बजरंगलाल छत्तीसगढ़वाले

बजरंगलाल दो साल से दिल्ली में ही रहते हैं. हालांकि उन्होंने अब वानप्रस्थ ले लिया है इसलिए उनका नया नाम बजरंगमुनि है फिर भी मैं उन्हें बजरंगलाल ही कहता हूं और उनको इस पर कोई ऐतराज नहीं होता. अब वे दिल्ली रहकर ही लोक स्वराज्य मंच के काम को आगे बढ़ाना चाहते हैं. लगभग दो सालों से मैं उनके संपर्क में हूं. तब वे दिल्ली एक संगोष्ठी में बोलने आये थे. अब उनसे लगातार संपर्क रहता है. देश की राजनीति में आमूल परिवर्तन के लिए वे दो बड़े काम कर रहे हैं. इनमें से एक है लोक स्वराज्य मंच और दूसरा है व्यवस्था परिवर्तन अभियान.

उनके काम के बारे में जानने से पहले थोड़ा उनके खुद के बारे में जनना जरूरी है. मूलतः छत्तीसगढ़ के रहनेवाले बजरंगलाल वहां अंबिकापुर में सबसे कम उम्र के महापौर चुने गये. मात्र 16 साल की उम्र में. दो साल तक उन्होंने पदभार इसलिए नहीं संभाला क्योंकि संवैधानिक पद संभालने के लिए कम से कम नागरिक होना होना जरूरी है और नागरिकता 18 साल की उम्र के बाद ही मिलती है. बजरंगलाल ने अंबिकापुर में कई प्रयोग किये. उन्होंने लगभग 15 सालों तक देश की समस्याओं का अध्ययन किया. इस अध्ययन से जो परिणाम निकला 1999 से उसे ही लेकर अब वे देशभर में घूमते हैं. उन्हीं निष्कर्षों पर बोलते हैं लोगो को तैयार करते हैं कि अब सत्ता परिवर्तन की जगह देश में व्यवस्था परिवर्तन की बात होनी चाहिए.

लोकतंत्र के साठ साल बाद देश के सामने ग्यारह समस्याएं हैं-

1, चोरी-डकैती-लूट, 2. बलात्कार, 3. कमतौल, 4. जालसाजी-धोखाधड़ी, 5. हिंसा और आतंक, 6. भ्रष्टाचार, 7. सांप्रदायिकता, 8. चरित्र पतन, 9. जातीय कटुता 10. आर्थिक असमानता, 11. श्रम का शोषण.

वे कहते हैं कि देश में जितनी भी समस्याएं हैं वे इन्ही ग्यारह समस्याओं में समाहित हैं. और बातचीत में यह साबित कर देते हैं कि कोई भी समस्या हो उसके मूल में कैसे यही ग्यारह समस्याएं हैं. उनका कहना होता है कि आज किसी भी राजननीतिक दल के पास इन ग्यारह समस्याओं को समाप्त करने की इच्छाशक्ति शेष नहीं बची है. ऐसा क्यों हैं? वे कहते हैं कि सभी राजनीतिक दल आठ आधारों पर बंटे हुए हैं. वे आठ आधार हैं-

1. धर्म, 2. जाति, 3. भाषा, 4. क्षेत्रीयता, 5. उम्र, 6. लिंग 7. अमीर-गरीब और 8. उत्पादक-उपभोक्ता.

बजरंगलाल कहते हैं कि राजनीतिक दल इन्हीं आठ आधारों पर वर्ग निर्माण, वर्ग विद्वेष और वर्ग संघर्ष के विस्तार में लगे हुए हैं और वास्तविक समस्या की ओर ध्यान नहीं जाने देते.

उनका कहना है आज देश के विकास की बात की जाती है तो यह भुला दिया जाता है कि देश में आज भी 26 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी नियमित आमदनी 13 रूपये से भी कम है. देश में श्रम का शोषण लगातार बढ़ता जा रहा है. और राजनीति पूरी तरह से बेलगाम हो गयी है जिसके कारण पूंजीवादी ताकते लगातार मजबूत होती जा रही हैं. समाज का नियंत्रण राजनीति पर खत्म हो गया है उल्टे समाज राजनीति की पिछलग्गू हो गयी है.

लोक स्वराज्य की अपनी अवधारणा को बताते हुए वे कहते हैं – ” लोक स्वराज्य का अर्थ है लोकनियंत्रित तंत्र. इसका मतलब है ऐसी व्यवस्था जहां समाज का राजनेता और राजनीति दोनों पर अंकुश हो. साथ ही संसद की भूमिका केवल मैनेजर की होनी चाहिए वह मालिक होने की गलतफहमी न पाले. परिवार, गांव, जिले से लेकर राज्य तक की ईकाईयों के अपने आंतिरक मामलों में निर्णय लेने की पूरी आजादी हो. सरकार के पास सिर्फ वे ही विभाग हों जो अन्य इकाईयां न कर सकें.”

6 thoughts on “बजरंगलाल छत्तीसगढ़वाले

  1. जहां तक मैं उन्हें जानता हूं वे आर्यसमाज से जुड़े हुए हैं. आप यह क्यों पूछ रहे हैं, कोई विशेष प्रयोजन?

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  2. चाहे वे शाखा जायें या पेड पर चढे भईया हमें तो बजंरंगलाल जी के संबंध में पढकर अच्‍छा लगा यह जानकर नहीं कि वे छत्‍तीसगढ के हैं बल्कि यह जानकर वे जनता के लिए सोंच रहें हैं ।

    धन्‍यवाद भईया जानकारी देने के लिए

    पढें नारी पर विशेष एवं अपनी टिप्‍पणी देवें ‘आरंभ’ पर

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  3. धन्यवाद बजरंग लाल जी के विषय में और उनके प्रयोजनों की जानकारी देने के लिये. अच्छा लगा पढ़कर.

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  4. बजरंग लाल जी को मैं नमन करता हूं,जो उनकी विवेचना है मूलभूत समस्याओ के प्रति जो समाज को अराजक बनाये हुए हैं
    लोकतंत्र के साठ साल बाद देश के सामने ग्यारह समस्याएं…
    1, चोरी-डकैती-लूट, 2. बलात्कार, 3. कमतौल, 4. जालसाजी-धोखाधड़ी, 5. हिंसा और आतंक, 6. भ्रष्टाचार, 7. सांप्रदायिकता, 8. चरित्र पतन, 9. जातीय कटुता 10. आर्थिक असमानता, 11. श्रम का शोषण.

    व इनके सुधार के बाधक….
    1. धर्म, 2. जाति, 3. भाषा, 4. क्षेत्रीयता, 5. उम्र, 6. लिंग 7. अमीर-गरीब और 8. उत्पादक-उपभोक्ता.

    यह मुझे पूर्ण तर्क संगत प्रतीत हो रहें है!

    सरकार यदि अपनी बनिये की दुकान बन्द कर व्यवस्था को ठीक करे तो देश निश्चै ही प्रगती की ओर शीघ्र अग्रसर होगा!
    ईश्वर बजरंगलाल जी के सपनों को जल्द साकार करे व राश्ट्र का उत्थान हो, इसमे आप का योगदान सराहनीय है!

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  5. शुक्रिया बजरंगलाल जी के बारे मे जानकारी देने के लिए!
    उनकी यह सोच काबिले तारीफ़ है कि अब देश मे सत्ता परि्वर्तन की बजाय व्यवस्था परिवर्तन होना चाहिए!

    और इसके लिए कोशिश हमें ही करनी होगी!!

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