विकास की एक समझ ऐसी भी

साठ साला जश्न में अखबार भी तरह-तरह से प्रस्तुतियां कर रहे हैं. आईआईटी की एक रिसर्च स्कालर आदिती माहेश्वरी से यह बातचीत नवभारत टाईम्स में छपा है. पढ़कर हंसी भी आती है और रोना भी. अदिती कोई बच्ची नहीं है. वह रिसर्च स्कालर है और वह भी भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी की. कल को वह अपना रिसर्च पूरा कर कहीं कंपनी में नौकरी करेगी और अपनी इसी समझ से देश को विकसित करेगी. आईआईटी क्या समझ विकसित करता है, नमूना देखिये-

“आज से 60 साल बाद हमारे देश में विज्ञान के क्षेत्र में पश्चिमी देशों के मुकाबले ज्यादा विकास नहीं हो सकेगा. लेकिन फिर भी हम आज के जमाने से काफी आगे होंगे. कैंसर और एड्स जैसे रोगों पर हम काबू पा चुके होंगे. दवाईयों में नैनो-मेडिसीन का प्रयोग होने लगेगा और उस समय मानव क्लोनिंग बहुत बढ़ जाएगी और वह एक आम बात हो जाएगी. जहां बी मैनपावर की जरूरत होगी हम आदमी क्लोन करवा लेंगे. या फिर अपने हिस्से का काम लोग अपने क्लोन से करवाएंगे. सारी मशीनें बिना किसी ड्राईवर के अपने-आप सड़क पर चलेंगी. टीवी,फ्रीज, वाशिंग मशीन आदि में ऐसे सेंसर लगें होंगे कि जरूरत होने पर वे अपने-आप चलेंगे. गाड़ियों की स्पीड काफी बढ़ जाएगी क्योंकि उनमें कंम्प्यूटर लगा होगा.

तब तक हमारे देश में हर घर में कम्प्यूटर लगा होगा. कम्प्यूटर का आकार भी घटकर हथेली के बराबर हो जाएगा. तब तक हमारी स्पेश रिसर्च भी काफी हद तक आगे बढ़ चुकी होगी. तब तक लोग चांद के साथ मंगल पर पहुंच चुके होंगे. डिफेंस क्षेत्र में तब काफी आधुनिक हथियार आ चुके होंगे. भारत अपना आटोमेटिक मिसाईल प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित कर लेगा. हम आज के न्यूक्लियर बम से कहीं अधिक ताकतवर हाईड्रोजन और न्यूट्रान बम विकसित कर चुके होंगे.

तब हमारे देश में भोजन की कमी नहीं रहेगी. क्योंकि तब हाईब्रिड पौधे उगाये जाने लगेंगे. वे पौधे आज की तरह प्राकृतिक नहीं होंगे लेकिन पौष्टिकता में कहीं बेहतर होंगे. तब तक लोग प्रोसेस्ड फूड इस्तेमाल करेंगे. हर प्रकार का पका पकाया भोजन पैकेट में बिल्कुल फ्रेश मिलेगा. ग्लोबल वार्मिंग काफी बढ़ जाएगी. लेकिन तब तक सभी घरों में एसी लग चुका होगा. ग्लोबल वार्मिंग के कारण गोवा, मुंबई और लक्षद्वीप जैसे कई इलाके समुद्र में डूब जाएंगे. प्राकृतिक आपदाएं बढ़ जाएंगी लेकिन उनका पूर्वानुमान भी लगाया जा सकेगा.

60 साल बाद हमारे देश में ई-गवर्नेंस पूरी तरह लागू हो चुका होगा लेकिन तब तक ई-हैंकिंग जैसी घटनाएं भी बहुत आम हो जाएंगी. “

4 thoughts on “विकास की एक समझ ऐसी भी

  1. अदिति जी कि यह बात कल्पनाशीलता का एक अच्छा उदाहरण है। मैं नही कहता (और मुझे सच मे विश्वास नही होता) कि साथ सालों मे इतना परिवर्तन संभव है। लेकिन स्वप्न के साथ ही शुरुआत होती है।

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  2. अदिति जी से कहें कि भोजन की कमी तो आज भी नहीं है और हाइब्रिड बीजों वाले भी अब उससे तौबा कर रहे हैं।

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  3. अभी तो इसे कल्पना की उड़ान ही मान लेते हैं, थोड़ी तसल्ली रहेगी.

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  4. देश मे दी जा रही कथिर तकनीकी शिक्षा की यही असलियत है जिससे इस तरह के उत्पादित शोधकर्ता निकल रहे है. ये तो खुद ही हाईब्रिड है. साठ साल बाद तो जो होगे सो अलग ही होगे

    अतुल

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