तो आप माखनलाल जी से ही मिलवा दीजिए

कोई दो साल पहले एक लड़का और एक लड़की हाथ में टीवी पत्रकारिता का चोंगा लिए माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नोएडा कैम्पस में आ धमके. लड़की को खबर लगी थी कि कैंपस में कुछ धांधली जैसी बातें हो रही हैं इसलिए एक न्यूज बनाई जा सकती है. पूछताछ करते हुए ये पत्रकार द्वय भवन के बेसमेंट में जा पहुंचे जहां उनकी मुलाकात हमारे मित्र अनिल पाण्डेय से हो गयी. उन दिनो अनिल पाण्डेय वहां पढ़ाते थे. लड़कीनुमा पत्रकार ने अनिल पाण्डेय से कहा कि आपके कोई सीनियर यहां है, मुझे उनसे मिलना है. जाहिर है अनिल पाण्डेय ने पूछ लिया क्या काम है? उस लड़की ने कहा कि वो आपको नहीं बताएंगे आप अपने डायरेक्टर वगैरह से मिलवा दीजिए. अनिल पाण्डेय ने कहा कि यहां तो अभी कोई सीनियर नहीं है. आप चाहें तो मुझसे बात कर सकती हैं. लेकिन उस लड़कीनुमा पत्रकार ने पाण्डेय जी से बात करने में फिर भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

उसने कहा कि अगर कोई डायरेक्टर वगैरह नहीं है तो आप माखनलाल जी से ही मिलवा दीजिए. हम उनसे ही बात कर लेंगे. उसे लगा कि जिसके नाम पर संस्थान है वह कहीं न कहीं तो होगा ही. अब पाण्डेय जी को काटो तो खून नहीं. उस लड़की की इस इच्छा का वे क्या करें कि माखनलाल जी से ही मिलवा दीजिए. उनकी हंसी फूट पड़ी और कहा कि आपको माखनलाल जी से मिलने के लिए तो स्वर्ग में जाना पड़ेगा वे नोएडा कैम्पस में तो कभी आये नहीं. आश्चर्य देखिए अब भी उस लड़की को तनिक भी झेंप महसूस नहीं हुई. उसे नहीं मालूम कि माखनलाल कौन थे, उसे यह भी नहीं मालूम कि पत्रकारिता क्या होती है. लेकिन उसे यह मालूम था कि आपके हाथ में एक चोंगा आ जाए तो आपको कैसा व्यवहार करना चाहिए.

अनिल पाण्डेय पत्रकारिता पढ़ाते थे. इस घटना से उन्हें सदमा ही लगा, लेकिन देश की उस हकीकत से भी सामना हुआ जिसे मुख्यधारा की पत्रकारिता स्वीकार नहीं करती. देश के हर खित्ते और गली मुहल्ले में ऐसे दर्जनों अखबार पत्रिकाएं निकलती हैं जो शुद्ध रूप से धमकी देने, रौब झाड़ने, पुलिस की दलाली करने के काम आती हैं. ये पत्रकार लोग न केवल हर अनर्गल काम करते हैं बल्कि पुलिसवाले इनसे डरते भी हैं. समाज का एक बड़ा तबका इन्हें किसी भी स्थापित पत्रकार से ज्यादा महत्व देता है. इसलिए नहीं कि वे कोई मूल्य आधारित पत्रकारिता कर रहे हैं बल्कि इसलिए जरूरत पड़ने पर यह स्थानीय पत्रकार उनके बड़े काम आता है.

8 thoughts on “तो आप माखनलाल जी से ही मिलवा दीजिए

  1. लेओ; जब स्वर्ग का एड्रेस पूछा होगा होनहार बाला ने तो अनिल पांड़े जी ने क्या पता बताया?

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  2. सहमत!!

    आए दिन कोई न कोई टीन एजर यह कहते हुए टकरा जाता है कि भइया कहीं से प्रेस कार्ड बनवा दो न, बहुत काम आता है।

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  3. यह मेरे लिए काफी दुखदायी खबर है, पहला कारण यह है कि मैं भोपाल के इसी कालेज के कैंपस से निकला हूं और दूसरा वह लड़की मेरी हमउम्र थी

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  4. Afsos…
    main bhi usi university se apna graduation kiya hun isiliye…
    aur ashish ji ki hi tarah usi youths me se aata hun..
    magar ye ek kadvi sachchai bhi hai..

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  5. जिस दिन ये पत्रकार वहाँ गए थे, उसके बाद वाले तीन-चार दिन का रेकॉर्ड देखा जाय…हो सकता है इस लड़की ने अपने चैनल पर माखन लाल जी का इन्टरव्यू प्रसारित करवा दिया हो……:-)

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  6. भयंकर त्रासदी.
    मुझे लगता है आज के हर तीसरे पत्रकार का यही हाल है.
    सनसनी और बस सनसनी उसके आगे सब कुछ हाँ सब कुछ बौना.
    किसी विषय पर न कोई जानकारी होते हुए भी उसमे सनसनी खोजकर उसे बेचना.
    भारतीय पत्रकारिकता एक बड़े भयंकर संक्रमण के दौर से गुजर रही है.

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  7. ये होनहार पत्रकार बच्‍चे आजकल किस चैनल में हैं….
    (या किस चैनल में नहीं हैं, सभी में तो हैं)

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