माफिया, पुलिस और न्यूज माफिया

परसों देर रात राजवीर सिंह की हत्या हो गयी. कल दिन-रात टीवी वाले हल्ला मचाते रहे. हल्ला मचाने में कोई हर्जा भी नहीं था. एनडीटीवी इंडिया से बात करते हुए रिटारर्ड पुलिस अफसर किरण बेदी ने कहा कि जब वे इंटेलिजेंस सेल की प्रमुख बनाई गयीं तो 48 घंटे के अंदर स्पेशल सेल को उनके विभाग से अलग कर दिया गया. उन्होंने पूछा ऐसा क्यों किया गया यह बहुत अनहोनी बात नहीं है. किरण बेदी का कहना था कि राजवीर सिंह एण्ड कंपनी ने ऊंचे अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसा करवा लिया था.

असल में पुलिस के बारे में एक कहावत है कि वही अपराध (आतंकवाद नहीं) होते हैं जिसकी पुलिस इजाजत देती है. जाहिर है अपराधियों और पुलिस के बीच एक गढजोड़ रहता है जो दोनों को फायदे में रखता है. किरण बेदी की मानें तो राजबीर सिंह उसी कड़ी का एक हिस्सा था.

खैर, जांच-पड़ताल में क्या सामने आता है पता नहीं लेकिन हर मौके को टीआपी में कैसे बदल दिया जाए इसके लिए हमारे न्यूज (आप न्यूड भी कह सकते हैं) चैनलों में से एक इंडिया टीवी ने कमाल कर दिया. उसने धूम-धड़ाके के साथ यह दिखाना शुरू कर दिया कि असल में हत्या किसी बंटी पाण्डेय नामक अपराधी के दो लोगों ने किया. टीवी ने बंटी पाण्डेय का महिमामण्डन करते हुए बताया कि ये कोई मामूली आदमी नहीं हैं ये छोटा राजन के खास आदमी हैं. बकौल इंडिया टीवी क्योंकि राजवीर सिंह भी छोटा राजन गिरोह के लिए काम करता था इसलिए दोनों में दुश्मनी चल रही थी. बड़े दिनों से बंटी पाण्डेय ताड़ रहा था कि कब मौका मिले और कब वह राजबीर सिंह को मार गिराये. आखिरकार मौका मिल गया और राजबीर सिंह बंटी पाण्डेय का शिकार हो गया.

अब अंदरखाने की खबर सुनिये. बंटी पाण्डेय की राजबीर से दुश्मनी जरूर थी लेकिन इस बात के कोई संकेत नहीं है कि राजबीर सिंह की हत्या में उसके किसी आदमी का हाथ है. असल में बंटी पाण्डेय ने इस मौके का उपयोग किया और इंडिया टीवी ने भी. राजबीर हत्याकाण्ड से बंटी पाण्डेय ने अपनी रेटिंग बढ़ा ली और इंडिया टीवी ने अपनी टीआरपी. बिना इस बात को जांचे कि क्या बंटी सही बोल रहा है इंडिया टीवी ने उसे सही साबित करके घंटों अपनी टीआरपी बनाए रखी. सबको मालूम है कि यह सब लंबी जांच का विषय होता है और जब तक जांच ठीक से शुरू होगी कौन पलटकर पूछने जाता है कि आपने गलत खबर क्यों दिखाई?

उधर बंटी पाण्डेय ने भी इंडिया टीवी का वैसे ही उपयोग कर लिया जैसे एक नाचनेवाली लड़की राखी सावंत करती रही है. अब बंटी का अपराध जगत में नये सिरे से रौब कायम हो जाएगा. उसकी वसूली इत्यादि ढर्रे पर आ जाएगी. क्यों न हो आखिरकार एक टीवी ने उसे अपराध का हीरो जो बना दिया. क्यों जी इंडिया न्यूड चैनल वालों क्या बोलते हो?

4 thoughts on “माफिया, पुलिस और न्यूज माफिया

  1. दुसरी जिंदगी जीयें- ये सच मे बहुत अच्छा है और ईस्मे आप वो सब कर सकते है जो आप अपनी लाईफ मे नही कर सके है और अपना घर,जमीन, बसा और खरीद सकतें है। आपके रजीस्टर कर्ते ही आपके नाम का एक अवतार पैदा हो जाता है। ये सच मे बहुत मजेदार है। एक बार देखें जरुर की ये कहां और किस साईट पर रजीस्टर करना है। और कैसे चलता है।

    ये रहा लींक —->>

    http://kunnublog.blogspot.com/2008/03/blog-post_26.html

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  2. मुझ सहित अक्सर आम भारतीय सोचता है कि यदि पुलिस न हो तो अपराधों में भरी कमी आ जाएगी। सक्षम पुलिस कर्मियों की आमदनी का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। एक सब इंस्पेक्टर 40 से भी अधिक भूखंडों, कार-बसों आदि का मालिक हो सकता है…और शाही दैनिक खर्च भी। आमजन तो हर तरफ़ से पिसने के लिए ही बना है!

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  3. मुझ सहित अक्सर आम भारतीय सोचता है कि यदि पुलिस न हो तो अपराधों में भरी कमी आ जाएगी। सक्षम पुलिस कर्मियों की आमदनी का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। एक सब इंस्पेक्टर 40 से भी अधिक भूखंडों, कार-बसों आदि का मालिक हो सकता है…और शाही दैनिक खर्च भी। आमजन तो हर तरफ़ से पिसने के लिए ही बना है! सोचिए, किसकी आज़ादी, कैसी-कैसी आज़ादी!

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