एमटीएनएल है तो सही है

बहुत सारे मित्रों को शिकायत रहती है कि सरकारी सेवा कंपनियां बेहतर सेवा मुहैया नहीं करवातीं. आज से दो साल पहले मैं भी इसी विचार से इत्तिफाक रखता था. लेकिन अब नहीं.

दो साल पहले एमटीएनएल का फोन था. आमतौर पर तीन तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. पहला, शिकायत करने पर बहुत सरकारी अंदाज में शिकायत का निपटारा होता था. यानी पीछे पड़ना पड़ता था. थोड़ी पहुंच वगैरह का भी इस्तेमाल करना पड़ता था और संबंध भी बनाकर रखना पड़ता था. इतने के बावजूद लाईनमैन को कुछ नामा भी देना पड़ता था. होली दिवाली अलग.

दूसरे, सेवा प्रदाता और सेवा उपभोक्ता के बीच कोई संपर्क नहीं होता था.

तीसरे, सेवा का स्तर बहुत अच्छा नहीं था. संभवतः ऐसा दलाली के दलदल में फंसे होने की वजह से होता था.

इन्हीं वजहों से आजिज आकर मैंने दो साल पहले एयरटेल का बेसफोन लगवाया था. मेरे मन पर एयरटेल के विज्ञापनों का जबर्दस्त प्रभाव था. तो एक नहीं दो फोन लगवा लिये. लेकिन दो साल में मैंने अनुभव किया कि सरकारी सेवा प्रदाता कंपनियां ज्यादा बेहतर हैं. हम नाहक ही गाली देते रहते हैं. सरकारी सेवा प्रदाता कंपनी में जो कमियां हैं उससे ज्यादा अच्छाईयां हैं. कम से कम वे आपको मानसिक तनाव नहीं देते.

एयरटेल के साथ मेरा अनुभव बहुत भयानक है. सेवा की गुणवत्ता थी लेकिन उसकी बड़ी भारी कीमत चुकानी पड़ रही थी. मसलन अगर आपने फोन लगवा रखा है तो आपके लिए आराम से ज्यादा यह एक काम है. हर महीने बिल मिलने के लिए चार फोन. बिल जमा करवाने के लिए आठ फोन. इसके बाद धमकी कि अगर आपने फला तारीख तक बिल नहीं जमा करवाया तो आपका फोन कट जाएगा. और यह सब हर महीने.

पहला फोन कटवाने की अर्जी दी तो धड़ाधड़ फोन आने लगे. आप फोन मत कटवाईये. आपको आगे से कोई शिकायत नहीं होगी. मुझे लगा ठीक है. मेरी बात ऊपर तक पहुंच गयी, रखते हैं दोनो फोन. लेकिन एक महीना नहीं बीता होगा वही सब क्रम फिर शुरू हो गया. मुझे लग गया कि वादा निभाने वाले और तंग करनेवाले दोनों दो विभाग हैं. और जिसे हम अपनी तंगी मान रहे हैं असल में यह उनका काम है. यानी व्यवस्था ही ऐसी है कि ग्राहक को परेशान होना पड़ेगा.

हालांकि बड़ी भागदौड़ और तनाव के बाद अब मैंने अपने दोनों फोन कटवा दिये हैं फिर भी कुछ औपचारिकताएं रह गयी हैं. लेकिन अब मैं अपने आप को बहुत तनावमुक्त महसूस कर रहा हूं. सर से जैसे बोझ हट गया.

इस बीच एमटीएनएल की सेवा मैंने दोबारा ले ली है. और आपको यकीन नहीं होगा इस बार जैसी उच्च गुणवत्तावाली सेवा एमटीएनएल दे रहा है वह किसी भी निजी कंपनी से बेहतर है. यह शायद निजी कंपनियों के दबाव का परिणाम है कि एमटीएनएल एक फोनकाल पर आपके घर फोन और इंटरनेट लगा जाता है और शिकायत होने के दो-चार घंटे के अंदर लाईनमैन दल-बल के साथ आपके घर हाजिर होता है. और सुखद आश्चर्य यह कि वह अब बख्शीश भी नहीं मांगता.

