किस सदी में रहना चाहते हैं आप?

गोपाल कृष्ण कहते हैं पांडिचेरी में ऐसी भी बस्तियां हैं जहां तकनीकि और आधुनिकता का प्रवेश वर्जित है. कुछ इसी तरह के लोग बस्तर के अबूझमांड़ में रहते हैं. ये सब आधुनिकता से भागे हुए लोग हैं. आधुनिकतम् देशों और सभ्यताओं से स्वनिष्कासन पर जंगलों, कंदराओं में पहुंचे लोग जिंदगी से चाहते क्या हैं? 21वीं सदी से पलायन कर 17वीं सदी में क्यों पहुंच गये?

वह क्या है जिसे खोजने के लिए इन लोगों ने आधुनिकता का परित्याग कर दिया. तकनीकि को तिलांजलि दे दी. क्या तकनीकि की चपेट में जीवन चिपट गया है या फिर यह अतिभोग से उपजी कुंठा है जिसका शमन हो जीवन का अर्थ समझ में आये? शायद.

साधन से साध्य बनती तकनीकि के खतरे तो हैं ही. सरलता का दावा करनेवाली तकनीकि जटिल होती है और आपके जीवनशैली को भी जटिल बनाती है. फिर रास्ता क्या है? अबूढमांड़ चले जाएं? यह शायद संभव नहीं. तकनीकि का दामन छोड़ दें? यह भी संभव नहीं. फिर? फिर तो विवेक का ही सहारा लेना ठीक होगा. मनएव मनुष्याणां बन्धनं मोक्ष कारणं. हमारा मन ही हमारे बन्धन और मोक्ष का कारण है. अब मन को तकनीकि में जैसे लगाएं वैसी ही गति होगी. तकनीकि बंधन और मोक्ष दोनों का उपकरण हैं. यह हमारा विवेक है कि हम तकनीकि के ताबे में जाएं या तकनीकि को अपने ताबे में कर लें.

यानी विवेक का दामन पकड़कर रखना है. चूक हुई तो हम कोफ्त मिटाने किस सदी में जाएंगे? सौभाग्य से हमें वीजा नहीं लेना पड़ेगा क्योंकि कई सदियों का जीवन आज भी भारत में मौजूद है.

5 thoughts on “किस सदी में रहना चाहते हैं आप?

  1. हम प्रकृति के हिस्से हैं तो प्रकृति की मनोरम छांह हमें बेहद सुकून देती है। लेकिन जिस तरह पानी की सतह के साथ बढ़ गई कमल-दंड फिर छोटी नहीं हो सकती, उसी तरह तकनीकी विकास से मानव समाज पीछे नहीं भाग सकता। मसला विवेक का नहीं, उस दृष्टि का है जो दिखा सकें कि समस्या तकनीक के साथ नहीं है, उसके साथ इंसानी रिश्तों की है। इसी रिश्ते को लेकर समाज में क्रांतियां होती रही हैं।

    Like

  2. सही!!
    तकनीक का प्रयोग हम अपनी सहूलियत के लिए शुरु करते है फ़िर उसके गुलाम होते चले जाते है।
    यह भी सही है कि मन ही मोक्ष या बंधन का कारण है।

    और यह तो सर्वविदित है कि भारत कई सदियों को एक साथ जी रहा है।

    Like

  3. तीन दिन के अवकाश (विवाह की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में) एवं कम्प्यूटर पर वायरस के अटैक के कारण टिप्पणी नहीं कर पाने का क्षमापार्थी हूँ. मगर आपको पढ़ रहा हूँ. अच्छा लग रहा है.

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s