पोलियो का टीका या "बायो-वार"

डॉ ओंकार मित्तल पढ़ाई लिखाई से डाक्टर हैं लेकिन प्रैक्टिस नहीं करते. कंधे पर एक बैग लटकाये वे दिनभर लोगों से मिलते हैं और उनका कहना है कि नीतिगत स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों के बारे में जो कुछ हो रहा है इस बारे में लोगों को जागरूक करना ही उनकी प्रैक्टिस है. उनका कहना है कि स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर धोखा-धड़ी होती है, और बड़ी दवा कंपनियां आदमी को गिनीपिग की तरह इस्तेमाल करती हैं. 14-15 सालों तक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में काम करने के बाद आजकल वे पल्स पोलियो अभियान के खिलाफ अभियान चला रहे हैं.

कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के कुछ मुस्लिम संगठनों ने अपने बच्चों को पोलियो ड्राप्स पिलाने से मना कर दिया था. डॉ. मित्तल से जब पूछा कि क्या इस बात में कोई सच्चाई है तो उन्होंने जवाब में उन्होंने जो कुछ कहा उससे सिहर जाना लाजिमी है. डॉक्टर मित्तल का कहना है कि पहली पोलियो का वायरस किसी भी लैबोरेटरी में पैदा किया जा सकता है. जब आप इस जानकारी के साथ पूरे अभियान को देखेंगे तो आपको जरूर शक होगा कि क्या पोलियो टीकाकरण के नाम पर देश में अघोषित बायोवार चल रहा है? यह राष्ट्रविरोधी षण्यंत्र है. जिसमें विश्व स्वास्थ संगठन और सीडीसी मिलकर काम कर रही हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन को हम जानते हैं लेकिन यह सीडीसी क्या है? बकौल डॉक्टर मित्तल अटलांटा, अमेरिका स्थित सीडीसी (सेंटर फॉर डिजीज कन्ट्रोल) कम्युनिकेबल डिजीज की रोकथाम के लिए अमरीका की राष्ट्रीय संस्था है. और फिलहाल भारत में चल रहे सारे पल्स पोलियो टीकाकरण की नोडल एजेंसी है.

डाक्टर मित्तल कहते हैं कि चार प्रमुख बिन्दु हैं जिससे इस पूरे अभियान पर अंगुली उठाई जा सकती है-
1. पल्स पोलियो अभियान चलाते दस साल हो गये फिर भी सबसे अधिक प्रभावित उत्तर प्रदेश और बिहार में पोलियो के मामले बढ़ रहे हैं.
2. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मान लिया है कि पहले जो टीका दिया गया (T-opv) वह प्रभावी नहीं था. इसलिए अब जो टीका दिया जा रहा है (m-opv-1 and m-opv-3) वह प्रभावी है. यह जानते हुए भी यह टीका प्रभावी नहीं है क्यों दिया गया?
3. विदेशी संस्थाओं ने टीकाकरण अभियान को पूरी तरह से अपने हाथ में क्यों रखा हुआ है. जबिक भारतीय नेशनल इंस्टीट्यूट आफ कम्युनिकेबल डिजीज (NICD) जैसी संस्थाओं को पूरी तरह किनारे कर दिया गया है.
4. दस सालों में एक भी बार संसद में इसकी चर्चा क्यों नहीं हुई. इसको पूरी तरह निर्माण भवन के नौकरशाहों के भरोसे क्यों छोड़ दिया गया है.

वैसे डॉक्टर मित्तल का कहना है कि हम एक बायो-वार में फंस गये हैं. बायो-वार क्या है यह अब किसी से छुपा नहीं है. युद्ध का भविष्य बायो-वार है जो कि परमाणु युद्ध से भी ज्यादा घातक है. अमरीकी बायो-वार रणनीति विभाग में वैज्ञानिक के रूप में काम कर रहे डी ए हेंडरसन ने डॉ. मित्तल को लिखा है कि आप इसमें किसी तरह का षण्यंत्र न देखें, यह जनहित में चलाया जा रहा है. लेकिन डॉक्टर मित्तल हेंडरसन की बात मानने के लिए तैयार नहीं है.

डॉक्टर ओंकार मित्तल दिल्ली में रहते हैं और आपको पूरी जानकारी चाहिए तो खुद डाक्टर मित्तल को ई-मेल कर सकते हैं- o_mittal@rediffmail.com बात करना चाहें तो उनका नम्बर है- 09818110784.

2 thoughts on “पोलियो का टीका या "बायो-वार"

  1. संजय भाई ! यह अंदेशा तो मुझे बहुत दिनों से था. अच्छा हुआ जो आपने डाक्टर मित्तल का हवाला देकर असल बात को ज्यादा प्रभावी ढंग से सामने रखा. रही बात संसद की तो उसकी सच्चाई तो जगजाहिर है.

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  2. में मित्तल साहब की योगयता तो नहीं जानता, मगर यह सब बकवास है। निराधार। यह हमारे देश में विफल रहा है, उस के अलग कारण हैं, मगर वॉर जैसी बात करना लोगों को गुमराह करना है।
    विपुल
    pediatrician

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