डेरा पर अपराध का घेरा

१९४८ में जब शाह मस्ताना बलोचिस्तानी सिरसा आये और उन्होंने यहां डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की तो अपने शिष्यों के लिए तीन नियम बनाये। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी मांस नहीं खायेंगे, शराब नहीं पियेंगे और स्त्री हो या पुरुष दोनों एक दूसरे से अवैध संबंध नहीं बनायेंगे। लेकिन कैसा दुर्भाग्य है कि डेरा की स्थापना के ६७ साल बाद आज सच्चा सौदा का कोई शिष्य नहीं बल्कि उस डेरे का गद्दीनशीं मालिक ही बलात्कार के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंच गया है। क्या है डेरा सच्चा सौदा के ६७ सालों में उत्थान पतन की कहानी?

शाह मस्ताना कलात, बलोचिस्तान में पैदा हुए जो कि इस समय पाकिस्तान के कब्जे में है। १८९१ में क्षत्रिय परिवार में पैदा हुए शाह के बचपन का नाम था खेमामल। खेमामल बचपन से ही आध्यात्मिक रुझान वाले बालक थे और थोड़ा सा होश संभलते ही चौदह साल की उम्र में वो गुरु की खोज में निकल पड़े। आठ साल बाद उनकी तलाश पूरी हुई पंजाब के व्यास शहर में जहां उनकी मुलाकात बाबा सावन सिंह से हुई। बाबा सावन सिंह बाबा शिवदयाल सिंह के शिष्य थे जिन्होंने राधा स्वामी सत्संग व्यास की स्थापना की थी। बाबा सावन सिंह राधा स्वामी सत्संग के प्रमुख भी बने थे। बाबा सावन सिंह ने खेमामल को आध्यात्मिक शिक्षा और नाम दान दिया। अब खेमामल शहंशाह मस्ताना जी हो गये। इन्हीं मस्ताना जी ने १९४८ में गुरु के आदेशानुसार हरियाणा के सिरसा में डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की और नाम जप से ध्यान की शिक्षा देना शुरु किया।

यह बेपरवाह शाह मस्ताना ही थे जिन्होंने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में डेरा के २५ आश्रमों की स्थापना की। डेरा की स्थापना के १२ साल बाद शाह मस्ताना का १९६० में निधन हो गया। अब डेरा सच्चा सौदा से जुड़े लोग यह दावा करते हैं कि मरते वक्त ही शाह मस्ताना ने ये संकेत दे दिये थे कि वो तीसरे शरीर में सात साल बाद अवतरित होंगे। सात साल बाद यानी १९६७। गुरप्रीत राम रहीम का जन्म भी १९६७ में ही हुआ था इसलिए डेरा के अनुयायी मानते हैं कि गुरुप्रीत राम रहीम सिंह असल में डेरा के संस्थापक शाह मस्ताना के ही अवतार हैं। हालांकि शाह मस्ताना के उत्तराधिकारी हुए शाह सतनाम जी महाराज। यह शाह सतनाम जी महाराज ही थे जिन्होंने अपनी रुहानी ताकत से गुरुप्रीत को पहचाना और उन्हें अपने बाद गद्दीनशीं होने का उत्तराधिकारी नियुक्त किया।

दुनिया की आध्यात्मिक दुनिया सबसे रहस्यमय दुनिया होती है। यहां जन्म जन्मांतर के ऐसे रहस्य भरे पड़े रहते हैं कि किसी सामान्य आदमी के लिए इसे समझ पाना नामुमकिन होता है। वह या तो भरोसा कर सकता है या फिर सिरे से बकवास कहकर खारिज कर सकता है। हो सकता है जैसा डेरा के भक्तों द्वारा दावा किया जाता है कि राम रहीम ही शाह मस्ताना हैं या फिर यह भी हो सकता है कि राम रहीम के शिष्यों द्वारा यह झूठ फैलाया गया हो। एक तीसरा पक्ष और हो सकता है जो सिर्फ आध्यात्म की दुनिया से जुड़े लोग अनुभव कर सकते हैं कि शाह मस्ताना की अतृप्त इच्छाएं भोग के लिए उन्हें फिर से शरीर में खींच लाई और उसकी सजा ये हुई है कि सारा डेरा ही समाप्त हुआ जाता है।

