एनडीटीवी दफ्तर में बैन है "मोहल्ला" और "कस्बा"

अविनाश का मोहल्ला और रवीश कुमार का कस्बा ब्लागजगत के जाने-पहचाने नाम है. संयोग से दोनों ही देश देश के प्रतिष्ठित समाचार चैनल एनडीटीवी में काम करते हैं. देश-दुनिया में कहीं भी मोहल्ला और कस्बा भले ही दिख जाए लेकिन उनके अपने ही दफ्तर में ये दोनों ब्लाग प्रतिबंधित हैं. आरोप है कि इनके ब्लाग के कारण दफ्तर में काम-काज का माहौल प्रभावित होता है.

अविनाश शायद ऐसे पहले टीवी पत्रकार हैं जिन्होंने हिन्दी ब्लाग की शुरूआत की और लगातार बने रहे. लोगों से जुड़े भी और लोगों को जोड़ा भी. जब अविनाश ने ब्लाग लिखना शुरू किया था उस समय अंग्रेजी का एक ब्लाग “वार फार न्यूज” पत्रकारों के बीच काफी चर्चित था. लेकिन अविनाश ने वार फार न्यूज वाली ब्लागिंग शैली अपनाने की बजाय अपना नया रास्ता बनाया. जनवरी 2007 में अविनाश ने ब्लाग शुरू किया और उसके दो महीने बाद मार्च में रविश कुमार ने कस्बा लिखना शुरू किया. देखते ही देखते दोनों शीर्षस्थ हिन्दी ब्लागरों में शामिल हो गये.

अविनाश ने मोहल्ला को एक शक्ल देना शुरू किया और दफ्तर में उन लोगों से भी लिखवाना शुरू किया जो बोलने के अभ्यस्त थे. मसलन अभिषार शर्मा, आरफा खानम और पंकज पचौरी. दफ्तर में ब्लाग का माहौल बन गया. लेकिन अचनाक ही मोहल्ला को एनडीटीवी में बंद कर दिया गया. यह एनडीटीवी का दिबांग युग था. कहते हैं शीर्ष स्तर पर हस्तक्षेप के बाद दो महीने बाद मोहल्ला की आईपी एनडीटीवी दफ्तर में दोबारा खोल दी गयी थी.

लेकिन दिबांग के जाने के बाद नये क्षत्रपों ने एक बार फिर ब्लागिंग को टेढ़ी नजर से देखा और इस बार दो ब्लाग बंद हुए. अविनाश का मोहल्ला और रविश का कस्बा. पिछले चार महीनों से ये दोनों ब्लाग एनडीटीवी दफ्तर में बैन हैं.

6 thoughts on “एनडीटीवी दफ्तर में बैन है "मोहल्ला" और "कस्बा"

  1. खबर बुरी है लेकिन कई बार मुझे खुद लगता है कि इस ब्‍लॉग के कारण कामकाज जरुर प्रभावित होता है, यह मेरा अपना अनुभव है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि ब्‍लॉग पर ही प्रतिबंध लगा दिया जाए

    Like

  2. बिलकुल सही है, दफ़्तरों से ब्लॉगिन्ग करना रोकने के लिये बहुत जगह वर्ड प्रेस और ब्लॉगस्पॉट प्रतिबन्धित हैं।

    Like

  3. बिलकुल सही है, दफ़्तरों से ब्लॉगिन्ग करना रोकने के लिये बहुत जगह वर्ड प्रेस और ब्लॉगस्पॉट प्रतिबन्धित हैं।

    Like

  4. ह्म्म्म,
    ब्लॉग भले ही एक आवाज़ हो लेकिन प्रोफ़ेशनल जगहों पर इससे काम पर असर तो पड़ेगा ही अत: प्रतिबंध लगना स्वभाविक है।

    Like

  5. घंटों की खटाऊ चाकरी के बीच अगर कोई दो बार क्लिक कर इन ब्लॉगों पर कुछ अपना सा पढ लेता है तो बुरा क्या है? और ये काम प्रभावित करने वाला तर्क तो रहने ही दो गुरुओ…. अगर किसी को काम न करना हो ओर प्रभावित भी करना हो तो उसके लाख अन्य बहाने हैं…. शेम शेम एनडीटीवी शेम शेम

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s