आईये बढ़िया को बधिया करें

चिट्ठाकारिता बलखाती आगे बढ़ रही है. कल विपुल से बात हुई. उनके हिसाब से बड़े प्रयोग के लिए हम चिट्ठाकारों को तैयार रहना चाहिए. विपुल कौन? अरे वही चिट्ठाजगत वाले. प्रयोगधर्मी इंसान हैं. चिट्ठाजगत में प्रयोग करते रहते हैं और जितना प्रयोग अब तक किया है आगे उससे ज्यादा प्रयोग करने की योजनाओं पर काम कर रहे हैं. उनके दो मित्र आलोक भाई और कुलप्रीत भी इस काम में लगे हुए हैं. इरादा है चिट्ठाकारिता को नयी ऊंचाईयों पर ले जाया जाए.

उधर फुरसतिया जन-संपर्क में लगे हैं. कहीं खट्टी नाशपाती तो कहीं मीठे आमों के साथ वे अपने तईं अभियान में लगे हैं. समीरलाल जी इन दोनों से अलग अपने ब्लाग पर आ चुके लोगों को फंसाने का काम कर रहे हैं. कैसे? टिप्पणी करके. साधुवाद देकर और कैसे. वे भी सफल हैं. इतिहास बना रहे हैं. सबकी इच्छा यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग ब्लागरी के मैदान में आयें और डटे रहें. नेट पर अल्पसंख्यकों की भाषा बहुसंख्यक हो जाए. और बात चले तो अधिसंख्यक भी हो सकती है.

रवि रतलामी, जीतेन्द्र चौधरी, प्रतीक पाण्डेय और देवाशीष के प्रयास तो हैं हीं. एक प्रयास और कर रहे हैं ब्लागवाणी के मैथिली गुप्त. थोड़ा सा जानकारी में है और बहुत सारा दबा हुआ. पानी में तैरते हिमखंड की तरह.

विपुल बताते हैं कि पिछले 20-25 दिनों में जिस तरह से चिट्ठों की संख्या में वृद्धि हुई है उससे बड़ी खुशी हो रही है. कहें तो बाढ़ के लक्षण हैं. इसलिए एग्रीगेटरों को अब अपनी परिभाषा में आमूल-चूल परिवर्तन करने का वक्त आ गया है. क्या हो, यह तो एग्रीगेटर के संचालक जानें लेकिन भारी बदलाव के संकेत साफ दिख रहे हैं. अगले तीन-चार महीनों में हम चिट्ठाकारी की गड़ही से निकलकर तालाब में पहुंच जाएंगे ऐसा लग रहा है.

सोचता हूं, बढ़िया को बधिया करनेवाले चिट्ठाकार अब किस रूप में मौजूद रहेंगे? क्या उनके लिए कोई विदाई गीत गाया जाए? शायद नहीं…….. उनकी योजनाएं भी होंगी. हमें उसके लिए तैयार रहना चाहिए. इंटरनेट हो और हैकर न हों तो बात हजम नहीं होती. आखिरकार सत्य को विजयी होना है तो असत्य की सत्ता तो होनी चाहिए…….

4 thoughts on “आईये बढ़िया को बधिया करें

  1. ह्म्म, चलिए देखते हैं जो होना है सामने तो आएगा ही न!!

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  2. थोड़ा सा जानकारी में है और बहुत सारा दबा हुआ. पानी में तैरते हिमखंड की तरह.

    इंटरनेट हो और हैकर न हों तो बात हजम नहीं होती. आखिरकार सत्य को विजयी होना है तो असत्य की सत्ता तो होनी चाहिए… ये तो संभलने की बात है

    व्यावसायिकता का ईंधन भी आवश्यक होगा व्यापक बदलाव /सुधार नादि हेतु , अन्य तकनीकों में जैसे हुआ

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  3. ज्यादा इन्तजार तो है नहीं. बाढ़ का रुख भी देखा जायेगा. :)आगे आगे देखिये होता है क्या.

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