कश्मीर में नहीं बचा तीसरा रास्ता

​कुछ दिन पहले दो कश्मीरी नौजवान मिले थे। दो तीन दिन साथ थे। दोनों उस अनंतनाग से थे जिसे कश्मीर घाटी में इस्लामाबाद कहा जाता है। मैंने जो कुछ जानना चाहा उसका एक ही जवाब था, कश्मीर घाटी के मुसलमान इस बार भारत के साथ नहीं हैं। पहले केे मुकाबले इस बार हालात ज्यादा खराब हैं। लोग खुलकर आतंकियों का समर्थन भी कर रहे हैं और उन्हें मुजाहिद मानकर उनका बचाव भी कर रहे हैं। 

आज कश्मीर घाटी में जो हुआ है वह उसी तरफ इशारा कर रहा है। जब तक केन्द्र में मोदी सरकार है, तब तक हालात बद से बदतर ही होते जाएंगे क्योंकि इस बार जंग कश्मीर की नहीं, इस्लाम की है। हिजबुल के नये कमांडर ने तो कह ही दिया है, आप यह लड़ाई कश्मीर के लिए नहीं बल्कि इस्लाम के लिए लड़े। इसलिए जंग अब उस जगह पहुंच गयी है जहां उसे पहले दिन से ले जाने की कोशिश हो रही थी। 

जाहिर है सरकार इसको सैन्य ताकत से निपटने की कोशिश करेगी। कर भी रही है। लेकिन सैन्य संघर्ष कश्मीर समस्या का कोई समाधान न कभी था और न कभी होगा। इस वक्त का तात्कालिक समाधान यही है कि सेना को घाटी से पूरी तरह से बाहर निकालकर सीमाओं पर तैनात कर दिया जाए। कश्मीर घाटी को सिर्फ जम्मू कश्मीर पुलिस के हवाले कर दिया जाए। अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी भी न्यूनतम रखी जाए। यह बहुत साहस भरा फैसला होगा लेकिन इसके नतीजे बहुत चमत्कारिक आयेंगे।

अब कश्मीर घाटी में भारत के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। जो कुछ बचाना था वह नब्बे के दशक में ही सरकारों ने खो दिया है। जिहाद और इस्लामिक संघर्ष अगर मुजाहिद करना भी चाहें तो किसके खिलाफ करेंगे? अब वहां मरने के लिए कोई कश्मीरी पंडित नहीं बचा। सेना भी भीतर से बाहर बार्डर की तरफ चली जाएगी तो रही सही कसर भी पूरी हो जाएगी। इसके बाद मुजाहिद (आतंकवादी) खलीफा का शासन कायम करें कि अपना। उनकी बला से। जो हालात होंगे राज्य सरकार उससे निपटेगी।

इसलिए कुछ महीनों में आंतरिक संघर्ष अपने आप खत्म हो जाएगा। इसके साथ सेना के हटते ही आफ्सा भी बेमतलब हो जाएगा जो कश्मीरी लोगों के घाव पर मरहम का काम करेगा। राज्य सरकार से सहयोग बढ़े और कट्टरपंथी इस्लाम को कश्मीर घाटी से बाहर निकालने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बने। इसमें जहां बाहर से आनेवाले काले धन को बंद किया जाए वहीं पाकिस्तान के साथ सभी प्रकार के व्यापारिक रिश्ते खत्म किये जाएं। इन्हीं व्यापारिक रिश्तों की आड़ में हवाला के माध्यम से आतंकियों और अलगाववादियों को धन पहुंचता है। 

अगर यह सब नहीं कर सकते तो धारा ३७० खत्म कर दीजिए। देश के दूसरे हिस्सों से वहां जाकर बसने की इजाजत दीजिए। कश्मीर को आतंकवाद से बचाने के लिए भारत के पास अब कोई तीसरा रास्ता नहीं बचा है।

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