बुलेट ट्रेन के बहाने हुई मोदी फड़नवीस में गुजराती मराठी की जंग

गुजरात और महाराष्ट्र की ऐतिहासिक लड़ाई एक बार फिर उभर आयी है। इस बार मुद्दा भले ही बुलेट ट्रेन को महाराष्ट्र सरकार द्वारा दी जानेवाली जमीन हो लेकिन यह सिर्फ हाथी के दिखानेवाले दांत हैं। असल मुद्दा कुछ और है जिसके कारण मोदी और फणनवीस के बीच लंबी खींचतान के बाद आखिरकार बुलेट ट्रेन के बांन्द्रा कुर्ला काम्प्लेक्स स्टेशन के लिए 0.9 हेक्टेयर जमीन देकर समस्या को सुलझा लिया गया है लेकिन सवाल ये है कि कब तक? जिन वजहों से महाराष्ट्र सरकार बीकेसी (बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स) में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए जगह नहीं दे रही थी क्या उसका समाधान खोज लिया गया है? दोनों राज्यों के बीच उठे इस झगड़े की असल वजह क्या है?

मुंबई से साबरमती के बीच बुलेट ट्रेन चलाने में निजी तौर पर मोदी का बहुत बड़ा योगदान है। जिन दिनों वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे वो जापान के दौरे पर जाकर वहां लॉबिंग कर चुके थे कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन चले तो साबरमती और मुंबई के बीच ही चले। कांग्रेस सरकार ने जापान सरकार से 2012 में ही समझौता कर लिया था और जापान सरकार सस्ते दर पर लोन देने के लिए तैयार भी हो गयी। लेकिन पीएम बनने के बाद मोदी ने बुलेट ट्रेन बनाने को गति दी और तीन साल में ही बुलेट ट्रेन के लिए भूमिपूजन भी करवा दिया। मोदी चाहते हैं कि इस रूट पर 2024 के पहले बुलेट ट्रेन दौड़ जाए।

बुलेट ट्रेन के लिए जो मूल डीपीआर था उसमें ट्रेन को बीकेसी से ही शुरु होना था। लेकिन महाराष्ट्र में फड़नवीस सरकार बनने के उस जगह पर आपत्ति दर्ज की गयी जिसे बुलेट ट्रेन के भूमिगत स्टेशन के लिए दिया जानेवाला था। इसका कारण ये था कि इसी जमीन पर (जी प्लस ब्लॉक) महाराष्ट्र सरकार लंबे समय से इंटरनेशनल फाइनेन्सियल सर्विस सेन्टर (आईएफएससी) बनाने की कवायद कर रही है। 2007 में वर्ल्ड बैंक के एक भारतीय अधिकारी ने यहां आईएफएससी बनाने का सुझाव दिया था। लेकिन ठीक उसी जगह पर बुलेट ट्रेन का स्टेशन प्रस्तावित कर दिया गया तो महाराष्ट्र की फड़नवीस सरकार ने आपत्ति दर्ज की। महाराष्ट्र सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए धारावी और बीकेसी में ही किसी दूसरी जगह प्लाट देने का प्रस्ताव किया लेकिन केन्द्र सरकार ने यह कहकर मना कर दिया कि अब रूट में रत्तीभर भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

बुलेट ट्रेन के लिए भूमिपूजन के मौके पर भी गुजराती मराठी का संघर्ष तब उभरकर सामने आ गया जब देवेन्द्र फड़नवीस ने मंच से ही कह दिया कि भूमिपूजन भले ही गुजरात में हो रहा है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के ही हाथों इसका उद्घाटन महाराष्ट्र में होना चाहिए।

इधर केन्द्र की मोदी सरकार बुलेट ट्रेन के रूट में परिवर्तन करने को तैयार नहीं थी और उधर महाराष्ट्र सरकार उस जगह को देने के लिए तैयार नहीं थी जिसे रेल मंत्रालय मांग रहा था। ऊपर से भले ही यह झगड़ा सिर्फ स्टेशन बनाने का दिखता हो लेकिन अंदरखाने लड़ाई इंटरनेशनल फाइनेन्सियल सर्विस सेन्टर को लेकर है। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब अहमदाहाद और गांधीनगर के बीच एक गिफ्ट सिटी का उद्घाटन कर चुके थे। इस गिफ्ट सिटी में एक इंटरनेशनल फाइनेन्सियल सर्विस सेन्टर भी स्थापित किया जा चुका है। हालांकि अभी तक गिफ्ट सिटी में न तो कोई खास निर्माण हुआ है और न ही दावे के मुताबिक वित्तीय गतिविधियां शुरु हुई हैं लेकिन प्रधानमंत्री बन जाने के बाद भी मोदी की पूरी कोशिश है कि गिफ्ट सिटी परियोजना को सफल बनाया जाए।

ऐसे में अगर मुंबई में इंटरनेशनल फाइनेन्सियल सर्विस सेन्टर स्थापित हो जाता है तो गिफ्ट सिटी का आईएफएससी सफल होने के पहले ही असफल हो जाएगा। मुंबई को देश की वित्तीय राजधानी का दर्जा प्राप्त है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं गुजरात की बजाय महाराष्ट्र को ही प्रमुखता देंगी। ऐसा इसलिए कि दुनियाभर में एक देश में एक ही आईएफएससी स्थापित किया जाता रहा है जो सीधे विदेशी वित्तीय संस्थानों से संपर्क और संबंध स्थापित करता है। ऐसे में जरुरी है कि गिफ्ट सिटी में आईएफएससी स्थापित होने के कारण मुंबई में इसे स्थापित होने से रोक दिया जाए। आईएफएससी के लिए संरक्षित जगह पर बुलेट ट्रेन का स्टेशन बनने से इसका खतरा भी पैदा हो गया था लेकिन फिलहाल यह खतरा फौरी तौर पर टल गया है।

भूमि पूजन से तीन दिन पहले स्टेशन के लिए जमीन आवंटित करते समय महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि रेल मंत्रालय ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वो भविष्य में कोई आपत्ति नहीं करेंगे। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होगा? क्या मोदी के प्रधानमंत्री रहते हुए बीकेसी में इंटरनेशनल फाइनेन्सियल सर्विस सेन्टर का निर्माण शुरु हो पायेगा? जिस तरह से महाराष्ट्र में शिवसेना ने इस मुद्दे पर फड़नवीस का साथ दिया है उससे तो यही लगता है कि एक ही पार्टी होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात हित और फडनवीस का महाराष्ट्र हित भविष्य में फिर टकरायेगा क्योंकि दोनों धड़े दलीय रिश्ते से ऊपर उठकर अपने अपने राज्य का वित्तीय हित साध रहे हैं। वरना ऐसे दौर में जब मोदी की मंशा के विरुद्ध बीजेपी में किसी के अड़ने की औकात नहीं है तब फड़नवीस क्योंकर अड़ते? क्योंकि वो जानते हैं कि वित्तीय हित की इस लड़ाई में महाराष्ट्र उनके साथ है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s