रामसेतु……तथास्तु

कल सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम स्थगन आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगले आदेश तक “रामसेतु” के आस-पास खनन कार्य तुरंत बंद किया जाए. हालांकि कोर्ट ने गाद की सफाई का काम जारी रखने की अनुमति दे दी है.

सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी. स्वामी की दलील थी कि अगर एक बार सेतु टूट गया तो फिर अदालत चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती. टूटने के बाद सरकार ने स्वीकार भी कर लिया कि वहां रामसेतु नामक कोई सेतु है तो भी कुछ नहीं हो सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की यह दलील मान ली और 14 सितंबर को अगली सुनवाई तक काम रोक देने का आदेश दे दिया.

जस्टिस बी एन अग्रवाल और जस्टिस पीपी नोवेलकर ने अपने आदेश में साफ कहा है कि रामसेतु को किसी भी हाल में नुकसान न पहुंचे.

रामसेतु, एडम्स ब्रिज या फिर फिजूल की बात
सरकार के प्रतिनिधि ने कोर्ट में दलील दिया है कि पूरी परियोजना 2400 करोड़ रूपये की है. जिसमें से 387 करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं. परियोजना यह है कि पाक जलडमरू मध्य और मन्नार की खाड़ी को जोड़ते हुए एक ऐसी समुद्री नहर बनायी जाए जिससे समुद्री जहाज आसानी से निकल सकें. इस परियोजना के पूरा होने से मालवाहक जहाजों को 780 किलोमीटर कम यात्रा करनी पड़ेगी जिससे उनका लगभग 30 घंटा और ईँधन का पैसा बचेगा.

रामसेतु के समर्थक कहते हैं कि कुछ करोड़ बचाने के लिए हम अपनी धरोहर को खत्म नहीं कर सकते. बचाव पक्ष के लोग जिसे रामसेतु कह रहे हैं वह करीब 48 किलोमीटर लंबा है. नासा के चित्र जारी करने से पहले से लोग इस रास्ते का उपयोग करते रहे हैं. तमिलभाषी इसे रामार सेतु कहते हैं. इस बारे में कोई विवाद नहीं है कि वहां कोई स्थाई संरचना समुद्र के नीचे दफन है. भारत में धनुषकोटि से शुरू हुई यह संरचना श्रीलंका के तलाईमन्नार तक जाती है. जहां-जहां यह संरचना गुजरती है वहां समुद्र बहुत उथला है. 500 साल पहले यहां पानी इतना कम था कि मन्नार द्वीप और रामेश्वरम के बीच लोग टापुओं से होते हुए पैदल ही चले जाते थे. शायद इसीलिए इसे सेतु का नाम दिया गया.

पौराणिक मान्यता से हम सब परिचित हैं. राम द्वारा भारत और लंका के बीच सेतु बनाने में बानर-भालुओं ने योगदान किया और कोई तैयरेवाले पत्थर प्रयोग किये थे. आधुनिक वैज्ञानिक भी मानते हैं कि यह रेत और लाईमस्टोन के टीलों का समुच्चय है जो एक रेखा में भारत से श्रीलंका तक जाता है. लेकिन केवल इतना होनेभर से इसे रामसेतु के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती. नासा के चित्र के बाद ही इस बारे में ज्यादा खोजबीन हुई है लेकिन खुद नासा के एक वैज्ञानिक ने भी शंका जाहिर की है कि ढांचा है यह बात पक्की है लेकिन वह ढांचा मानवनिर्मित है इसे पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता.

यानी एक बात तय है कि वहां एक ढांचा है. इसी बात को सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकार करते हुए स्थगन आदेश दिया है. वह रामसेतु है या स्वनिर्मित प्राकृतिक ढांचा यह तय करना अभी बाकी है. बचाव पक्ष का तर्क है कि रामसेतु के नाते न सही प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को रोक देना चाहिए. क्योंकि यह परियोजना पूरी होती है तो पूरा तटीय पर्यावरण तहस-नहस हो जाएगा. मछुआरों की रोजी-रोटी खत्म हो जाएगी. तटीय इलाकों के डूबने का खतरा पैदा हो जाएगा. ये तर्क शायद इसलिए दिये जा रहे हैं कि कानून और प्रशासन के लिए भावनाओं का कोई मतलब नहीं होता. क्या होता है पता नहीं, फिलहाल तो काम रूक गया है.

7 thoughts on “रामसेतु……तथास्तु

  1. उच्चतम न्यायालय के इस महत्वपूर्ण निर्णय हेतु डा. सुब्रमण्यम स्वामी को बधाई व धन्यवाद.वे एक लम्बे अर्से से इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं आखिर्कार उनका संघर्ष रंग लाता दिख रहा है.

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  2. court ne kahaa ki agar pul he toot gaya to wo faislaa kis par dega.yanee court kafaislaa ye hai li pul toota nahi hai. yani pul wahan maujood hai. lekin kuchh logon ko ab bhee wahan pul dikhayee nahi detaa. aise chhadm aankh walon ko ram par n sahee court par to aasthaa rakhnee hee padegee. nahin to contempt ho jayega.in murkhon ko niruttar karne ke liye kyon ek rathyatra is pul se bharat se lankaa tak nikaali jaye?

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  3. Ram setu ka nirmaan RAAM ne bhale na kiyaa ho isake punrkhoj ka shreya to unhe unaki team ko diya ja sakataa hai,Puraanon ke antrshaakshya to yahi ingit karate hain.Jamvant ki team me hunumaan ne sarvekshan ka kaam sambhaala angad aur neel ne setu ke marammat ka.
    lok shrutiyaan nirmul nahi hoti.
    ram setu ke sach ko jaanane kaa puraa adhikaar bhaartiya janataa ko hai.supreme court ki rok theek hai magar yah saadhu sanyaasion ki bakbak aur chill pon se nahi mili hai isake peechhe ek tej dimaag ke swami ki bhumika hai.kudos to Subramahnam Swami!

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  4. मानव निर्मीत ढ़ांचा है तो यह अब विश्व की धरोहर है.

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  5. राम सेतु विश्‍व धरोहर है जैसे कि ताज व लाल किला है।
    क्‍या कल को भारत के विकास कि लिये ताज महल तोड़ना पड़ा तो क्‍या इसके लिये सरकार तैयार है ?

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  6. वाकई प्रशंसनीय, स्वामी जी इस प्रयास के लिए बधाई के पात्र हैं।

    महाशक्ति का प्रश्न भी सोचनीय है।

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