केरल में लव जिहाद का जहर

क्या केरल में लव जिहाद एक सुनियोजित रणनीति है? आप ने इस्लाम के कुछ बड़े मौलवियों और मौलानाओं की तकरीर नहीं सुनी है तो यह सवाल आपको समझ में नहीं आयेगी। पाकिस्तान के मशहूर इस्लामिक विद्वान स्वर्गीय डॉ इशरार अहमद जब गजवा ए हिन्द की बात करते थे तो कहते थे इसकी शुरुआत मालाबार से होगी। समझना मुश्किल है कि पाकिस्तान में बैठा विद्वान केरल से गजवा ए हिन्द की शुरुआत क्यों बता रहा है? पाकिस्तान के बाद तो कश्मीर आता है। फिर हिमाचल। फिर पंजाब। इस तरह एक एक राज्य फतह करते हुए आगे बढ़ने की बजाय ये सीधे केरल कैसे पहुंच गये?

लेकिन अगर केरल के हालात को आप देखेंगे तो डॉ अहमद की बात को बहुत गलत भी नहीं पायेंगे। बीते कुछ सालों से केरल में लव जिहाद की सुगबुगाहट सुनाई दी तो पहले मीडिया और अदालत सबने इसे अफवाह करार दिया। केरल में अखिला का मामला सामने आया तो हाईकोर्ट ने न केवल मामले को निरस्त कर दिया बल्कि मामले को अदालत तक ले आनेवाले वकील को एक महीने की सजा भी सुना दी। अखिला के मां बाप ने दोबारा कोशिश की और इस बार न केवल हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया अखिला का धर्म परिवर्तन कराकर की गयी शादी को भी निरस्त कर दिया। अखिला के हादिया बनने की कहानी एक सुनियोजित षण्यंत्र था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी भांप लिया और पूरे मामले की एनआईए जांच के आदेश दे दिया।

अपने मां बाप की इकलौती संतान अखिला के हादिया बनने की कहानी शुरु होती है सिमी से। वही सिमी जिसे एक आतंकी संगठन के रूप में भारत में प्रतिबंधित किया जा चुका है। हालांकि ऐसे लोग आज भी मौजूद हैं जो कुछ लोग सिमी को क्रिमिनल मानने की बजाय विक्टिम मानते हैं। ये वही लोग हैं जो तालिबान अल कायदा ISIS और दुनिया भर के इस्लामी आतंकी संगठनों को भी अमरीकी कारगुज़ारी मानते हैं। लेकिन सरकार / अदालत / ख़ुफ़िया तंत्र के रिकार्ड में सिमी भारत में मुसलमानों के एक हिस्से के नौजवानों का आतंकवादी संगठन है जो प्रतिबंधित है।

सिमी पर प्रतिबंध के बाद इसी से निकलकर केरल में एक उग्रवादी संगठन सामने आया पीपुल्स फ़्रंट आफ इंडिया। लेकिन पीपुल्स फ्रंट आफ इंडिया तमाम आतंकी घटनाओं में फँसा और निशाने पर आ गया तो केरल में ही तीसरा नाम सामने आया सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया। यह बिल्कुल ऐसा ही था जैसे हाफिज सईद के लश्कर ए तैयबा पर रोक लगी तो उसने जमात उद दावा बना लिया। इस संगठन पर भी अब तक कई हिंसक मामले दर्ज हो चुके हैं। २०१५ में इसने सीपीएम के दो कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। सीसीटीवी फ़ुटेज टीवी चैनलों पर चल जाने से इस संगठन ने वह घटना स्वीकार भी कर ली । बाद में एनआईए ने इसके कुछ लोगों को आइसिस से संबंध में पकड़ा था।

अखिला को हादिया बनाने का मामला भी इसी संगठन से जुड़ा हुआ है। अखिला पढ़ने में कमजोर थी और उसकी पढ़ाई के दौरान ही उसकी मुलाकात सैफी जहां से होती है। सैफी जहां इसी सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया से जुड़ा हुआ था। वह अखिला को अपने प्यार के जाल में फंसाता है और उसके रहने खाने का खर्च उठाता है। यह बात जब घरवालों को पता चली तो अपनी बेटी को सैफी के चंगुल से छुड़ाने के लिए केरल हाईकोर्ट की शरण लेते हैं। पहले तो अदालत ने केस सुना ही नहीं लेकिन दूसरी बार हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए मामले को स्वीकार कर लिया। यह वह वक्त था जब केरल से आइसिस के लिए भर्ती होने का अभियान चल रहा था और २१ नौजवानों के सीरिया जाने की खबर आ गयी थी। लड़की के मां बाप ने इसी तर्क के साथ दोबारा अदालत की शरण ली कि उनकी लड़की को आतंकी बनाकर सीरिया भेजा जा सकता है। इसका शक इसलिए भी बढ़ता था क्योंकि शैफी की मां खाड़ी देश में ही काम करती है।

हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाइ के दौरान पाया कि अखिला के आसपास एसडीपीआई नामक संगठन के लोग ही ज्यादा नजर आ रहे हैं। वे ही बड़े बड़े वकील मुहैया करा रहे हैं, लड़की के ठहरने / भोजन/ वस्त्र के इंतज़ाम कर रहे हैं और वह कोर्ट के आदेश से इनसे मुक्त होकर अपनी पढ़ाई पूरी न कर सके इसलिये अचानक एक दिन उसकी शादी के दस्तावेज़ कोर्ट में पेश कर दिया।

सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने लड़की से पूछा कि वह अपनी होम्योपैथिक डाक्टर की डिग्री पूरी क्यों नहीं कर रही ? उसका ख़र्च कौन और क्यों उठा रहा है? उसके लिये वकील कौन खड़े कर रहा है? जवाब में लड़की ने हास्टल में रहकर डिग्री पूरी करने की बात कही, कोर्ट ने मान लिया और लड़की के बाप ने हास्टल की फ़ीस चुकाने का एफेडेविट दिया !

हफ़्ते बाद अगली सुनवाई पर लड़की के वकील ने कोर्ट को बताया कि पिछली सुनवाई के दिन ही शाम को लड़की ने एसडीपीआई के सोशल मीडिया प्रमुख सैफी जहां से निकाह कर लिया है। अदालत में जानबूझकर इसे एक मैट्रिमोनियल रिश्ता बताया गया और प्रेम विवाह की बात छिपा ली गयी। लेकिन कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट में पाया कि सैफी जहां पहले से एक युवा पर जानलेवा हमले का अभियुक्त है। लड़के का एक दोस्त कुछ दिन पहले एनआई द्वारा आतंकवाद के संदेह में धरा जा चुका था और लड़का खुद वापस विदेश जाना चाहता है। अदालत ने पाया कि अखिला के चार अलग अलग नाम से एफिडेविट तैयार किये गये हैं और बार बार वकीलों को बदला जा रहा है। हाईकोर्ट के सामने यह स्पष्ट हो गया था कि मामला संदेस्पास्पद है और उसने अखिला और सैफी की शादी को निरस्त कर दिया।

फैसले के विरोध में बेरोजगार सैफी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और मंहगे वकीलों और कोर्ट फीस को भरते हुए अपनी शादी को जायज करार देने की गुहार लगाई और अखिला को वापस उसके पास आने देने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त जज की अगुवाई में एनआईए जांच का आदेश दे दिया। एनआईए ने एफआईआर दर्ज करके जांच शुरु कर दी है। उम्मीद करनी चाहिए कि इस जांच पड़ताल से भविष्य में लव जिहाद के इस जहर को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।

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