सऊदी राणा की ख्वाहिश

सऊदी अरब के एक मुस्लिम परिवार में पैदा होनेवाली राणा की ख्वाहिश कुछ ज्यादा नहीं थी। उन्हें अपने मजहब, देश, परिवार, समाज सबसे कोई नफरत नहीं है। बस वे एक सामान्य इंसान की तरह जिन्दगी जीना चाहती थीं। वे बिना बुर्के निकाब और हिजाब के सड़कों पर निकलना चाहती थीं। अपने मन मुताबिक कोई काम करना चाहती थीं, अपने पुरुष मित्र के साथ बात करना चाहती थीं लेकिन उनकी इतनी सी ख्वाहिश उनके अल्लाह रिपब्लिक में पूरी नहीं हो सकती थी। इसलिए उन्होंने एक दिन चुपके से देश, समाज, परिवार सब छोड़ दिया और सऊदी से निकलकर तुर्की पहुंच गयीं। 
जैसे ही तुर्की पहुंची उन्होंने सबसे पहला काम क्या किया जानते हैं? सड़क पर डांस किया। लोगों ने उनका डांस देखा और जो पैसे इकट्ठे हुए उससे उन्होंने अपने पुरुष मित्र के साथ मिलकर नयी जिन्दगी शुरु की। उन्हें किसी अल्लाह या गॉड से कोई शिकायत नहीं है लेकिन वे खुद किसी गॉड/अल्लाह में यकीन नहीं करतीं। इसलिए एक दिन चुपके से काबा में पहुंचकर एथिस्ट रिपब्लिक की पर्ची लहरा दी। उनकी यह पर्ची बाद में फेसबुक पर काफी फेमस भी हुई थी। उन्हें और उनकी सोच को समर्थन तो मिल रहा था लेकिन उन्हे अपने ही बड़े भाई से जान का खतरा भी महसूस हो रहा था जो नहीं चाहता था कि उसकी बहन इस तरह मजहब को नकार दे। 

खतरा तो राणा को तुर्की में भी था कि उनके भाई या घरवालों ने उन्हें खोज लिया तो उन्हें मार देंगे। लेकिन यहां उनकी मुलाकात एक ऐसे समूह से हो गयी जिसने उनकी आजादी के नाम पर किसी तरह ग्रीस पहुंचा दिया। अब वे बेखौफ हैं और अपने मुताबिक एक आजाद जिन्दगी जी रही हैं। जिन्दगी में जद्दोजहद बहुत है लेकिन वे खुश हैं कि वे खुली हवा में सांस ले रही हैं। 

लेकिन राणा अकेली नहीं हैं। जिस संस्था ने राणा की मदद की उसके मुताबिक अकेले सऊदी अरब से हर महीने औसत सौ से सवा सौ पुरुष और महिलाएं इस्लाम का त्याग करके किसी दूसरे देश में चोरी छिपे शरण ले रहे हैं। कुछ ईसाई बन जाते हैं और कुछ फिर कोई धर्म नहीं अपनाते। हालांकि इनमें से ज्यादातर अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं क्योंकि जैसे ही कट्टरपंथी मुसलमानों को यह सब पता चलता है वे ऐसे लोगों को परेशान करते हैं या उनके उपर जानलेवा हमले भी करते हैं। उनका तर्क होता है कि अगर कोई इस्लाम छोड़कर कोई अन्य धर्म अपनाता है तो ऐसे लोगों को इस्लाम में मौत की सजा मुकर्रर है। शायद इसी खौफ की वजह से लोग अपनी पहचान छुपाते हैं। 

राणा को भी खतरा था लेकिन खुली हवा में सांस लेने के लिए उन्होंने यह खतरा मोल उठा लिया और अल्लाह के रहमो करम से वे जिन्दा हैं। सुरक्षित हैं।

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