एक अकेला अशोक मल्होत्रा

किसी सीबीआई नामक संस्थान ने किसी गुप्त व्यक्ति की शिकायत पर किसी अशोक मल्होत्रा के घर पर छापा मारा. इस किसी-किसी नाट्यशास्त्र के मुख्यपात्र अशोक मल्होत्रा के बारे में रिपोर्टरों ने जो जानकारी जुटाई है वह यह कि वह मुखर्जी नगर में रहता है. क्योंकि वह मुखर्जी नगर में रहता है इसलिए छापा भी वहीं पड़ा. उस छापे में सीबीआई को पता चला कि उसके पास 5500 प्लाट्स के कागजात धरे पड़े हैं. उसके गैरेज में 50 गाड़ियां खड़ी-पड़ी हैं. पत्रकारों को भी यह सब बताया गया. लेकिन पत्रकारों ने खबर चलायी वह यह कि उसकी गाड़ियों के नंबर वीआईपी हैं. चैनलवालों ने जो तस्वीर दिखाई उसमें केवल नंबर प्लेटों पर खुदे वीआईपी नंबर चमक रहे थे. 0007, 0001, 1000 इत्यादि. यानि कि चैनलवालों को यही आश्चर्य है कि 50 वीआईपी नंबर जुगाड़ करने में मल्होत्रा कैसे कामयाब रहा.

लेकिन हम थोड़ा अशोक मल्होत्रा के बारे में भी जान लेते हैं. अशोक मल्होत्रा पहले (कोई 15-16 साल पहले) आटो ड्राईवर था. किस्मत ने पल्टी मारी और 1993 में एक भाजपाई नेता के कंधे पर बैठ घुस गया विधानसभा में. केन्टीन का ठेकेदार बन गया. मंत्रियों और अधिकारियों को चाय-पकौड़े खिलाए . और इस चाय-पकौड़े की आवभगत में अपने लिए मलाई का इंतजाम कर लिया. रास्ता भी ऐसा निकाला कि अच्छे-अच्छे शोभराज पानी मांगे. पिछले दस-बारह सालों में दिल्ली सरकार ने कुछ अदालत के दबाव में और कुछ बिल्डरों के प्रभाव में दिल्ली को झुग्गीमुक्त करने का अभियान चला रखा है. झुग्गी बस्तियों को उजाड़ते हैं तो किसी दूर-दराज की जगह पर ऐसे झुग्गीवालों को 25 गज का प्लाट मिल जाता है. अशोक मल्होत्रा ने इस प्रक्रिया में अपनी दाल-रोटी का जुगाड़ कर लिया.

उसने फर्जी झुग्गीवासियों के राशन कार्ड बनवाये. उस राशनकार्ड के बूते साबित किया कि अमुक व्यक्ति इतने सालों से झुग्गी बस्ती में रह रहा है. इसलिए जब दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इन झुग्गीवालों को प्लाट आवंटित किये तो उस प्लाट पर झुग्गीवाले की जगह अशोक मल्होत्रा का कब्जा हो गया. झुग्गीवाला इसी में खुश कि मल्होत्रा साहब ने उसको कुछ पैसे दे दिये. अब यह 25-25 गज का चार-पाच प्लाट मिला तो 100-150 गज का प्लाट तैयार हो गया. यह प्लाट अब रियल स्टेट का विषय हो गया इसलिए इसकी कीमत भी बाजार के हिसाब से तय हुई. इसे पूरे काम में अशोक मल्होत्रा ने डीडीए की मदद ली. जहां कहीं कोई दिक्कत आई, डीडीए के दक्ष अधिकारियों ने उसको अपनी कुशलता से दूर कर दिया.