कोई बिल्कुल दावे से नहीं कह सकता सच क्या है, जिसकी जैसी मान्यता है वह अपनी मान्यता के साथ ही आगे बढ़ेगा। लेकिन सवाल जरूर उठा सकता है कि अगर राम रहीम शाह मस्ताना का तीसरा शरीर हैं तो फिर अपने ही बनाये नियम को क्यों तोड़ दिया जिसमें उन्होंने किसी पर स्त्री से शारीरिक संबंध न बनाने का नियम बनाया था? आज जो सच सामने है वह यही है राम रहीम बलात्कार के दोषी करार दिये जा चुके हैं और उनके ऊपर हत्या का भी आरोप है। अपने पापों को छुपाने के लिए उन्होंने पाप दर पाप किये। उनके गुफा किस्से अब गुफा से निकलकर देश दुनिया में पहुंच चुके हैं। उनके ड्राइवर रहे खट्टा सिंह ने आज से दस साल पहले ही खुलासा किया था कि गुफा के पार कैसे कैसे अपराध अंजाम दिये जाते हैं। जो लड़की ‘बापजी’ की गुफा में जाने से मना करती थी उसे मारा पीटकर अधमरा कर दिया जाता था। २०११ में विश्वास गुप्ता नामक व्यक्ति ने अदालत के सामने जाकर गुहार लगाई कि उसकी पत्नी प्रियंका जिसे गुरमीत ने अपनी मुंहबोली बेटी हनीप्रीत बनाकर रखा है असल में अपनी रखैल बना रखा है। उन दो महिलाओं के संघर्ष की कहानी अलग ही है जिन्होंने गुरप्रीत राम रहीम को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

राम रहीम को लगता था कि वह अपने रसूख और राजनीतिक ताकत की बदौलत अपने आप को बचा ले जाएंगे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उनकी कोई राजनीतिक जुगलबंदी उनके काम न आई और आखिरकार अदालत ने उनके कुकर्मों की सजा सुना दी। अगले बीस साल उनको जेल कोठरी में ही बिताने हैं और अपने कर्मों का हिसाब करना है। क्योंकि उन्होंने डेरा जैसी धार्मिक सामाजिक व्यवस्था को विकृत किया और उसे अपराध और अय्याशी का अड्डा बना दिया।

राम रहीम ने डेरा पर अपना प्रभुत्व कायम रखने के लिए कथित तौर पर उन लोगों को भी रास्ते से हटा दिया जो उनके गुरु शाह सतनाम के करीबी थी। उन्हें इसकी सजा मिलनी ही थी और वह मिल गयी। भारत की कानून व्यवस्था ने निडर और निष्पक्ष रहते हुए अपना काम किया लेकिन इस पूरे मामले में बीजेपी का रोल बहुत निंदनीय और धर्म विरोधी है। ऐसा लगता है बीजेपी और मोदी इस अवसर का इस्तेमाल डेरा को खत्म करने के लिए कर रहे हैं। डेरा भक्तों पर गोली चलवाने से लेकर डेरों पर सील लगाने तक बीजेपी की मंशा साफ नजर आ रही है कि वह राम रहीम के बहाने डेरा को ही नेस्तनाबूत कर देना चाहती है। धर्म और समाज के लिए यह राम रहीम को दी जानेवाली सजा से ज्यादा बड़े खतरे की आहट है। बीजेपी को समझना चाहिए राम रहीम आपराधिक कृत्य के दोषी हैं, डेरा सच्चा सौदा नहीं।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s