पत्रकारिता का एक आयाम यह भी है

अगस्त में उत्तर प्रदेश में रिलायंस फ्रेश के खिलाफ बड़ा बवाल हुआ था. उसके बाद कंपनी को उत्तर प्रदेश छोड़ने का फैसला करना पड़ा. घोषित तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा है लेकिन कंपनी ने फैसला कर लिया है कि अगले महीने यानी जनवरी 2008 में वह उत्तर प्रदेश से पूरी तरह बाहर हो जाएगी. पूरे प्रदेश में रिलायंस अपने सामान दूसरी जगहों पर शिफ्ट करने की योजना बना रहा है लेकिन सार्वजनिक रूप से कुछ भी इसलिए नहीं कहा जा रहा है क्योंकि इससे कर्मचारी बवाल कर देंगे. लेकिन कंपनी ने फैसला कर लिया है कि वह उत्तर प्रदेश से बाहर जाएगी.

बहरहाल मजेदार किस्सा यह है कि अगस्त में रिलांयस के खिलाफ प्रदेश भर में जो प्रदर्शन हुए थे उसकी एक हकीकत सुनिये. बनारस के सोनारपुरा में जिस भवन में रिलायंस फ्रेश अपना स्टोर खोल रहा था वहां लगभग तैयारी पूरी हो चुकी थी. जिस भवन में स्टोर खुल रहा था उसके मकान मालिक हैं पनारू सरदार. वे बताते हैं कि उस दिन कुछ लड़के आये और उन्होंने कहा कि हम स्टोर के सामने थोड़ी देर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना चाहते हैं. पनारू सरदार व्यवसाय से ज्यादा लोकतांत्रिक प्रणाली और खासकर धरने प्रदर्शनों को जरूरी मानते हैं. उन्होंने कहा जरूर धरना दो. धरने के लिए कुछ लड़के बैठे थे. इतने में अचानक दो लड़के आये और अपनी जेबों से कोका-कोला की बोतल निकाली. उसमें पेट्रोल था. सड़क की दूसरी ओर उन्होने बोतल फोड़ी और आग लगा दी.

अचानक ही वहां एक कैमरामैन प्रकट हुआ. उसने सबकुछ शूट किया. और उस दिन उस समयनुमा चैनल में दिनभर खबर चलती रही कि बनारस में भी रिलायंस फ्रेश के खिलाफ बड़ा उग्र प्रदर्शन हुआ है. मैं भी मस्त था बनारस में लोग रिलायंस का तगड़ा विरोध कर रहे थे. लेकिन पनारू सरदार द्वारा बतायी गयी हकीकत कुछ और ही है. वे कहते हैं वे लड़के उसी चैनल के द्वारा भेजे गये थे. क्योंकि कुल एक मिनट में ही सारा काण्ड निपट गया तो वह चैनल वाला उसी समय वहां क्यों था जब लड़कों ने सड़क पर बोतल फोड़कर आग लगाई थी. पनारू सरदार जा पहुंचे चैनल के दफ्तर. आरोप लगाया कि आप लोगों ने ही फोटो खींचने के लिए यह सब करवाया. बात सच ही होगी इसलिए चैनल का रिपोर्टर तिलमिला गया.

पनारू सरदार कहते हैं कि जब वही घटना उन्होंने टीवी पर देखी तो लगा पूरा बनारस जल रहा है. 400 मिलीलीटर पेट्रोल और कैमरे की कलाकारी से उस पत्रकार ने एक खबर पैदा कर दी. दिल्ली प्रसारण केन्द्र उसे दिनभर चलाता भी रहा. और अब आप भी जान ही गये होंगे छोटे शहरों में अपने आप को साबित करने के लिए रिपोर्टर कैसे खबरों को पैदा करते हैं. पनारू सरदार हतप्रभ हैं कि ऐसा भी हो सकता है क्या?

6 thoughts on “पत्रकारिता का एक आयाम यह भी है

  1. सही!!
    पनारू सरदार और उन जैसे बहुतेरे नागरिक भले ही हतप्रभ होते रहें पर मीडिया से जुड़े करीब करीब सभी लोग जानते हैं किबिलकुल होता है आजकल ऐसा। पहले होता था या नही पर अब तो होता ही है! खासतौर से टी वी चैनलों की बाढ़ आने के बाद से खबरें , खासतौर से सनसनी फैलाने वाली खबरें ढूंढी कम और गढ़ी या पैदा ज्यादा की जाती है! कुछ तो उपर वालों का प्रेशर और कुछ रिपोर्टर के नाम बनाने/चलाने की चाहत के चलते।

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  2. संजयजी
    पनारू सरदार को कहिए किसी दूसरे चैनल पर ये कहानी सबको जरूर बताएं। या प्रेस कांफ्रेंस करके बताएं। मुझे भी शक हुआ था कि ये इतनी बड़ी घटना तो नहीं थी ऐसी हल्की-फुल्की तोड़फोड़ तो अकसर होती रहती है। एक छिपी सच्चाई ये भी बताई जाती है कि मुकेश अंबानी और मायावती के बीच कुछ बिजनेस डील नहीं हो पाई। नहीं तो, मायावती सरकार ने तो पूरी कृषि नीति ही अंबानी के लिए ही बनाई थी जो, वापस हो गई। और, कमाल ये है कि अभी भी धड़ल्ले से बिग बाजार उत्तर प्रदेश में चल रहा है। उससे कानून व्यवस्था को कोई खतरा नहीं है।

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  3. संजय जी,बहुत अच्छी पोस्ट लिखी है।मीडीया के इस कार्य को जानकर लगता है अब सच,और झूठ को को समझना बहुत मुश्किल होता जाएगा,आम लोगो के लिए।

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  4. तो असली कहानी यह थी

    धो डाला आपने तो मीडिया वालों को

    शरम करो भई ऐसी भी क्‍या सैटिंग वाली पत्रकारिता

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  5. विश्‍वास नहीं हो रहा है कि हमारी जमात के लोग इतने गिर गए हैं, यदि चैनल का नाम बताते तो अधिक अच्‍छा होता

    आशीष

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