इस तालिब का करें क्या?

रफ्ता-रफ्ता राज ठाकरे पूरे तालिब होते जा रहे हैं. उत्तर भारतीयों के प्रति नफरत फैलाने के अपने प्रयासों पर अदालतों से झिड़की खा चुके राज ठाकरे सुधरते दिखाई नहीं दे रहे हैं. चार दिन पहले राज ठाकरे ने फिर कहा था कि फिल्मों में 80 परसेंट काम केवल स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए. अबकि यह बात आरएसएसवालों को भी ठीक नहीं लगी. आरएसएस की मुंबई शाखा ने नाम तो
नहीं लिया है लेकिन राज ठाकरे की ओर संकेत करते हुए कहा है कि भैया अब तुम हद पार कर रहे हो. ऐसे तो भगवा 
राजनीति भगई बांधने के काम की भी न रह जाएगी. इसलिए उधर का काम देखनेवाले आरएसएस के प्रचारक अशोक
कुकड़े ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि यह सब ठीक नहीं है. हम ऐसी कोशिशों का विरोध करते हैं.

असल में राज ठाकरे तालिबानियों के सहोदर हैं. जब अच्छी बातों से राजनीति नहीं कर सके तो वह काम शुरू किया जो चचा से विरासत में उन्हें मिला है. बार-बार यह कहने में कोई दम नहीं कि राज ठाकरे नफरत की राजनीति कर रहे हैं. वह तो करेगे ही. लेकिन अबकी जरा फिल्मों वाली बात करते हैं. मुंबई फिल्म इंडस्ट्री का ऊपरी चेहरा चाहे जो हो अंदरखाने में सारी व्यवस्था यूपी बिहार के हाथ में है. तकनीशियन, लेखक, कैमरामैन सब ओर आपको यूपी बिहार के लोग मिलेंगे. और ये कोई अनपढ़ और भैया लोग नहीं है. ये पढ़े लिखे लोग हैं और बालीवुड को बालीवुड बनानेवाली रीढ़ हैं. 

अब जो लोग यह कहते रहे हैं कि मुंबई में निरक्षर और गंवार उत्तर भारतीय समस्या बन गये हैं इसलिए राज ठाकरे
की बात को एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता अब क्या कहेंगे? क्या अब भी यह कहा जा सकता है कि राज 
ठाकरे मराठी माणुस होनेलायक हैं? क्या शिवाजी के नाम पर ऐसे तालिबानी मानसिकता के लोग राजनीति करेंगे? इस तालिब का करें तो क्या करें? वैसे सरकार को इतना सख्त हो जाना चाहिए कि यह तालिबानी भी नार्थवेस्ट फ्रंटियर (पाकिस्तान) में नजर आये जहां
ओसामा के छिपे होने की खबर है. और राज ठाकरे का बिछड़ा भाई दाऊद भी पाकिस्तान में ही है. तो बस तीनों भाई मिलकर वहीं मौज करेंगे. इसकी यहां इस देश में जरूरत क्या है?

4 thoughts on “इस तालिब का करें क्या?

  1. बहुत अच्छा लीखा और मै तो यही कहूंगा की राज ठाकरे जरा एक बार यू.पी के सडको पर चले जाऎं या फीर सरकार बदलें तब देखीये राजठाकरे कैसे चूप्पी साध लेंगे और साधुवाद बन जाऎंगे।

    Like

  2. दादा,ये तालिब नहीं बस एक गली का खुजैला सा कुत्ता भर है; मैंने देखी है इसकी ताकत कितनी है यू.पी. तो क्या मुम्बई से बाहर जाने के लिये तमाम टानिक लेने पड़ते हैं ठाकरे परिवार के लोगों को….

    Like

  3. संजय भाई,
    ये हैं हमारे राज ठाकरे, ससुर के नाती जो अपने घर के नहीं हुए वो मराठी कहाँ से होंगे. वैसे ये समझ मराठी मानुष को जल्दी ही आएगी, वैसे भी इस ससुर के नाती को कहीं भागने की जरूरत नहीं है. डॉक्टर साब ने सही लिखा की ये खुजली वाला कुत्ता है सो जल्दी ही अपने गली से भी अपने ही चमचों द्वारा निकल दिया जायेगा.

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s