भी लेकिन कभी किसी काम के लिए सिफारिश नहीं किया. अब अमिताभ का नाम जुड़ गया था इसलिए छोटे-मोटे रोल न करने का दबाव भी उनके ऊपर था. इसलिए उनके 20 साल बर्बाद हो गये.
पूरे 20 पेज में इस पत्रिका ने अपनी खीज उतारी है. पत्रकारिता के नाम पर खुन्नस उतारने की यह विधा पुरानी और एक खास तबके में प्रासंगिक रही है. यह सीनियर इंडिया पत्रिका खुद एक ऐसे आदमी के मालिकाना हक में निकलती है जिसके रियल एस्टेट में दंदफंदी के किस्से मशहूर है. इसी पत्रिका ने हाल में मोहम्मद साहब के बारे में कुछ ऐसी अशोभनीय टिप्पड़ियां की थी कि संपादक महोदय को जेल की हवा खानी पड़ी.
मुद्दा पत्रिका नहीं है. सवाल है कि क्या सचमुच अमिताभ बच्चन फिल्मी दुनिया के असली खलनायक हैं? ऋषिवंश महोदय ने कहा है कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने निजी सचिव के साथ उन्हें अमिताभ से मिलने भेजा था और विंसेट जार्ज ने पूरे परिवार से उनकी मुलाकात करवाई थी जो उस समय दिल्ली में ही रहता था. केवल अमिताभ बंबई में थे. अगर ऐसा था तो राजीव गांधी के मरने के बाद नेहरू गांधी परिवार के साथ अमिताभ के संबंधों में दरार क्यों आ गयी? अमिताभ के ही भाई अजिताभ का नाम लंबे समय तक बोफोर्स कांड में उछाला जाता था कि अजिताभ ही वे शख्स थे जो नेहरू-गांधी परिवार के सारे पैसे का नियोजन करते थे. कहा जाता है कि नेहरू गांधी परिवार के दो विश्वसनीय आर्थिक नियोजक थे. पहले कैप्टन सतीश शर्मा और दूसरे अमिताभ बच्चन. राजीव गांधी के मरने के सतीश शर्मा नेहरू-गांधी परिवार के साथ लगातार बने रहे लेकिन अमिताभ क्यों दूर हो गये? क्या सोनिया गांधी अमिताभ को इसलिए पसंद नहीं करती क्योंकि उन्हें मालूम है कि अमिताभ ही वे शख्स हैं जिसके कारण नेहरू-गांधी परिवार का सैकड़ो करोड़ रूपया डूब गया? आखिर क्या कारण है कि अमिताभ बच्चन अमर सिंह जैसे दोयम दर्जे के नेता के इशारों पर नाच रहे हैं?
अमर सिंह से अमिताभ की मुलाकात का किस्सा बहुत कम लोगों को मालूम होगा. अमर सिंह अपनी प्रांसगिकता तलाशने के लिए राजनीतिज्ञों के आगे-पीछे घूमा करते थे. उन्हीं दिनों की बात है. चंद्रशेखर प्रधानमंत्री थे. दिल्ली के फिक्की आडिटोरियम में एक कार्यक्रम था जहां अमर सिंह चंद्रशेखर के आगे-पीछे घूम रहे थे. बातचीत में किसी ने कहा कि हरिवंश बाबू की तबियत ठीक नहीं है. हरिवंश बाबू यानि अमिताभ बच्चन के बाबूजी. चंद्रशेखर उनका सम्मान करते थे. उन्होंने तुरंत कहा कि पता करो उनको देखने चलते हैं. यह बातचीत अमर सिंह ने सुनी और अपने से पता करने बंबई चले गये और अमिताभ को यह दिखाया कि उन्हें चंद्रशेखर जी ने भेजा है. उसी हफ्ते चंद्रशेखर बंबई गये भी. उस दौरान अमर सिंह वहां मौजूद थे. अमिताभ को भ्रम था कि ये महाशय चंद्रशेखर के आदमी हैं और चंद्रशेखर को भ्रम था कि ये अमिताभ के करीबी लगते हैं. यहां से अमिताभ और अमर सिंह के संबंधों की शुरूआत होती है. हालांकि एक बात आप लोगों को बता दूं कि चंद्रशेखर कभी अमर सिंह को पसंद नहीं करते.
अमिताभ से जुड़े सवालों पर पत्रिका ईमानदारी से जांच करती और तथ्यात्मक रूप से कुछ जानकारी लोगों के सामने रखती तो जनता शायद ज्यादा ईमानदारी से नायक या खलनायक का निर्णय कर सकती थी.
यह बात किसी से शायद ही छिपी हो कि अमिताभ का फिल्मी दुनिया में पदार्पण योग्यता के बल पर नहीं बल्कि सिफारिश से हुआ था. तेजी बच्चन (अमिताभ की मां) की चापलूसी से तंग आकर एक दिन नेहरू ने अपने निजी सचिव मथाई से कहा कि हरिवंशराय को कोई जगह देकर इन मोहतरमा से मेरा पीछा छुड़ाओ. यहां से संबंधो की शुरूआत होती है जिसका फायदा अमिताभ को भी होता है. इनकी पहली फिल्म सात हिन्दुस्तानी के लिए इंदिरा गांधी ने ख्वाजा अहमद अब्बास को पत्र लिखा था. लेकिन अमिताभ सफल हुए तो उन्होने यह कहते हुए ख्वाजा साहब के साथ काम करने से मना कर दिया कि अब आप हमारी फीस नहीं दे सकते.
बहरहाल, अमिताभ के जीवन के कई पहलू ऐसे हैं जो स्याह और अंधेरे में दफ्न हैं. उनको महानायक माननेवाले लोगों की अमिताभ के प्रति अपनी श्रद्धा है. लेकिन अमिताभ के कर्मों पर सफाई से लेखन हो तो अमिताभ और उनके भक्तों की श्रद्धा दोनों पर सवालिया निशान खड़ा हो जाएगा.

4 thoughts on “सदी के खलनायक हैं अमिताभ बच्चन

  1. अच्छी जानकारी लाए।

    वैसे अमिताभ को जब महानायक कहा जाता है तो अभिनय और व्यावसायिक सफलया के लिहाज से न कि उनके चरित्र के लिहाज से।

    और फिर दुनिया में कौन से इंसान का चरित्र पूरी तरह बेदाग है?

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  2. अमिताभ अच्छे अभिनेता हैं किन्तु इन्सान हैं, देवता नहीं।

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  3. भाइ हम तो लेखक के साथ है,काहे ना हमे शादी मे बुलाया ना अपनी ना बिटवा की,और हम भी हीरो बन जाते अगर जे हमाये लिये भी जरा दो चार पिच्चर विच्चर बना देते

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  4. कहा जाता है कि हर रोशनी के पीछे अन्धेरा होता है। इसका कोइ अपवाद नहि है। य़हां मुद्दा यह है कि कोइ अमिताभ को खलनायक क्यों कहे। सिर्फ़ इसलिये कि किसी ने उसका काम नही किया ? क्या यह उचित है?

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