गरम पानी, चाय और योग

आम जीवन में योग के महत्व पर खूब बातें होती हैं. लेकिन आम आदमी योग को कैसे समझता है इसकी एक झलक मुझे उस बस में मिली जिससे मैं ऋषिकेश जा रहा था. हरिद्वार से एक महिला अपनी बेटी के साथ बस में चढ़ती है. आगे ड्राईवर के पास थोड़ी जगह थी, वहीं बैठ जाती है. महिला बगल में बैठी हो और भारतीय बस का ड्राईवर बात न करे यह तो संभव नहीं. बहनजी से ही सही लेकिन उसने बातचीत शुरू कर दिया. वह महिला बाबा रामदेव के आश्रम में काम करती थी. इसलिए बातचीत योग की ओर चली गयी. ड्राईवर ने अपनी समस्या बताई कि उसे फंला-फंला समस्या रहती है, तो पट महिला ने समाधान बता दिया. आप गरम पानी पिया करो. संभवतः उसने यह आश्रम में सीख लिया था कि गरम पानी पीने से कई तरह की समस्याओं का समाधान हो सकता है. ड्राईवर ने कहा वह तो मैं दिन में बीस बार पीता हूं. महिला भी चौंकी और मैं भी. बीस बार गरम पानी और अपनी ड्राईवरी करते हुए. इसका समधान ड्राईवर ने ही किया कि वह दिन में बीस बार गरम पानी कैसे पीता है. असल में वह दिन में बीस बार चाय पीता है.

महिला ने कहा कि चाय और गरम पानी में फर्क होता है. ड्राईवर ने इसका प्रतिवाद करते हुए सफाई दी. बहन जी आज की चाय भी गरम पानी के जैसी ही होती है. न दूध, न पत्ती और न चीनी. अब ऐसी चीज को गरम पानी न कहें तो क्या कहें? महिला चुप. बाकी आस-पास के लोग हंसने लगे. फिर रास्ते भर उसने योग के बारे में कोई बात नहीं की. शायद उसे ड्राईवर ने योग की असली शिक्षा दे दी थी.

3 thoughts on “गरम पानी, चाय और योग

  1. तो आप हरिद्वार घूम आये.चलिये अच्छा है.कुछ बताइये वहाँ के बारे में भी.

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  2. वाह!! रखकर दिया ड्राईवर ने!!

    तभ्भै हम सोचे कि आप कहां गायब हो और “विस्फ़ोट” में खामोशी क्यों है।

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  3. हा हा!! सही तो कह रहा है ड्राईवर. वैसे गरम पानी के सेवन के फायदों के बारे में चर्चा किजिये. कहाँ कहाँ घूम आये आप?

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