​सच बोल रहे हैं सरताज अजीज

पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक और प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार बुजुर्ग सरताज अजीज इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं। अपने अमेरिका दौरे के दौरान उन्होंने दो महत्वपूर्ण स्टेटमेन्ट दिये हैं। पहला, आतंकवाद पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन नहीं है। सबसे बड़ा दुश्मन है भारत जो रणनीतिक और सामरिक रूप से एक महाशक्ति बनता जा रहा है। उनका दूसरा बयान है कि अफगानिस्तान तालिबान के लीडर पाकिस्तान में हैं।  
दोनों बयान महत्वपूर्ण हैं। पहली बार पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाकर यह सच स्वीकार करने की हिम्मत दिखाई है कि इंडिया पाकिस्तान से बहुत बड़ी ताकत बन गया है। नहीं तो पाकिस्तान के हुक्मरान और बुद्धिमान दोनों यह बात जानते तो हैं लेकिन मानते नहीं हैं। उन्हें लगता है कि जैसे यह मान लेने से पाकिस्तान बनने का मकसद ही खत्म हो जाएगा। चालीस से सैंतालिस के बीच मुस्लिम बुद्धिजीवियों द्वारा सबसे बड़ा जुमला यही सुनाया गया कि हिन्दुओं के साथ रहकर मुसलमानों की तरक्की नहीं हो रही है। आज भी भारत में मुस्लिम राजनीति करनेवाले मुस्लिम नेता यही जुमला बोलते हैं। लेकिन उस जुमले की पाकिस्तान में ऐसी भद्द पिटी है कि पाकिस्तान की सिट्टी पिट्टी गुम है। बंटवारे के लगभग सत्तर साल बाद इक्कीसवीं सदी के इस दूसरे दशक में भारत वहां है जहां पाकिस्तान शायद कभी नहीं पहुंच सकता। 

तो पाकिस्तान रास्ता कहां भटक गया कि जाना था जापान और पहुंच गया चीन? पाकिस्तान के सात दशक के इतिहास पर नजर डालें तो दो तीन मोटी बातें समझ में आती हैं और उनमें सबसे पहली बात यह है कि जिस मजहब की बुनियाद पर पाकिस्तान बना था वह मजहब की पाकिस्तान की तरक्की का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है। जनरल जिया ने जिन्ना के सेकुलर पाकिस्तान में जिस शरीया लॉ की बुनियाद डाली सबसे ज्यादा बेड़ा गर्क उसने किया। अस्सी और नब्बे का दशक जब युद्ध के ढेर से उठकर भारत ने आर्थिक और सामरिक तरक्की की तरफ कदम बढ़ाया तो पाकिस्तान सीधे युद्ध से पीछे हटकर परोक्ष युद्ध की रणनीति पर काम करने लगा। कश्मीर और अफगानिस्तान में की गयी उसकी गलतियां आज उसके ही गले की फांस बन गयी हैं। 

1999 केे कारगिल युद्ध ने भारत को ऐसा झटका दिया कि उसने इतिहास का सबसे बड़ा डिफेन्स मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम शुरू कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि सैन्य मामलों में नब्बे के दशक में भारत से बेहतर पाकिस्तान बहुत पीछे रह गया और भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेन्य ताकत बन गया। नब्बे के दशक में शुरू हुए आर्थिक सुधारों ने भारत को इकोनॉमिक ताकत के रूप में दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा कर दिया है। सवा सौ करोड़ की आबादी के साथ यह उपलब्धि आसान नहीं है। इसलिए सरताज अजीज की पहली बात बिल्कुल सही है कि भारत सामरिक और रणनीतिक रुप से पाकिस्तान से बहुत बड़ा है। लेकिन उनका यह कहना कि भारत की यह बढ़ती ताकत पाकिस्तान के लिए कोई खतरा है। 

असल में तो पाकिस्तान की यह भारत विरोधी मानसिकता ही पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा है। पाकिस्तान बनने के बाद से लेकर आज तक भारत विरोध की बुनियाद पर ही अपनी इमारत बना रहा है। पाकिस्तान को समझना चाहिए कि विरोध कभी ईमारत की मजबूत बुनियाद नहीं हो सकता। लेकिन अगर पाकिस्तान में हुक्मरानों और बुद्धिमानों को सुने तो बड़ी तादात आज भी इसी बुनियाद पर खड़ी है।

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