हमारे भविष्य का "ब्ल्यूप्रिंट"

आज एक बार फिर पाण्डेय जी ने मेरे इस लेख पर सवाल उठाया है कि हमारे भविष्य का क्या ब्ल्यूप्रिंट होना चाहिए? अगर इसको विकास नहीं कहते तो विकास किसको कहोगे? यह बहुत अच्छा विषय है. मैं अपनी ओर से कुछ कहूं इससे अच्छा होगा बहुत सारे ब्लागर इस बहस में शामिल हों. आपके हिसाब से भारत के भविष्य का क्या ब्ल्यू-प्रिंट होना चाहिए, इस पर एक बहस चलाएं. मैं भी इस बहस में शामिल हूं.

3 thoughts on “हमारे भविष्य का "ब्ल्यूप्रिंट"

  1. बहुत ही सार्थक बहस होगी यह। मुझे लगता है कि प्रवर्तन ज्ञानदत्त जी को करना चाहिए, विकास की अपनी समग्र अवधारणा के साथ।

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  2. मैने सवाल इसलिये किया क्यों कि संजय जी बार-बार वर्तमान व्यवस्था से व्यापक असंतोष व्यक्त करते रहे हैं। अगर व्यापक असंतोष हो तो वैकल्पिक व्यवस्था और उस तक पंहुचने का ब्ल्यूप्रिण्ट होना चाहिये। अन्यथा वह अर्थहीन असंतोष हो जाता है।
    मुहे वर्तमान व्यवस्था से कोई व्यापक कष्ट नहीं है। इन्क्रीमेण्टल इम्प्रूवमेण्ट की सतत प्रक्रिया मुझे उचित लगती है। प्रजातन्त्र के वर्तमान स्वरूप में मजा नहीं आ रहा पर उसका कोई विकल्प हो – ऐसा नहीं है। शायद विद्वत परिषद का शासन बेहतर हो – पर वर्तमान व्यवस्था भी चलेगी।
    अत: मुझे तो किसी व्यापक परिवर्तन की जरूरत नहीं महसूस होती। पर जो लोग हाइपर क्रिटिकल हैं – उन्हे विकल्प दिये बिना आलोचना करना कुछ गैरजिम्मेदार या फ़ैड सा लगता है। आलोचना आसान है। सार्थक और सम्भव विकल्प देना कठिन।

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  3. संजय भईया हम इस बहस में अपनी जानकारी के अनुसार से कुछ बातें रखना चाहते हैं । 1 पिछले माह हमारे संस्‍था के एक ड्राईवर नें हमें आकर बताया कि भईया हमने अपना नाम गरीबी रेखा में जुडवा लिया है दो सौ रूपया दिये हैं सर्वेयर को और तीन सौ रूपया और देना हैं तब जब लिस्‍ट में नाम आ जायेगा । मैंने उससे पूछा कि क्‍या होगा इससे व्‍यर्थ में पांच सौ गंवा दिये । उसने सारे सब्‍जबाग बखान किये जिसका सार यही था कि सबसिडी व छूट को ढकारने का यह सबसे बडा लिस्‍ट है ।
    2 गरीब लोग 500 रू दे नहीं पायेंगें और जो दे पायेंगें वो सहायता को मिल बांट कर खा जायेंगें ।
    3 ऐसे में जो लिस्‍ट सामने आयेगी उसकी सत्‍यता कौन प्रमाणित करेगा आपने लिखा ही है कि गरीबी की परिभाषा विदेशी दानदाता क्‍या करते हैं ।
    4 पूरे देश में यह सर्वे चल रहा है इसे सरकारी मैकाले के वंशज बना रहे हैं इस पर मुहर लगने के पहले इसकी एक बार और निजी तंत्रों के द्वारा प्रमाणीकरण होना चाहिए ।

    ब्‍लू प्रिंट का कलेवर के संबंध में हमारे पास कोई शव्‍द नहीं है पर हम इस बहस में बने रहेंगें ।

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