ई-क्रांति का ई-कूड़ा

जब आप कंम्प्यूटर खरीदते हैं तब आप क्या केवल कंम्प्यूटर ही खरीदते हैं? जी नहीं. जब आप कम्प्यूटर खरीदते हैं तो आप कैंसर, किडनी फेलियर, फेफड़े की बीमारी, बांझपन का खतरा, याददाश्त की कमी और कुछ जटिल मानसिक बीमारियों को भी खरीदते हैं. जब आप कंम्प्यूटर पर काम करते हैं तो आप केवल कंम्प्यूटर पर ही काम नहीं करते. धीरे-धीरे आप अपना भी काम तमाम करते रहते हैं. यह सब किसी आधुनिकता विरोधी अभियान का नारा नहीं बल्कि ऐसी हकीकत है जो ग्रीनपीस इंटरनेशनल के एक अध्ययन में सामने आया है.

ग्रीनपीस आजकल एक अभियान चला रहा है. यह अभियान इलेक्ट्रानिक कूड़े से जुड़ा हुआ है. देश में हर साल एक लाख छियालिस हजार टन ई-कूड़ा पैदा हो रहा है. क्योंकि इस कूड़े को तांबा, रांगा और अन्य धातुओं के लिए गलाया जाता है इसलिए रिसाइक्लिंग का यह काम कबाड़ के कारोबार में एक नया आयाम जोड़ रहा है. अनुमान है कि जितना ई-कूड़ा देश में पैदा होता है उतना ही हर साल बाहर से चोरी-छिपे देश में पहुंचा दिया जाता है. तो कुल मिलाकर लगभग तीन लाख टन भारी धातु, प्लास्टिक, पीवीसी, डायक्सीन, फूरान, शीशा, पारा, क्लोरियम कैडिमियम नामक कबाड़ नष्ट किया जाता है. इससे जो जहर पैदा होता है अधिकांश मनुष्य के शरीर में घुलता है और कुछ पर्यावरण में विलीन हो जाता है और घूम-फिरकर मनुष्य के शरीर में लौट आता है.

तो क्या नष्ट करते समय ही ई-कूड़े का संकट है. जी नहीं. कम्प्यूटर के अत्यधिक प्रयोग से भी कई तरह के भयानक रोग होने की संभावना रहती है. लैपटाप से चिपके हैं तो यह संभावना थोड़ी और बढ़ जाती है. तो क्या किया जाए? ग्रीनपीस के अभियान संयोजक कहते हैं कि भारतीय कंपनियों को चाहिए कि वे पर्यावरण और स्वास्थ्य मानको को लागू करें जैसा कि कई बड़ी आईटी कंपनियां कर रही हैं. उनके उत्पाद में घातक रसायनों की मात्रा बहुत कम होती है. भारत की आईटी हार्डवेयर मेजर कंपनी एचसीएल, पीसीएस, जेनिथ, विप्रो आजि अगर मुकाबले में बनी रहना चाहती हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद में घातक रसायन कम से कम हों और बेचे गये सामान को नष्ट करने की जिम्मेदारी भी उन्हें अपनानी होगी.

ज्यादा विस्तृत विवरण ग्रीनपीस के वेबपन्ने पर है.

7 thoughts on “ई-क्रांति का ई-कूड़ा

  1. बहुत उपयोगी जानकारी दी धन्यवाद। यह सचमुच चिंता का विषय है कि भारत दुनिया भर के ईकचरे का कूड़ाघर बनता जा रहा है। इस पर समय रहते नियंत्रण न किया गया तो इसका परिणाम बहुत भयानक होगा।

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  2. बहुत उम्दा जानकारी, वैसे सुना है ई कचरे का सबसे ज्यादा उत्पादन अमरीका कर रहा है।

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  3. यह समस्या दिन पर दिन गम्भीर रूप लेती जाएगी ।
    घुघूती बासूती

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  4. सही है। जहां आबादी ज्यादा हो वहां कम्प्यूटर का चलन शुरू कर दो।

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  5. अनूप जी इसीलिए तो भारत में कंप्यूटराईजेशन बढ़ता जा रहा है ना।

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