टीपें न तो पता कैसे चले कि हम आये थे

दिल्ली में हाहाकारी भेंट मुलाकात के वक्त नीरज दीवान ने एक बात कही थी. मैं एक लेख लिखता हूं तो बदले में पचास टिप्पणी भी करता हूं. ऐसा करने में उन्हें तीन से चार दिन लगता है इसलिए हर तीसरे या चौथे दिन ही वे कुछ लिखने की स्थिति में आ पाते हैं. लेकिन दीवान साहब यह बात अगर समीरलाल कहते तो मैं मान भी लेता, आपके कहे अनुसार मुझे टिप्पणियां दिखती नहीं. हालांकि मैं कोई बड़ा टिप्पणीबाज नहीं हूं लेकिन दस पांच तो रोज टीप ही देता हूं.

खैर, चर्चा ए आम यह है कि टिप्पणी क्यों करनी चाहिए? क्या कोई कवि सम्मेलन है जहां हर कवि एक दूसरे की वाह-वाह करे और मंच से उतरने के बाद विरोधी खेमे को पकड़कर गालियों से महिमामंडन करे. ऐसी ब्लागरी कितने दिन टिकेगी? और टिकी भी रही तो किस काम की? यह तो वही बात हो गयी कि व्यक्ति चाहे जैसा हो व्यक्तित्व बढ़िया होना चाहिए. अरे भाई आदमी ठीक तो उसका व्यक्तित्व भी ठीक.

तो ब्लागरों विषय उम्दा हो कि झूमकर टिप्पणी करें लोग. या फिर ऐसा गढजोड़ जहां टिप्पणी करें क्योंकि सामने से भी उसी टिप्पणी के मिलने की आस है. चलो उम्दा लेखन को अपना केन्द्रित विषय बना भी लें तो टिप्पणी करने का अवसर होता कहां है. जब कभी आप बहुत उम्दा लेखन पढ़ते हैं तो मेरा मानना है कि आप मौन हो जाते हैं. उस पर विचार शुरू हो जाता है. बहुत हुआ तो आप इतना कह देंगे कि बहुत बढ़िया, उम्दा या फिर बधाई ऐसे लेखन के लिए.

खतरा यह है कि बहुत बार ये शब्द ऐसे लेखों के लिए भी प्रयुक्त हो जाते हैं जिनके लिए हमारे मन में इसके विपरीत भाव पैदा होते हैं. यानि “क्या बकवास काम कर रहे हो यार, कुछ ढंग का लिखो” नहीं कह सकते. तो कह देते हैं बहुत बढ़िया लेखन. अब आपकी एक टिप्पणी ने उसकी लुटिया तो डुबोई. वह तो गया काम से. नमाजी मियां जी की तरह आपने उसे चवन्नी दे दी.

मुझे हमेशा यह उलझन रहती है कि टीपें न तो पता कैसे चले कि हम आये थे? और हम आये थे इसका पता न चले तो हमारे वहां जाने का मतलब क्या है? इसके आगे का चिंतन आप करें………….

9 thoughts on “टीपें न तो पता कैसे चले कि हम आये थे

  1. आवाज तो ठीक थी पर था पटाखा थोडा ढीला थोडा तान के चलाते तो मजा आता यार कंटेंट पर वैसे भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है. हां एक नई ब्लॉगर आईं हैं मेरी मित्र हैं जरा इस ब्लॉग को देखिये और उत्साह बढाइये. कान भी खींच सकते हैं. मतलब साफ साफ कहिए कैसा लगा यूआरएल है http://romameerut.blogspot.com
    हां इसे ब्लॉगवाणी पर कैसे चढायें जरा मदद भी कीजिये

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  2. संजय, लेख अच्छा है लेकिन निष्कर्ष के चरण पर पहुंच कर कुछ और पंक्तियां जोड देते तो अच्छा रहता ! (अब जरूरत है ऐसी सटीक टिप्पणियों पर टिप्पणी-पर-टिप्पणी, या टिटिप्पणी) — शास्त्री जे सी फिलिप

    हे प्रभु, मुझे अपने दिव्य ज्ञान से भर दीजिये
    जिससे मेरा हर कदम दूसरों के लिये अनुग्रह का कारण हो,
    हर शब्द दुखी को सांत्वना एवं रचनाकर्मी को प्रेरणा दे,
    हर पल मुझे यह लगे की मैं आपके और अधिक निकट
    होता जा रहा हूं.

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  3. चलो, दर्ज हो कि हम भी आये थे. टिप्पणी का मामला जटिल है. 🙂

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  4. एकाएक यह टिप्पणी विषय जोर पकड़ता जा रहा है. मुझे तो इस पर की जा रही विमर्श की आवश्यकता ही नहीं समझ आ रही है. शिष्टाचार में कैसा विमर्श? एक दो दिन में विस्तृत विचार पेश करता हूँ.

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  5. सहमत हूँ। इस पर विचारने की जरूरत है। मैने कम से कम 10 ऐसे चिठ्ठाकारो को मायूस होते देखा है जो आरम्भिक टिप्पणियो से पहले उत्साहित हुये फिर असलियत का भान होते ही मायूस हो गये। यह कहना गलत न होगा कि जो अभी लिख रहे है वे एक पूरी पीढी के लिये मार्गदर्शक है। इसलिये हमे बहुत सोच-समझकर कदम बढाना

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  6. सहमत हूँ। इस पर विचारने की जरूरत है। मैने कम से कम 10 ऐसे चिठ्ठाकारो को मायूस होते देखा है जो आरम्भिक टिप्पणियो से पहले उत्साहित हुये फिर असलियत का भान होते ही मायूस हो गये। यह कहना गलत न होगा कि जो अभी लिख रहे है वे एक पूरी पीढी के लिये मार्गदर्शक है। इसलिये हमे बहुत सोच-समझकर कदम बढाना होगा।

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  7. सही लिखा है भाई साहब आपने!!
    और अंत तक आते आते जिस उलझन में पड़े हैं आप वह तो बिलकुल सही है!!

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  8. ये लो भई. मैं आपके लेख को पढ़कर गया. अब पता चल गया कि मैं यहां आया था.

    उम्दा लेखन के बाद आप मौन हो तो भी एक चटका छोड़कर जाना चाहिए.
    मैं उन मित्रों को धन्यवाद देता हूं जो व्यक्तिगत तौर संदेश भेजकर पर मुझे अपने लेख पढ़वा लेते हैं. यह सुविधाजनक होता है.

    आपने वाजिब बात कही है. व्यक्ति अच्छा हो तो लेख अच्छा ही होगा. यह बात भी कि गुटबाज़ी के चलते टीपा-टीपी भी की जाती है.

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  9. हेलॊ जी
    मैँ केरल से हूँ। मलयालम में ब्लोग कर रहा हूँ।
    मैंने ब्लॊगिंग ब्लॊगस्पॊट में शुरू किया था। अब मेरा जॊ ब्लॊग( रजी चन्द्रशॆखर ) वॆर्ड्प्रस में है, उसी में हिन्दी प्रविष्टियाँ भी शामिल कर रहा हूँ । कृपया दॆखें और अड्वैस भी दें।

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