धर्मांतरण हमारा धर्मसिद्ध अधिकार है

​वह जो एक बीमार कौम का देश पाकिस्तान है उसमें सेहत के कुछ लक्षण दिख रहे थे। बीते एक दो सालों में कुछ ऐसे कानून बने जिनके सहारे इस्लाम से दूसरे अल्पसंख्यक धर्मों की सुरक्षा हो सकती थी। बीते महीने नवंबर में पाकिस्तान के सिन्ध प्रांत ने एक कानून बनाया था कि किसी का जबर्दस्ती धर्मांतरण नहीं कराया जा सकता। जाहिर सी बात है “किसी का” से मतलब हिन्दुओं से ही था। सिन्ध के इलाके में जो कुछ गिने चुने हिन्दू (ज्यादातल दलित और आदिवासी) बच गये हैं उन्हें अल्लाह के रास्ते पर लाने की रस्साकसी जारी है। ज्यादातर मदरसे जो अभी तक पंजाब के इलाके में काम करते थे अब सिन्ध के इलाकों में भी फैल गये हैं। ऊंचे पाये के पाजामे तले पंजाब के बाद सिन्ध को रौंदा जा रहा है।

ऊंचे पाये के पाजामे को यह बात नागवार गुजरी कि किसी को अल्लाह के रास्ते पर लाने के लिए जो रास्ते अख्तियार किये जाते हैं उन रास्तों पर किसी तरह की रोक टोंक की जाए। तत्काल अल्लाह का “सच्चा बंदा” हाफिज सईद मैदान में उतर आया और उसने इस कानून को “गैर इस्लामिक” करार देते हुए इसका विरोध करना शुरु कर दिया। उसने ऐलान किया कि सभी मुस्लिम जमातों को इसका विरोध करना चाहिए सो जमाते इस्लामी भी इस गैर इस्लामिक कानून के खिलाफ खड़ी हो गयी। आखिर क्यों न हों? हर साल एक हजार नाबालिग हिन्दू लड़कियों को अगवा करके उन्हें इस्लाम कबूल करवाया जाता है और निकाहनामा पर दस्तखत करवा लिया जाता है। यह शुद्ध इस्लामिक काम है। इसे रोकने के लिए अगर कोई कानून बनता है तो वह पूरी तरह से गैर इस्लामिक कानून ही कहा जाएगा। सच्चे मुसलमानों के मुताबिक नाबालिग लड़कियों का अपहरण और उनका जबरन धर्मांतरण यह शुद्ध इस्लामिक काम है।

बहरहाल, सिन्ध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है। आत्मनिर्वासन के पंद्रह महीने दुबई में बिताकर लौटे आसिफ अली जरदारी ने जमाते इस्लामी को आश्वासन दे दिया है कि बहुत जल्द सिन्ध की सरकार इस कानून को वापस ले लेगी। जितना मन करे लोगों को अल्लाह के रास्ते पर लाइये। हम कौन होते हैं अल्लाह के रास्ते में आनेवाले।

न सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए बल्कि सिन्ध के उदार चरित्र के लिए भी यह खतरे की घण्टी है। यह सिन्ध का ही इलाका है जहां अभी भी कुछ अल्पसंख्यक बचे हुए हैं। अगर इस कानून को वापस लिया गया तो उनके खत्म होते देर नहीं लगेगी। संजोग से या खुशी में जो भी कहिए अल्लाह के नेकबंदों ने इस आश्वासन को सेलिब्रेट करने के लिए कल ही एक चौदह साल की हिन्दू लड़की को अगवा कर लिया और उसको इस्लाम कबूल करवाकर निकाह कर लिया।

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