अतिक्रमण कौन कर रहा है?

यहां कुछ चित्र दे रहा हूं. कल लखनऊ में रिलांयस फ्रेश और स्पेंशर्स स्टोर के खिलाफ प्रदर्शनकारियों की तस्वीर है. पुलिस ने उनके साथ जो सलूक किया वह कई सवाल पैदा करता है. सरकार किसके लिए है? उद्योगपतियों के लिए या फिर आम आदमी के लिए? अगर आम आदमी और उद्योगपतियों के हित टकराएं तो सरकार को किसका साथ देना चाहिए? रिटेल मार्केट और मंडी व्यवस्था में बड़ी कंपनियों को घुसपैठ का निमंत्रण देकर सरकार किसको फायदा पहुंचा रही है और किसको नुकसान? अतिक्रमण कौन कर रहा है, बड़े पूंजीपति या रोटी छिनने के डर से बौखलाए छोटे व्यवसायी और रेहड़ीवाले? सरकार को डंडा किस पर चलाना चाहिए?
अभी-अभी
मायावती ने एलान किया है कि वे 3 अगस्त को प्रस्तावित नई कृषि नीति वापस ले रही हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह ऐलान भी किया है कि अगले आदेश तक प्रदेश में बड़ी कंपनियों का कोई नया रिटेल स्टोर नहीं खुलेगा. मायावती जी इस मजबूत इच्छाशक्ति के लिए आपको बधाई. बहुत सारे लोग आपको विकासविरोधी करार देंगे लेकिन इस लूटपाट को विकास मानने की जरूरत नहीं है. काश कुछ और राजनेता ऐसी इच्छाशक्ति दिखाते.

7 thoughts on “अतिक्रमण कौन कर रहा है?

  1. गोसाईं बाबा कही गए हैं – समरथ को नहीं दोस गोसाईं. दो समरथ वाले तमाम बे समरथ लोगों को धुन रहे है त आपको बुरा काहें लगता है? ई हमारे समाज में हमेसा होता रहा है. अब्बो हो रहा है. आगहूँ (तब तक बे समरथ अपना समरात जान नहीं जाएगा) होता रहेगा.

    Like

  2. अंग्रेज चले गए और हम उनकी परम्‍पराओं को आगे बढाए जा रहे हैं । हमने ‘लोगों का शासन, लोगों के लिए, लोगों द्वारा’ वाली व्‍यवस्‍था स्‍वीकार की लेकिन यह केवल नारेबाजी तक ही सिमट कर रह गई और अब तो शोशेबाजी बन कर रह गई है । हमारे तमाम नेता उस कहावत पर अमल कर रहे हैं जिसमें कहा गया है कि नेता अपने समर्थकों के कन्‍धों पर चढकर कुर्सी तक पहुंचता है और वहां जाकर अपने विरोधियों की सहायता से, लोगों पर राज करता है ।
    आपने बहुत सही बात कही । साधुवाद ।

    Like

  3. आजकल तकरीबन सभी जगहों पर यही आलम देखने मिल रहा है ।
    लेकिन यह भी देखने को मिल रहा है कि जो विरोध कर रहे होते है उनमें से कुछेक तो “कुछ” मिल जाने पर शांत हो जाते है और कुछ दिन बाद वहीं खरीदी करते दिख जाते हैं।

    वैसे मायावती जी के इस एलान का तारीफ़ के साथ स्वागत करना होगा!!
    भगवान उनके इस मन:स्थिति को बनाए रखे!!

    Like

  4. अंग्रेजों ने पुलिस जनता का दमन कर अपनी सता चलाने के लिए बनाई थी। आज आजाती के साठ साल बात भी पुलिस उसी मकसद पर चल रही है।

    Like

  5. आये अंग्रेजा नावों में,
    ले गये हिन्दुस्तान की
    सम्पत्ति जहाजों में,
    दे गये अपना नजरिया
    करोडों को.

    फल यह है कि आज हम
    पूजते हैं फिरंगियों को,
    खलनायकों को,
    लुटेरों को.
    सजा देते हैं
    देशप्रेमियों को,
    वफादारों को,
    ईमानदारों को.

    हे भारतमाता,
    कुछ करो फिर से कि
    1857 की आग जल जाये
    फिर से.
    गोरे अंग्रेजो के विरुद्द नहीं
    बल्कि काले दैत्यों के
    विरुद्ध !!

    — शास्त्री जे सी फिलिप

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

    Like

  6. क्या रिटेल का व्यापार करना गुनाह है? गैर कानुनी है? प्रर्दशन करना है तो सरकार के खिलाफ करो, तोड फोड क्यों..? अगर गैर कानुनी है तो पुलिस / अदालत जाओ, तोड फोड क्यों..?
    राची मे, इंदोर मे भीड ने तोड फोड कि, क्यों… आपकी तस्वीर दर्दनाक है, लोकतन्त्र मे हिसां पर उतारु भीड क्या सलुक करना चाहिये ?

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s