कितने मीरजाफर

आजादी के साठ साला जश्न में हम यह भूले नहीं होंगे कि गुलामी किस रास्ते आयी थी. उस साल के भी 250 साल पूरे हुए हैं जब देश में ब्रिटिश कंपनीराज को स्थाई आधार मिला था.

प्लासी का मैदान. वर्तमान मुर्शिदाबाद के पास एक अनजान सी जगह. 23 जून 1757 को राबर्ट क्लाईव और सिराजुद्दौला के बीच एक संक्षिप्त युद्ध होता है. सिराजुद्दौला के पास 50 हजार सैनिक थे. तोपें और अन्य आधुनिक हथियार भी. उधर क्लाईव के पास 21 सौ भारतीय और लगभग इतने ही ब्रिटिश सैनिक थे. फिर युद्ध में सिराजुद्दौला हार जाता है और भारत में कंपनीराज की विधिवत शुरूआत हो जाती है. सिराजुद्दौला क्यों हार जाता है?

क्योंकि सिराजुद्दौला का सेनापति मीरजाफर 16000 की सेना लेकर राबर्ट क्लाईव से जा मिलता है. ऐन युद्ध के मौके पर. बीच मैदान में. और सुबह सात बजे शुरू हुआ युद्ध दिनभर भी नहीं चल पाता. दोपहर 2 बजे तक सिराजुद्दौला हार स्वीकार कर लेता है.

ढाई सौ साल बाद आजादी का जश्न मनानेवाले मतवालों को इस बात का स्मरण रखना चाहिए? तब जबकि नये सिरे से कंपनीराज की स्थापना हो रही है. इस कंपनीराज को स्थापित करनेवाले आज के मीरजाफर कौन हैं? ऐसे ही कुछ मीरजाफरों की पहचान कर उन्हें पुरस्कृत किया दलाल फाउण्डेशन ने. फोटो देखिए कुछ चेहरे आपको पहचान में आ जाएंगे.

मीरजाफर का सर्वोत्तम पुरस्कार दिया गया मोंटेक सिंह अहलूवालिया को. योजना आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर उनके द्वारा जो काम किये जा रहे हैं उससे कंपनीराज की विधिवत स्थापना देश में हो रही है. इसके अलावा जिन लोगों को मीरजाफर पुरस्कार से सम्मानित(अपमानित अगर उन्हें समझ में आये तो) किया गया उनमें प्रमुख हैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रिलांयस के मुखिया मुकेश अंबानी, टाटा के मुखिया रतन टाटा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और कुछ प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी शामिल हैं. दलाल फाउण्डेशन ने इन सबको अमरीकी झंडेवाला एक स्मृतिचिन्ह दिया क्योंकि भारत रहनेवाले ये लोग असल में अमरीकी साम्राज्यवाद को बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं. इस साल प्लासी युद्ध के 250 साल पूरे होने पर इस पुरस्कार की शुरूआत की गयी है. अब हर साल नियमित रूप से इसे दिया जाएगा. हर साल नये मीरजाफरों की खोज होगी और देश को विदेशियों के हाथ गिरवी रखने के लिए किये जा रहे उनके कार्य को सम्मानित किया जाएगा.

3 thoughts on “कितने मीरजाफर

  1. अपनी अपनी समझ, अपना अपना काम।
    जैसा करेगा जोगी, पाएगा अन्जाम।

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  2. Philosophers have said, “you cannot cross the same river twice” but does that mean the river loses its identity. Battle of Plassey and defeat of Nawab Sirajuddaula led to the establishment of British empire in June 1757 ,it has huge significance both in the Indian history and in the history of the world. It must be remembered that it was also the battle between the British and the French. mediavigil.blogspot.com

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