ऐ मेरे वतन के लोगों

हमारे इलाके में एक बार गणतंत्र दिवस तीन दिन पहले आ जाता है, फिर तीन दिन बाद दोबारा उसी रास्ते पर कदमताल करता है. आज 23 जनवरी है और गणतंत्र दिवस परेड की फुल रिहर्सल भी. यह रिहर्सल इंडिया गेट से शुरू होकर लालकिले तक जाती है. अब क्योंकि मैं इसी बीच दरियागंज में रहता हूं तो गणतंत्र दिवस की झलक मुझे एडवांस में मिल जाती है. पहले सेना के लोग कदमताल करते हुए जाते हैं. फिर और भी इसी तरह की कुछ नाटक नौटंकी होती है और आखिर में राज्यों की झांकियां निकलती हैं.

देश को गणतंत्र साबित करने के लिए शायद यह सब जरूरी होगा इसीलिए हर ऐसा ही होता है. कम से कम सात सालों से मैं लगातार यही देख रहा हूं. यह परेड अकेले नहीं आती. दरियागंज जो कि बहुत भीड़-भाड़ वाला और संवेदनशील इलाका है इसलिए पुलिस की सक्रियता बहुत बढ़ जाती है. एक हफ्ते पहले से घरों और दुकानों की छानबीन शुरू हो जाती है. लिस्ट बनती है. वेरीफिकेशन होता है. और देशभक्ति का रंग चढ़ाने के लिए लता मंगेशकर को काम पर लगा दिया जाता है. कहते हैं उनका “ऐ मेरे वतन के लोगों” वाला गाना सुनकर नेहरू जी की आखों में आंसू आ गये थे, इसलिए दिल्ली पुलिस हर साल यही रिकार्ड दिन-रात बजाती है. दिल्ली पुलिस की प्रेरणा क्या है मालूम नहीं लेकिन इस रिकार्ड के बजने का मतलब हम लोगों के लिए यह होता है कि 26 जनवरी या फिर 15 अगस्त नजदीक है.

दिन में कई बार हवाई गर्जनाएं होती हैं. भांति-भांति के हेलीकाप्टर और जेट प्लेन अभ्यास उड़ान भरते हैं. पहले ही शोरो-गुल में तर यह इलाका इन आवाजों से थोड़ा और अशांत हो जाता है और कुछ बच्चे छतों पर आकर दूर उड़ते इन लौह-पक्षियों को देख लेते हैं, बस. वैसे भी इस इलाके में सजीव पक्षियों का कलरव सुनाई नहीं देता.

फिर जगह-जगह रास्तों को रोक दिया जाता है. दिल्ली पुलिस के अधिकांश जवान डंडा फटकारते सुरक्षा के पुख्ता होने का सबूत देते हैं. उसे ही रोकते हैं जिससे किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं हो सकता. अगर आप बातचीत करेंगे तो पुलिसवाला कहेगा कि क्या करें, ड्यूटी है. यानी सुरक्षा हो न हो उसे यह दिखाना है कि वह अपना काम कर रहा है.

दो बजते-बजते यह सब रूक जाता है. परेड जाती तो है पैदल लेकिन आती कैसे है इसका रहस्यभेदन आज तक नहीं कर सका. सोचता हूं अगर वे लोग गाड़ियों में बैठकर वापस जाते हैं तो जाने के लिए भी ऐसा ही कुछ तरीका निकाल लेना चाहिए. सरकार का बहुत सारा पैसा भी बचेगा और गणतंत्र दिवस के उत्सव की खानापूर्ति भी हो जाएगी. जहां तक जज्बा पैदा करने का सवाल है उसके लिए लता मंगेशकर जी का गाना तो बज ही रहा है “ऐ मेरे वतन के लोगों………

2 thoughts on “ऐ मेरे वतन के लोगों

  1. इन वतन के लोगों की वजह से हम भी आज ट्रैफिक जाम में फंसे रहे जी.

    Like

  2. सही कहा। गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल के चक्कर में हम जैसे हजारों-लाखों लोग हर साल परेशान होते हैं। रिहर्सल के दौरान राजपथ पार करने पर पाबंदी के कारण बदले हुए रूट के कारण काफी वक्त बर्बाद होता है और पैदल चलने वाले या बसों से यात्रा करने वाले लोग बहुत परेशान होते हैं। आज मैं इस परेशानी से बचने के लिए दो घंटे देर से ऑफिस के लिए निकला।

    गणतंत्र दिवस परेड की इस नुमाइशी कवायद से भला कौन-सा राष्ट्रहित सधता है, मुझे नहीं समझ आता। हां, यह जरूर है कि करोड़ों रुपये की कमाई हर साल इसके इंतजाम से जुड़े अफसरों और ठेकेदारों को होती है। बेहतर हो कि गणतंत्र दिवस की यह परेड सांकेतिक रूप से ही हो और पहले से ही बदहाल दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था से परेशान आम लोगों को कड़क सर्दी के इन दिनों में और ज्यादा परेशान न किया जाए।

    यदि यह सारा तामझाम नहीं होगा तो इस अवसर पर आतंकवादी वारदातों से जुड़े सुरक्षा जोखिम भी कम हो जाएंगे। कम से कम इतना तो हो ही सकता है कि परेड रिहर्सल दिल्ली के बाहर किसी कैंट एरिया में किया जाए और केवल गणतंत्र दिवस का मुख्य आयोजन राजपथ पर किया जाए।

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s