जय शिया राम

बीते एक सप्ताह में शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दो हलफनामा दिया है। पहले हलफनामें में शिया वक्फ बोर्ड ने कहा था कि राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए मस्जिद को आसपास किसी ऐसी जगह पर बना दिया जाए जहां मुस्लिम आबादी हो। दूसरा हलफनामा यह कि यह जो बाबरी मस्जिद है वह मंदिर तोड़कर बनायी गयी थी। 
शिया वक्फ बोर्ड का कहना है कि बाबर के सेनापति मीर बकी शिया थे। उन्होंने जो बाबरी मस्जिद बनाई वह भी शिया मस्जिद थी। 1944 तक शिया समुदाय ही मस्जिद की देखभाल करता रहा लेकिन चौवालीस में अंग्रेजों ने मस्जिद का मालिकाना हक सुन्नियों को सौंप दिया। इसके विरोध में शिया अदालत चले गये जहां साल भर बाद उनकी हार हो गयी। तब से लेकर अब तक बाबरी मस्जिद सुन्नियों की संपत्ति है और वही इसकी लड़ाई लड़ रहे हैं। 

लेकिन यहां शिया वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया गया है उसमें उस सच को स्वीकार कर लिया गया है जो हिन्दू संगठन पहले से कहते आ रहे हैं कि बाबरी मस्जिद मंदिर को तोड़कर बनायी गयी थी। 

आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया द्वारा अब तक पांच बार राम जन्मभूमि का सर्वे करवाया गया है। पहली बार 1970 में और आखिरी बार 2002 में। पांचों ही बार सर्वे इस नतीजे पर पहुंचा कि बाबरी मस्जिद मंदिर को तोड़कर बनायी गयी है। 2002 में जीपीएस का सहारा लिया गया था कि भूगर्भ के भीतर तक स्पष्ट चित्र लिया जा सके। जो नतीजा सामने आया वह यही कि मंदिर के अवशेष मौजूद हैं। लेकिन उस वक्त सुन्नी वक्फ बोर्ड, शिया वक्फ बोर्ड दोनों ने यह कहते हुए नतीजे को खारिज कर दिया कि एएसआई सरकार के प्रभाव में काम कर रही है। 

उत्तर भारत में एएसआई के निदेशक रहे के के मोहम्मद ने पिछले साल अपनी किताब “मैं एक भारतीय” में एक और सनसनीखेज खुलासा किया था कि रामजन्मभूमि मामले को विवाद बनाने में सबसे बड़ी भूमिका वामपंथी इतिहासकारों की है। जब जब हिन्दू मुसलमानों के बीच यह मामला सुलझाने का मौका आया वामपंथी इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों ने बात को बिगाड़ दिया। उन्होंने तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया और मुसलमानों को बहकाया कि वहां कोई राम मंदिर नहीं था। इरफान हबीब, बिपिन चंद्र और रोमिला थॉपर जैसे वामपंथी इतिहासकारों ने यह भ्रम फैलाया कि २५०० साल पहले वहां कोई आदमी की बसाहट नहीं थी और हिन्दुओं ने जैनों और बौद्धों के मंदिर तोड़कर अयोध्या नगरी बसाई।

इन सब बदमाशियों की वजह से वामपंथियों ने अयोध्या में राम मंदिर को इतना संवेदनशील मुद्दा बना दिया कि न सिर्फ मंदिर मस्जिद विवाद उलझता गया बल्कि हिन्दू मुसलमान के बीच खाईं चौड़ी होती गयी। लेकिन अब शिया वक्फ बोर्ड सच बोलने पर आ गया है। उम्मीद करनी चाहिए कि सुन्नी वक्फ बोर्ड वामपंथियों के चंगुल से अपने आपको मुक्त करके सच बोलेगा और सच को स्वीकार करेगा। इससे न सिर्फ हिन्दू मुस्लिम एकता कायम होगी बल्कि शिया सुन्नी भाईचारा भी मजबूत होगी। 

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