एकोहम् बहुस्याम

मैंने सहोदर ब्लागिंग का रास्ता पकड़ा है तो उसके लिए कुछ अनुशासन सबसे पहले अपने ऊपर लागू किये हैं. 

1. मेरा मानना है कि समाज के काम में किसी व्यक्ति विशेष का फायदा नहीं जुड़ना चाहिए. मैं यह नहीं कहता कि लोग ऐसा करें ही लेकिन मुझे यह ठीक नहीं लगता. इसलिए सहोदर ब्लागरी की शुरूआत करते ही मैंने विस्फोट ब्लाग से सभी प्रकार के विज्ञापन हटा दिये. यह मेरा निजी अनुशासन है. इसके पीछे न कोई आदर्शवाद है और न ही कोई महान हो जाने की ललक. सहोदर ब्लाग की कमाई या तो सबमें बंटनी चाहिए (जिसका अभी कोई तरीका नहीं है) या तो फिर ऐसा कुछ वहां होना नहीं चाहिए जिससे किसी एक का हित सधता हो.

2. मैंने वह खोज इंजन भी हटा दिया है जिसके जरिए खोजने पर कुछ सेंट-पाई एडसैंस के खाते में जुड़ जाता है. इसकी जगह मैंने थोड़ी मेहनत करके ऐसा खोज बाक्स लगाया है जिसमें उन सभी ब्लागरों के पते शामिल हैं जो विस्फोट के मित्र हैं. गूगल कस्टम सर्च इंजन में आप भी अपने सहोदर ब्लागरों के ब्लाग यूआरएल डाल सकते हैं. इसमें एक बात हमको यह अच्छी लगी कि हम उन ब्लागरों को तनिक सा ही सही मौका दे पाते हैं कि खोजबीन में उनका एक अलग खित्ता हो. 

बस यही दो बातें हैं जो सहोदर ब्लागरों के लिए मैं अब तक सोच पाया हूं. आगे और कुछ नया सोच सका तो जरूर करूंगा. पुनः जो जुड़े हैं उनका धन्यवाद. जो जुड़ने की सोच रहे हैं उनका आभार और जो सोच सकते हैं उनका भी स्वागत. 

आप यहां कुछ भी लिखने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन लिखने के पहले एक बार जरूर सोचें कि क्या जो आप लिख रहे हैं
उसके लिए आपकी आत्मा गवाही दे रही है? यह किसी भी लेखक या रिपोर्टर का न्यूनतम आत्मानुशासन होना ही चाहिए.
आखिरकार आपके पैरों में इंसानियत की पगड़ी रखी है. आप चाहें तो ठोकर मार दें, आप चाहें तो उसे उठाकर 
उसके सिर पर पुनः स्थापित कर दें जिसके सिर से वह उछाली गयी है.  

5 thoughts on “एकोहम् बहुस्याम

  1. अब तो मै भी जूड गया हूं(पहले पता नही था की एक ब्लोग्गर दुसरे ब्लोग से जूड सक्ता है)

    पहले मैने भी एक साथ कई ईंवीटेसन भेजे थे पर जब एक ईंवीटेसन एक्सेपट हूआ तो मेरा प्रोफाईल का ईमेज और लीखी बाते नही दीखाई दे रही थी ईस लीये रीमूभ कर दीया और जीसे भी ईंवीटेसन भेजे थे वो केंसल कर दीया।

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  2. संजय भइया,”कुछ” भी लिखने की स्वतंत्रता मत दीजिये वरना आपको संपादन करना पड़ेगा। मुझे पूरी उम्मीद है कि जितने लोग जुड़े हैं उनमें से कोई भी ऐसा नही है जो इन्सानियत की पगड़ी उछाले,कुन्नू सिंह जी और इष्ट देव जी ने जैसी तस्वीरों से खुद को व्यक्त किया है उनसे जरा सा भय है बाकी तो सब ठीक है(अरे भाई लोग मजाक ही समझना वरना हमले की मुद्रा में आ जाएंगे):)

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  3. नीयत नेक हो संजयजी तो सदविचार आते ही रहते हैं. कुछ हम लोग भी मदद करेंगे आपकी सहमति से . अब तक विस्फोट के लिए जो सोचा है ठीक सोचा है . विस्फोट की सदस्यता बढ़ती रहे, अच्छे और काबिल लोग जुड़ते रहें , यही तमन्ना है.
    वरुण राय

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