अब मैं यह सोचकर भी डर जाता हूं कि अगर सरकार ने एमटीएनएल को बेच दिया होता तो आज मेरे पास क्या रास्ते होते? मुझे एयरटेल या फिर किसी निजी कंपनी की मनमानी का शिकार बने रहना पड़ता. सरकारी सेवा प्रदाताओं पर एक बार फिर विश्वास लौटने लगा है. केवल भारत में ही नहीं अमेरिका में भी. आर्नाल्ड श्वाजनेगर जिस प्रांत के गवर्नर हैं वहां दुनिया में सबसे पहले स्वास्थ्य, बिजली सेवाओं का निजीकरण किया गया था. श्वार्जनेगर ने ऐलान किया है वे इन सेवाओं में निजी क्षेत्र के अलावा अब सार्वजनिक क्षेत्र को भी शामिल करेंगे.

लगता है समाजवाद लौट रहा है अपनी कमियों को सुधारते हुए.

8 thoughts on “एमटीएनएल है तो सही है

  1. वैसे अब तो एम.टी.एन.एल.भी बिल ना भरने पर फ़ोन काटने की चेतावनी या धमकी देता है।

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  2. दिल्ली शहर में नया ब्रॉडबैन्ड क्नैकशन का आवेदन करे ५० दिन हो गए हैं कोई सुनवाई नहीं है।

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  3. आप एसे कैसे पीछा छुटा सकते है इन प्राइवेट फोन कम्पनियों से?
    अभी तो आपको ये वकील बन कर फोन करेंगे, पोलिसवाले बनकर फोन करेंगे, आपसे कहेंगे कि आपपर कुछ पैसा बकाया है और आपके खिलाफ कोर्ट में फलां मामला है।

    आपको ये डरायेंगे, धमकायेंगे।
    तेरा पीछा ना में छोड़ूंगा सोनिये

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  4. भाई मै तो आज भी MTNL से परेशान हूं. अगर तुम्हे भी परेशान होना है तो गरूण ले लो पता चल जाएगा.
    100 रू मे काफी परेशानी मिलेगी.

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  5. प्रतियोगिता के चलते सरकारी दूरसंचार सेवा पहले से बेहतर तो हुआ है चाहे एम टी एन एल हो या बी एस एन एल!!

    वर्तमान में मै एयरटेल बेसलाईन और इंटरनेट( डी एस एल) दोनो का उपयोग कर तो रहा हूं पर पिछले दिनो एयरटेल का ही एक अनुभव हुआ। बड़े भाई के घर में हमने लगाने कोई और कनेक्शन कहा उन्होने लगा कुछ और दिया,( मांगा था डी एस एल जबकि उन्होनें दिया डायल अप) चार दिन मे ही हमने कटवाने के लिए कह दिया! फ़िर भी तीन महीने तक नही काटा,जबकि कटवाने की बात उनके सिस्टम में दर्ज़ हो चुकी थी, आखिर में उनके दफ़्तर जाकर डांटने और टेलिफोन जमा कर रसीद ले लिया! अब उसके बाद भी दो बार कॉल आ चुके हैं कि बकाया है, एक कॉल तो आज ही भोपाल दफ़्तर से आया! कॉल सुनते ही अपना भेजा आउट, फ़ुनियाने वाली कन्या को उल्टे लताड़ दिया!!

    इस घटना ने मुझे एयरटेल के बारे मे फ़िर से सोचने पर मजबूर कर दिया है नही तो मै एयरटेल के कस्टमर केयर तो सबसे अच्छा मानता आ रहा था!!

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  6. विस्‍फोट जी,

    MTNL का मेरा अनुभव बहुत अच्‍छा नहीं है। इसका इंटरनेट ले रखा है। टेलीफोन तक तो ठीक है पर इनके पास इंटरनेट से संबंधित तकनीकी सेवा देने वाले पर्याप्‍त मात्रा में नहीं है, और इसी के बूते पर रोज़ाना नई-नई स्‍कीमें निकालते हैं। इसकी सेवा (खराब होने पर कार्रवाई) का सिस्‍टम बड़ा बेकार है। इत्तफाक की बात है कि मैंने हाल ही में इस पर अपने ब्‍लॉग में एक पोस्‍ट लिखा है। – आनंद

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  7. मेरे पास एयरटेल का ब्राडबैंड है. एक बार मुझे भी परेशानी हुई थी पर मैने उनके बडे़ अधिकारी को एक व्यंगात्मक पत्र लिखा. उसका दूसरा दिन और आज तक एयरटेल का फोन बढि़या चल रहा है.

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