घणी खम्मा रानी सा

सोचने का यह तरीका थोड़ा अटपटा लग सकता है लेकिन राष्ट्रपति चुनाव कौन जीता है? प्रतिभा पाटिल या प्रतिभा शेखावत? 25 को जब राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण होगा तो कौन शपथ लेगा? प्रतिभा पाटिल या प्रतिभा शेखावत? जिस रजिस्टर (गजेटियर) पर हस्ताक्षर करने के बाद हमें अपने पहले नागरिक का नाम मिल जाएगा वह कौन होगा? प्रतिभा पाटिल या प्रतिभा शेखावत?

जाति और नस्ल को भेदभाव के खांचे में नापनेवाले इस पर क्या कहेंगे? अब तो समाचार-विचार जगत का हर आदमी जानता ही है कि प्रतिभा पाटिल का विवाह जिनके साथ हुआ है उनका नाम है देवी सिंह शेखावत. और जब वे राष्ट्रपति की उम्मीदवार घोषित हुईं तो अपने ससुराल में राज्यपाल का पद सुशोभित कर रही थीं. लेकिन कभी भी उन्होंने अपने पति की जाति (जो हिन्दू विवाह पद्धति के अनुसार अपनेआप प्राप्त होती है) का उपयोग नहीं किया. कुल, वर्ण से भी परहेज ही किया होगा. और जुड़ाव इसी से पता चलता है कि ससुराल से ज्यादा ढोल-ताशे मायके में बजे. तो क्या यह मराठी अस्मिता है या एक नारी की स्वघोषित क्रांति जिसका स्वागत करना चाहिए. या फिर परिवार व्यवस्था की दुहाई देनेवालों के लिए विवाद का एक नया मुद्दा कि वे शेखावत हैं या पाटिल.

लगता है प्रतिभा शेखावत वैसे ही नहीं है जैसे प्रियंका बढ़ेरा न होकर गांधी हैं. अगर ऐसा है तो लोकतंत्र और नये समाज के पैरोकारों को अपने सोचने के नजरिए पर पुनर्विचार करना होगा. जाति व्यवस्था को राजनीतिक लाभ-हानि से जोड़कर देखने की आदत डालनी होगी. यह तब और जरूरी होगा जब देश के सर्वोच्च पदों के लिए जातीय और क्षेत्रीय पहचान को आधार बनाया जाए. इस राष्ट्रपति चुनाव में साफ हो गया कि हमारी क्षेत्रीय अस्मिता हमारी राष्ट्रीय पहचान पर भारी है. वैसे ही जैसे धर्म पर संस्कृति का वर्चस्व है. देश को 15 अगस्त और 26 जनवरी के राष्ट्रीय पर्वों की घुट्टी पिलानेवाले इसके निहितार्थ समझने की कोशिश करेंगे?

कुछ दिन पहले एक “महान” ज्योतिषी लक्ष्मणदास मदान ने कहा था कि भैरो सिंह शेखावत ही अगले राष्ट्रपति होंगे. हो सकता है इस बहस से उन्हें यह तर्क मिल जाए कि राष्ट्रपति तो शेखावत ही हुआ है अब वह प्रतिभा हो या भैरोसिंह इससे क्या फर्क पड़ता है. क्या ऐसा सोचने से सचमुच कोई फर्क नहीं पड़ता?

मैं तो परिवार व्यवस्था का समर्थक हूं. इसलिए पूरी मर्यादा में रहते हुए यही कहूंगा-
घणी खम्मा रानी सा
…………पधारो

3 thoughts on “घणी खम्मा रानी सा

  1. हमारा समाचार भी दिया जाये:

    घणी खम्मा रानी सा
    …………पधारो

    🙂

    और अब तो पधार ही गई हैं तो पधारने का साधुवाद भी लगे हाथों दे देते हैं. 🙂

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  2. यूं तो इस शर्मनाक हादसे (प्रतिभा पाटिल के राष्ट्रपति होने) पर सोचना गुनाह है और मैं यह भी नहीं मानता कि स्त्री के पति का कुलनाम लगाना जरुरी है. फिर भी इनके मुद्दे पर मैं एक ही बात कहूँगा
    रात को पी सुबह तौबा कर ली
    रिंद के रिंद रहे हाथ से जन्नत न गई.

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  3. राहत तलाशने का एक ही रास्‍ता है कि इसे यूं देखा जाए कि विवाह के बाद भी स्‍त्री अपनी वैयक्तिता को बचाए और बनाए रखने के लिए अपने पति के कुल नाम से परहेज करे । खोट में खूबी देखने के लिहाज से प्रतिभा के पाटील बने रहने पर ही खुश हो लें ।

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