तो इस तरह एक कारोबार खड़ा हो गया. झुग्गीवाले फिर कहीं और झुग्गी बनाने की जुगत में लग गये और अशोक मल्होत्रा नये झुग्गीवालों का राशनकार्ड बनवाने में लग गया. दिल्ली विकास प्राधिकरण(डीडीए) नई जमीन की तलाश में कि कल जब झुग्गीवाले उजाड़े जाएं तो उन्हें जमीन दी जाए और इस लेन-देन में अशोक मल्होत्रा और खुद को मालामाल किया जाए. यह सब खेल चलता रहता अगर हाईकोर्ट में एक शिकायत न आती. किसी अनाम व्यक्ति ने हाईकोर्ट को शिकायत की कि झुग्गी वालों को जमीन देने के नाम पर इस तरह की धोखाधड़ी की जा रही है. हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह इस बात की जांच करे. सीबीआई ने जांच की तो गड़बड़ी भी पकड़ में आई और अशोक मल्होत्रा भी. लेकिन क्या किस्सा यहीं खत्म हो जाता है?

अब किसी को ऐतराज हो तो हो. किसी की आंखें फटी रह जाएं तो रह जाएं लेकिन अशोक मल्होत्रा मुझे कहीं से दोषी नजर नहीं आता. उसने ऐसा कुछ नहीं किया है जिसे अपराध कहा जाए. अगर अशोक मल्होत्रा अपराधी है तो इस लिस्ट में कई बड़े नामों को भी शामिल करना होगा. विश्व की भ्रष्टतम संस्थाओं में से एक डीडीए के अधिकारियों की भी छानबीन करनी होगी? जरूरी हुआ तो उन मंत्रियों और अधिकारियों को भी लपेटना होगा जो दिल्ली का कतरा-कतरा बेचने में लगे हुए हैं. अगर मल्होत्रा दोषी है तो वे लोग भी दोषी हैं टुकड़ों में काट-काट कर यमुना नदी को खाने में लगे हैं. इसमें बड़े नामी-गिरामी बिल्डरों से लेकर दिल्ली मेट्रो के श्रीधरन तक सभी शामिल हैं. अगर मल्होत्रा दोषी है तो डीएलएफ और यूनिटेक भी दोषी हैं जिन्होंने कौड़ियों के मोल खरीदी गयी जमीन को करोड़ों का रियल-एस्टेट बना दिया. अगर मल्होत्रा दोषी है तो रिलांयस के मुकेश अंबानी से भी सवाल किया जाना चाहिए कि झज्जर और गुड़गांव की उपजाऊ जमीन बंजर कैसे हो गयी जिसे उन्होने औने-पौने दाम में खरीदा है.

मैं जानता हूं कोई यह सवाल नहीं करेगा. रिलांयस, डीएलएफ, पार्श्वनाथ बिल्डर या यूनिटेक जमीन की धोखाधड़ी करें तो वह व्यवसाय है और उनके इस व्यवसाय को स्थापित करने में सरकार, अदालतें सब मदद करती हैं. लेकिन अशोक मल्होत्रा हमारे सामने अपराधी की तरह प्रस्तुत किया जाता है. यह बात छिपा ली जाती है कि अशोक मल्होत्रा ने एक लूप-होल का उपयोग किया है, इसी लूप होल वाली व्यवस्था से अशोक मल्होत्रा और अंबानी दोनों पैदा होते हैं. एक सम्मानित व्यवसायी और देश का आदर्श बन जाता है दूसरे को हम अपराधी करार दे देते हैं.

4 thoughts on “एक अकेला अशोक मल्होत्रा

  1. बहुत सही और सटीक ।हम आप से पूर्णतः सहमत है।

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  2. अशोक मल्‍होत्रा के बारे में ये सारी जानकारियॉं तो सचमुच में ‘एक्‍सक्‍लूसिव’ हैं । आपने साबित कर दिया है कि मल्‍होत्रा तो शुरु की एक कडी मात्र है, कडी को जंजीर बनाने वाले तो कोई और ही हैं । आप ठीक कहते हैं – अशोक मल्‍होत्रा दोषी नहीं है ।

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  3. “अशोक मल्होत्रा ने एक लूप-होल का उपयोग किया है, इसी लूप होल वाली व्यवस्था से अशोक मल्होत्रा और अंबानी दोनों पैदा होते हैं. एक सम्मानित व्यवसायी और देश का आदर्श बन जाता है दूसरे को हम अपराधी करार दे देते हैं.”

    पूर्ण स‌हमतः, और क्या कहें।

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