गूगल कब चाहता है कि हिन्दी बढ़े

आमतौर पर मैं हिन्दी में खोज दो कारणों से करता हूं. एक, मैं जो लिख रहा हूं उसको गूगल क्या तवज्जो दे रहा है, दो और लोग उन विषयों पर क्या लिख रहे हैं या फिर उस विषय में हिन्दी में कौन सी जानकारियां आ रही हैं. कोई चार-छह महीना पहले ऐसा नहीं होता था लेकिन इधर कुछ दिनों से गूगल मेरी हिन्दी खोज पर एक सुझाव चिपका देता है.

Tip: Search for English results only. You can specify your search language in Preferences

मैं भला केवल अंग्रेजी में क्यों खोजने लगा. इसलिए जब प्रेफरेंस में गया तो पाया कि वहां हिन्दी भाषा है ही नहीं. यानी हिन्दी और अंग्रेजी को मिलाकर खोज का कोई तरीका आप अपने कम्प्यूटर पर सेट करना चाहें तो गूगल कोई मौका नहीं देता. बाकी भाषाओं को आप अंग्रेजी के साथ जोड़ सकते हैं.

यह तो है गूगल का हिन्दी प्रेम. कुछ लोग सीना पीट-पीटकर गूगल की झंडी गाड़ते हैं मानों वह न हो तो हिन्दी का भला न हो. मैं देख रहा हूं कि याहू का हिन्दी सर्च गूगल से बेहतर हो रहा है. फिर सोचता हूं गूगल को क्या दोष देना. वह तो भीमकाय कंपनी है. उसके लिए कोई एक भाषा क्या मायने रख सकती है. लेकिन उन हिन्दी वालों का क्या जो मौका मिलने पर भी भाषा को कविता-कहानी से ऊपर उठने ही नहीं देते.

कोई हिन्दी में खोजे भी तो क्या?

13 thoughts on “गूगल कब चाहता है कि हिन्दी बढ़े

  1. … उन हिन्दी वालों का क्या जो मौका मिलने पर भी भाषा को कविता-कहानी से ऊपर उठने ही नहीं देते।
    संजय भाई, बड़ी गहरी बात कही है आपने। हम सभी हिंदी वालों को इस पर गहराई से सोचने की जरूरत है।

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  2. फिलहाल हम आप जिस बात का प्रचार कर सकते हैं वह यह कि गूगल की इंटरफेस लैंग्वेज अगर हिन्दी रखी जाये तो सर्चबाक्स में रोमन में टाईप करने पर वह हिन्दी में बदल देता है. बकौल गूगल उसका गूगल आपकी भाषा में वाला कार्यक्रम हिन्दी में लगभग पूरा हो चुका है. फिर खोज में हम अंग्रेजी के साथ हिन्दी को क्यों नहीं जोड़ सकते?

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  3. संजय जी,

    आप विस्फोट नामक वैब पत्रिका चला रहे हैं, क्या आप बता सकते हैं, आपकी वैब पत्रिका की भाषा किसी रोबोट के लिए क्या है।

    यह टैग बताता है सर्च इंजन को भाषा

    <meta http-equiv="Content-Language" content="en">

    आप का डैवलपर इसे डिफॉल्ट (lang=”en-US”) छोड़ रहा है,

    यही हाल सब हिन्दी साईटों का है,

    इसी तरह फीड की भाषा भी लिखी जा सकती है।

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  4. विपुल जी थोड़ा और सरल और विस्तार से बताईये. इस लैंग्वेज को कैसे बदला जा सकता है?

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  5. संजय जी बाजार में उतरने के बाद प्रेम और मोह जैसी चीजे थोडी छोटी पड़ जाती है. इस बाजार में जब प्रेम ही बिकने लगे तो और चीजो की क्या बात है. बाकी सब चीजे तकनिकी है अगर गूगल को लगा की इसे जोड़कर भी पैसा बनाया जा सकता है तो वो भी आपको मिल जाएगा. ये पैसे का खेल है संजय जी

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  6. क्या गूगल को विप्रो, टीसीएस और इन्फ़ोसिस से काम नहीं पड़ता? यदि पड़ता है तो क्या ये कम्पनियाँ अपने प्रभाव(?) का इस्तेमाल हिन्दी को आगे बढ़ाने में करेंगी? या दूसरा रास्ता – ये तीनों मिलकर ही हिन्दी में एक खोज इंजन बनायें जिसे आगे चलकर गूगल इनकी शर्तों पर खरीद ले… आखिर इतना पैसा कमाया है तो क्या ये लोग हिन्दी के लिये कुछ नहीं करेंगे?

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  7. सुरेश जी आप तो सैंटी हो रहे हैं. इन तीन कंपनियों को भाषा से इतना ही मतलब होता तो न जाने आज भारत तकनीकि के मामले में कहा होता. ये लोग तो सर्विस प्रोवाईडर हैं. बस. इसके आगे इनकी बुद्धि शायद काम नहीं करती.

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  8. आप जिस ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं, वह हिन्दी में है? आपका ब्राउजर हिन्दी में है? ब्लॉगर में भाषा हिन्दी चुनी हुई है?

    यह सब हिन्दी में उपलब्ध है. पहले उपयोग तो बढ़े. महज हजार लोगो के लिए कोई करोड़ों के संसाधन नहीं झोंकने वाला.

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  9. पिछले दो हफ्तों में गूगल से हिन्दी में सर्च से आने वाले पाठकों की संख्या में तेजी से गिरावट हुई है. लगता है कि एडसेन्स विज्ञापन के मद्देनजर गूगल ने हिन्दी वेबसाईट के प्रति अपनी सर्च में कुछ परिवर्तन किया है.

    जबकि याहू सर्च से हिन्दी में आने वाले पाठकों की संख्या बढ़ी है.

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  10. @संजय जी, मेरे सवाल मूलभूत हैं. आप थोड़ा और गहराई से सोचिए.
    @मैथिली जी स्पष्टीकरण देकर अच्छा किया आपने. अब उपाय पर भी कुछ बात करिए.

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  11. विण्डोज़ एक्स पी और विस्ता दोनो हिन्दी में उपलब्ध हैं
    वहाँ वह पूछते हैं, “अंग्रेजी डाउनलोड भी दिखाएँ”। हममें से कितने लोग हिन्दी वाला विंडोज़ काम में लाते हैं?

    लोग गूगल में हिन्दी शब्दों की खोज करते हैं, पर गूगल की “वरीयताएँ” में जा के सम्वाद भाषा बदल के हिन्दी भी नहीं करते, तो क्या गूगल को यह कहने का अधिकार नहीं है कि “हिन्दी वाले कब चाहते हैं कि हिन्दी बढ़े”?

    कोई हिन्दी में खोजे भी तो क्या? – सही सवाल है – पर क्या इसमें दोष गूगल का है? या याहू का? या इन्फ़ोसिस, विप्रो या टीसीऍस का? ये सब संगठन चिड़ियों को दाना डाल के उन पर नज़र रखने में माहिर हैं।

    ज़ाहिर है, प्रयोग नहीं होगा, तो “अंग्रेजी डाउनलोड भी दिखाएँ” स्वतः ही “सर्च फ़ॉर इङ्ग्लिश रिज़ल्ट्स ऑन्ली” में बदल जाएगा, किसी भाषागत पूर्वाग्रह के तहत नहीं, आँकड़ों के आधार पर।

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