​आहत हुई कश्मीरियत

राजनाथ सिंह के कश्मीरियत वाले बयान पर फेसबुकियत भले हावी हो गयी हो लेकिन हकीकत यही है कि इस बार कश्मीर में हिन्दू तीर्थयात्रियों पर हमले के खिलाफ कश्मीर खड़ा हो गया था। यह वही कश्मीर है जो २००८ में अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन देने के खिलाफ सड़कों पर उतर आया था और हफ्तों लड़ता रहा था। 

इस बार जब अमरनाथ यात्रियों पर हमला हुआ तो कश्मीरी लोगों ने इस ‘कायराना’ हरकत की निंदा की। इसकी कुछ वजहें हैं। एक पूरा कश्मीर कभी अलगाववादियों के साथ न कल था और न आज है। दूसरा, आतंकवादी या जिहादी भी कश्मीरी पंडितों को वहां से निकालने के बाद उन हिन्दू तीर्थयात्रियों या पर्यटकों पर हमला नहीं करते जो कश्मीर घूमने जाते हैं। यह एक तरह का अघोषित नियम है कि पर्यटकों पर हमला नहीं करना है और उन्हें निशाना नहीं बनाना है क्योंकि ऐसा होने पर कश्मीरी मुसलमानों का ही सबसे ज्यादा नुकसान होगा। 

अगर पर्यटक कश्मीर आना बंद कर देंगे तो कश्मीरी अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी। इसलिए जैसे ही अमरनाथ यात्रियों पर हमला हुआ तुरंत फारुख अब्दुल्ला का बयान आ गया कि इससे डरें नहीं और बड़ी तादात में ‘भारतीय लोग’ कश्मीर आयें। महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद पूरी कोशिश कर रहे थे कि कैसे कश्मीर को दोबारा से देश और दुनिया के लिए उसका सबसे पसंदीदा पर्यटक स्थल बना दिया जाए। इसके लिए उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से भी बात की थी कि वो दोबारा से घाटी में फिल्में शूट करने के लिए आये। 

लेकिन आतंकवाद का खौफ लोगों के मन में कश्मीर के प्रति आतंक पैदा करता है और इस साल उसका असर कश्मीर पर दिख रहा है। न तो उतने पर्यटक कश्मीर गये और न ही अमरनाथ यात्रियों का रजिस्ट्रेशन पर्याप्त हुआ है। जाहिर है इसका स्थानीय अर्थव्यवस्था पर आतंकवाद से ज्यादा गंभीर असर पड़ेगा। खबर ये भी आ रही है कि बस पर हमला आतंकवादियों की योजना का हिस्सा नहीं था। वो एक स्थानीय पुलिस चौकी पर हमला करके भाग रहे थे कि रात के अंधेरे में उनके सामने बस आ गयी और उन्होने उस पर हमला बोल दिया। यानी हमला अचानक था और तीर्थयात्रियों पर हमला करने के लिए पहले से प्लान नहीं किया गया था। 

हालांकि जो लोग अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं वो कश्मीर में भारत विरोधी माहौल ही पाते हैं फिर भी अगर हम बीते तीन चार दशकों में कश्मीर के हालात देखें तो पायेंगे कि कश्मीर में एक वह समय भी था जब कश्मीरी मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ चरारे शरीफ दरगाह तक को आतंकवादियों ने निशाना बनाया था। उस वक्त भी पूरा कश्मीर आतंकवादियों के खिलाफ खड़ा हो गया था और आज भी अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले के खिलाफ खड़ा दिखाई दे रहा है। शायद यही वजह है कि इस हमले के बाद कोई आतंकी संगठन जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हुआ क्योंकि आतंकी जानते हैं कि वो हमले की जिम्मेदारी लेंगे तो कश्मीर में मिल रहा थोड़ा बहुत समर्थन भी बंद हो जाएगा।

यही वह कश्मीरियत है जिसका शुक्रिया राजनाथ सिंह ने अदा किया और बाकी देश को जिसे समझने की जरूरत है। 

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