आतंक और राजनीति का नापाक गठजोड़

हाफिज सईद के साथ शमी उल हक

हमारे यहां इंटिरियर डेकोरेटर होते हैं जो हमारे घरों को सजाते संवारते हैं लेकिन पाकिस्तान में होम मिनिस्टर को इंटिरियर मिनिस्टर कहा जाता है। आंतरिक मामलों के मंत्री। काम वही है जो यहां गृहमंत्री का होता है लेकिन उनको होम मिनिस्टर कहने की बजाय इंटीरियर मिनिस्टर कहा जाता है। कह सकते हैं कि वे एक तरह से देश रूपी घर को सजाने संवारने के लिए जिम्मेवार होते हैं। 
इस वक्त पाकिस्तान के जो इंटिरियर मिनिस्टर हैं उनका नाम है चौधरी निसार खान। निसार खान ने शनिवार को कुछ ऐसे लोगों से मुलाकात की जिनकी चर्चा पाकिस्तान ही नहीं भारत की मीडिया में भी है। मिलनेवालों में सबसे प्रमुख नाम है मौलाना शमीउल हक का। मौलाना शमी उल हक पाकिस्तान के तीसरे “फादर आफ नेशन” हैं। पहले जिन्ना थे। दूसरे मौलाना मौदूदी हुए और तीसरे मौलाना शमी उल हक हैं जिन्हें प्यार से मौमौलना सैंण्डविच भी कहा जाता है। मौलाना शमी उल हक बहुत लो प्रोफाइल रहने वाले आदमी हैं लेकिन ये वो शख्स हैं जिन्होंने पाकिस्तान में तालिबान पैदा किया। इसलिए उन्हें फादर आफ तालिबान भी कहा जाता है। फौज और आईएसआई ने जब जिहादियों के जरिए अफगानिस्तान को कब्जा करने का प्लान बनाया तब शमी उल हक का देओबंदी मदरसा तालिबान का भर्ती केन्द्र बना था।

पंजाब और खैबर के बार्डर पर बना मदरसा “दारुल उलूम हक्कानिया” के तालिब रहे मुल्ला उमर की अगुवाई में अफगानस्तान के कब्जे की जो जंग चली उसकी वैचारिक कमान शमी उल हक के हाथ में ही थी। कब्जा हुआ और आज भी अफगानिस्तान के एक तिहाई हिस्से पर तालिबान का ही कब्जा है। यह सारा खेल जिसकी रहनुमाई में रचा गया वो शमी उल हक ही थे। लेकिन तालिबान के पराजय के बाद शमी उल हक ने पाकिस्तान को ही दारूल हरब बनाने की मुहिम शुरू कर दी। उस वक्त हामिद गुल जिन्दा थे और शमी उल हक ने हामिद गुल और हाफिज सईद को लेकर दिफा ए पाकिस्तान (पाकिस्तान की रखवाली) की मुहिम शुरू की। 

वह मुहिम आज भी जिन्दा है और अपने काम पर है। शमी उल हक पर्दे के पीछे रहकर काम करनेवाले आदमी हैं लेकिन उनका प्रभाव पाकिस्तान के सुन्नी कट्टरपंथियों पर सबसे ज्यादा है। अब उन्होंने इमरान खान की पार्टी के साथ मिलकर नवाज शरीफ की सरकार के विरोध का फैसला किया तो शरीफ सरकार सकपका गयी। शमी उल हक के साथ जो अन्य दूसरे आतंकी समूहों (लश्कर ए झांगवी और अहले सुन्नत वल जमात) के लीडर चौधरी निसार खान से मिलने गये थे वो बीते चुनाव में नवाज शरीफ के साथ थे। जाहिर है अगर वे लोग इमरान खान के साथ मिलते हैं तो पाकिस्तान में इमरान खान बड़ी ताकत बनकर उभरते हैं। 

शायद इसीलिए नवाज शरीफ की सरकार ने अपने इंटिरियर मिनिस्टर को इस काम पर लगा दिया कि जैसे भी हो इन्हें इमरान खान से मिलने से रोके। इमरान खान पहले भी शमी उल हक के मदरसे को बड़ी रकम चंदे में दे चुके हैं ऐसे में शमी उल हक का उनकी तरफ जाना अस्वाभाविक नहीं है। लेकिन शमी उल हक और दूसरी आतंकी तंजीमों के एकसाथ आ जाने से शरीफ सरकार के लिए संकट पैदा होता ही है जिसे रोकने की वे कोशिश कर रहे हैं। 

आखिरी सवाल। यह बात हमारे लिए क्या मायने रखती है? हमारे लिए इसका मायना सिर्फ इतना है कि पाकिस्तान में आतंकवाद और राजनीति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर आपको लगता है कि किसी भी प्रकार के दबाव में आकर पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा तो आप पाकिस्तान को लेकर मुगालते में हैं। पाकिस्तान में आतंकवाद की जो राजनीति है उसमें मुख्यधारा की राजनीति भी उसका एक हिस्सा है, उससे अलग नहीं है। सिक्के का वह पहलू जो हमें नजर आता है लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू वही है जिसे आप आतंकवाद कहते हैं। आतंकवाद होगा दुनिया के लिए, उनके लिए यह उनका इंटिरियर डेकोरेशन है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s